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Lok Sabha Election 2019: सपा-बसपा संयुक्त कार्यकर्ता सम्मेलन में दिखा मनमुटाव, कुर्सियों को लेकर कानपुर में भिड़े कार्यकर्ता

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): कानपुर में 11 मार्च को हुए संयुक्त कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान सपा-बसपा कार्यकर्ता कुर्सियों को लेकर आपस में भिड़ गए। ऐसा तब हुआ, जबकि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मायावती के अपमान को अपना अपमान बता चुके हैं।

कानपुर में संयुक्त कार्यकर्ता सम्मेलन में पहुंचे सपा-बसपा कार्यकर्ता फोटो सोर्स- स्थानीय
Lok Sabha Election 2019: आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर एक तरफ जहां सपा-बसपा ने उत्तर प्रदेश में बीजेपी को हराने के लिए गठबंधन किया है, लेकिन दोनों दलों के कार्यकर्ताओं में मनमुटाव दिख रहा है। बीते सोमवार (11 मार्च) को सपा-बसपा के संयुक्त कार्यकर्ता सम्मेलन में कुर्सियों पर बैठने को लेकर बसपा पदाधिकारी और सपाइयों के बीच जमकर बहस हुई।

 आपसी तालमेल बैठाने के लिए रखा गया कार्यक्रमः दरअसल बसपा सुप्रीमो ने कानपुर मंडल के पदाधिकारियों को निर्देश दिए थे कि सपा बसपा के कार्यकर्ताओं के बीच आपसी तालमेल बैठाने और जान पहचान के लिए संयुक्त कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन किया जाए। बहन जी के निर्देश पर सोमवार को बसपा ने संयुक्त कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन किया था।

कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़पः बसपा ने कानपुर के एक गेस्ट हाउस में सपा-बसपा संयुक्त कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन किया था। सपा नगर अध्यक्ष और सपा नेता अपने समर्थकों के साथ पहले कार्यक्रम में पहुंचे और मंच पर रखी कुर्सियों पर कब्जा जमा लिया । कुछ देर बाद जब बसपा जिलाध्यक्ष रामशंकर समेत बसपा नेता कार्यकर्ता कार्यक्रम में पहुंचे तो उन्हें मंच पर एक भी कुर्सी बैठने को नहीं मिली। काफी देर तक बसपा के पदाधिकारी खड़े रहे, लेकिन सपा के नेताओं ने उन्हें मंच पर बैठने के लिए जगह नहीं दी। इसी बात को लेकर दोनों दलों में बहस शुरू हो गई। बाद में कुछ वरिष्ठ नेताओं के दोनों दलों के पदाधिकारियों को समझाने पर मामला शांत हुआ। इसके बाद सपा नगर अध्यक्ष ने मंच पर तीन अन्य कुर्सियां मंगवाकर बसपा नेताओं को मंच पर बैठने की जगह दी।

बता दें कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव अपने कार्यकर्ताओं से कह चुके हैं कि मायावती का अपमान मेरा अपमान होगा। दोनों दलों के कार्यकर्ताओं को एक साथ मिलकर लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटना है। हालांकि, जमीनी हकीकत देखी जाए तो दोनों दलों के कार्यकर्ता आपस में सामंजस्य नहीं बैठा पा रहे हैं।

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