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पूर्वी और नई दिल्ली के बीच अटका है गठबंधन

शीला दीक्षित की पहली शिकायत यह है कि अरविंद केजरीवाल ने इस मसले पर उनसे सीधे कोई बात नहीं की। वह कह भी चुकी हैं कि केजरीवाल ने उनसे इस मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं की।

Author March 15, 2019 2:55 AM
दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित और दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल फोटो सोर्स- जनसत्ता

अजय पांडेय

लोकसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस ने बंगाल से लेकर महाराष्ट्र तक और कर्नाटक से लेकर बिहार तक एक के बाद एक कई राज्यों में चुनावी गठबंधन कायम कर लिया है, लेकिन दिल्ली में चुनावी गठबंधन को लेकर पार्टी में खुलकर घमासान शुरू हो गया है। गठबंधन के बहाने सूबे के दो कांग्रेसी दिग्गज, प्रदेश अध्यक्ष शीला दीक्षित व पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन ने एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कहा जा रहा है कि पूर्वी दिल्ली व नई दिल्ली संसदीय सीटों को लेकर गठबंधन की गाड़ी अटकी हुई है।

सूत्रों ने बताया कि गुजरात में हाल ही में संपन्न हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के दरम्यान दिल्ली कांग्रेस के प्रभारी पीसी चाको की गठबंधन पर बातचीत हुई। कार्यसमिति के कई वरिष्ठ सदस्यों ने भी इस मामले में यह राय दी कि आम आदमी पार्टी से गठबंधन नहीं करने की जिद में दिल्ली की सात की सात सीटें भाजपा की झोली में डाल देना कतई उचित नहीं होगा। वहां से आने के बाद चाको ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की पहल पर शुरू किए गए शक्ति मोबाइल ऐप के जरिए सूबे के कार्यकर्ताओं से गठबंधन पर उनकी राय मांगी। संबंधित आॅडियो वायरल हो गया। इसे लेकर प्रदेश अध्यक्ष दीक्षित ने गुरुवार को कहा कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि इस तरह कार्यकर्ताओं की राय मांगी जा रही है। उनका यह भी कहना था कि जब एक राय से गठबंधन को खारिज करने का फैसला हो चुका है, फिर नए सिरे से इस कवायद के क्या मायने हैं।

दीक्षित के बयान पर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष माकन ने कहा कि शक्ति मोबाइल ऐप कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा शुरू किया गया है और इसकी रिपोर्ट भी सीधे कांग्रेस अध्यक्ष को जाती है। उन्होंने दीक्षित का नाम लिए बगैर कहा कि किसी नेता को यह अधिकार नहीं है कि वह कांग्रेस अध्यक्ष के फैसले पर सवाल उठाए। सूत्रों का कहना है कि इस गठबंधन के मामले में शीला दीक्षित की पहली शिकायत यह है कि अरविंद केजरीवाल ने इस मसले पर उनसे सीधे कोई बात नहीं की। वह कह भी चुकी हैं कि केजरीवाल ने उनसे इस मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं की।

दूसरी ओर पूर्वी दिल्ली संसदीय सीट से दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित दो-दो बार सांसद रहे। इस बार आम आदमी पार्टी ने यहां पर पहले से ही न केवल अपना उम्मीदवार उतार रखा है, बल्कि दावा भी ठोक रखा है। जाहिर तौर पर केजरीवाल की यह जिद दीक्षित को पसंद नहीं आ रही होगी। दूसरी ओर सूबे की कांग्रेसी सियासत में दीक्षित के घोर विरोधी माने जाने वाले अजय माकन की नई दिल्ली सीट गठबंधन में शामिल बताई जा रही है। इसका सीधा मतलब यह है कि एक ओर दीक्षित के बेटे को लोकसभा का चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिलेगा और दूसरी ओर उनके घोर विरोधी माकन के लोकसभा पहुंचने का रास्ता साफ हो जाएगा।

दिल्ली में गठबंधन के सवाल पर कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इस मुद्दे पर अपनी राय रख चुके हैं। इसके बावजूद अगर पार्टी इस मामले में अपने कार्यकर्ताओं की राय मांग रही है तो इसमें भला किसी को क्यों आपत्ति होनी चाहिए। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस हाईकमान इस हकीकत को मानकर चल रहा है कि अकेले कांग्रेस के लिए सूबे की सातों सीटों पर जीत दर्ज करना फिलहाल मुमकिन नहीं है। उसके वोट बैंक का बड़ा हिस्सा आम आदमी पार्टी के कब्जे में है।

जाहिर तौर पर उससे गठबंधन के बाद ही इन सभी सीटों पर जीत की संभावना बनेगी। बताया जा रहा है कि इस मामले में खुद पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने रुचि ली है और उनके राजनीतिक सलाहकार रह चुके पार्टी के कोषाध्यक्ष अहमद पटेल सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने भी इस मामले में दखल दी है। बहरहाल, दिल्ली में गठबंधन पर माथापच्ची जारी है। दूसरी ओर यह गठबंधन अजय माकन के लिए इसलिए मुफीद है क्योंकि जहां यह लोकसभा की अहम लड़ाई में जीत दर्ज करने में उनके लिए मददगार साबित हो सकता है, वहीं उनको मालूम है कि उनकी धुर विरोधी दीक्षित के लिए यह निजी तौर पर बेहद घाटे का सौदा है।

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