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कांग्रेस का प्रयोग : तजुर्बा और तरुणाई

विभिन्न मौकों पर राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि वह युवाओं के साथ ही बुजुर्ग-अनुभवी नेताओं को लेकर भी चलेंगे। मामला कांग्रेस कार्यसमिति के गठन का हों अथवा विभिन्न राज्यों में अध्यक्ष व प्रभारी बनाने का रहा हो। उन्होंने कोशिश की कि अनुभव की छांव में तरुणाई को आगे बढ़ने का मौका मिले।

Author December 13, 2018 6:18 AM
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी। (फोटो सोर्स – पीटीआई)

अजय पांडे

हिंदी पट्टी के तीन राज्यों मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के चुनाव में कांग्रेस की जीत में तजुर्बा और तरुणाई के मेल की पटकथा बताई जा रही है। कांग्रेस के नेताओं के मुताबिक, पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी इसी रणनीति के दम पर अपनी को पराजय के पतझड़ से उबार कर विजय के वसंत तक पहुंचाने में कामयाब हुए हैं। एक साल पहले राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभालने के पहले से ही उनके करीब युवा नेताओं की एक टीम खड़ी हो चुकी थी। इसे टीम राहुल कहा गया। रणदीप सिंह सुरजेवाला, सचिन पायलट, ज्योतिरादित्य सिंधिया, अशोक तंवर, जितेंद्र सिंह, आरपीएन सिंह, सुष्मिता देव, तरुण गोगोई या ऐसे ही अन्य नाम- कांग्रेस अध्यक्ष की नई टीम में शामिल किए गए। इनके नीचे युवा नेताओं की कई परतें हैं, जिन्हें राहुल गांधी ने आगे बढ़ाया है। विभिन्न मौकों पर राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि वह युवाओं के साथ ही बुजुर्ग-अनुभवी नेताओं को लेकर भी चलेंगे। मामला कांग्रेस कार्यसमिति के गठन का हों अथवा विभिन्न राज्यों में अध्यक्ष व प्रभारी बनाने का रहा हो। उन्होंने कोशिश की कि अनुभव की छांव में तरुणाई को आगे बढ़ने का मौका मिले।

कांग्रेस ने मध्यप्रदेश, राजस्थान व छत्तीसगढ़ तीनों ही राज्यों में अनुभवी के साथ ही युवा चेहरे उतारे। मध्यप्रदेश में कमलनाथ और दिग्विजय हैं, तो सिंधिया भी हैं। राजस्थान में पायलट हैं तो गहलोत भी हैं, सीपी जोशी भी हैं। हरियाणा को देखें तो पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा हैं तो सुरजेवाला, अशोक तंवर, कुमारी शैलजा, कुलदीप बिश्नोई और दीपेंद्र हुड्डा भी हैं। पंजाब में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर हैं तो नवजोत सिंह सिद्धू भी हैं।

राहुल ने दोनों स्तर के नेताओं के बीच तालमेल भी बनवाया। तीनों राज्यों में मुख्यमंत्री के सवाल पर कांग्रेस को तालमेल बना लेने की उम्मीद है। चुनाव प्रचार समाप्त कर दिल्ली लौटे गहलोत से जब यह सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि जो पार्टी तय करेगी, उसको स्वीकार करूंगा। पायलट भी लगातार कहते रहे हैं कि हमारे बीच यह कोई मुद्दा नहीं है। कमलनाथ व सिंधिया ने भी समय-समय पर यही बात कही।

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