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Lok Sabha Election 2019: ‘लाठी, हाथी और 786’ को एक साथ करेंगे अखिलेश ? जानें आजमगढ़ सीट का इतिहास

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): अखिलेश यादव अपने पिता मुलायम सिंह के गढ़ आजमगढ़ से चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में उनके फैसले को उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में यादव, दलित और मुस्लिम मतदाताओं को एकजुट करने के कदम के रूप में देखा जा रहा है।

मायावती और अखिलेश यादव, फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

Lok Sabha Election 2019: समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव का अपने पिता मुलायम सिंह के गढ़ आजमगढ़ से चुनाव लड़ने के फैसले को उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में यादव, दलित और मुस्लिम मतदाताओं को एकजुट करने के कदम के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे में अखिलेश के फैसले पर आजमगढ़ के सपा अध्यक्ष हवलदार सिंह ने ‘लाठी, हाथी और 786’ का बयान दिया है। बता दें कि समाजवादी पार्टी आगामी लोकसभा चुनाव बहुजन समाज पार्टी (BSP) और राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के साथ गठबंधन में लड़ रही है।

क्या बोले हवलदार यादव: दरअसल अखिलेश के इस फैसले पर हवलदार यादव ने कहा, ‘अखिलेश का फैसला लाठी, हाथी और 786 मतदाताओं को एक करेगा। उनकी उपस्थिति से पूरे पूर्वी यूपी क्षेत्र में सपा-बसपा गठबंधन के उम्मीदवारों की चुनावी संभावनाओं को बढ़ावा मिलेगा क्योंकि आजमगढ़ गोरखपुर और वाराणसी के बीच स्थित है।’ गौरतलब है कि इस बयान में लाठी, हाथी और 786 से उनका मतलब यादव, दलित और मुस्लिम से था। इसके बाद हवलदार ने कहा- इस क्षेत्र ने नेताजी (मुलायम सिंह यादव) के सांसद रहते और अखिलेश के मुख्यमंत्री रहते तरक्की की है और लोग ये बात जानते हैं।

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मुलायम सिंह यादव की है सीट: बता दें कि यह सीट वर्तमान में सपा संरक्षक मुलायम सिंह के पास है जिन्होंने मैनपुरी और आजमगढ़ से 2014 के चुनाव जीते थे। उन्होंने पूर्वी यूपी में पार्टी की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए आजमगढ़ को बरकरार रखा था। इसके साथ ही बता दें कि निर्वाचन क्षेत्र में यादवों, जाटवों और मुसलमानों की पर्याप्त आबादी है। तीन समुदाय जो राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य में एसपी-बीएसपी गठबंधन के क्रक्स के रूप में हैं। जबकि यादव ओबीसी जाति के सबसे प्रमुख हैं, जाटव राज्य की 56 प्रतिशत से अधिक दलित आबादी वाले हैं और माना जाता है कि वे मायावती के नेतृत्व वाली बीएसपी के प्रति वफादार हैं।

जानें सीट का इतिहास: गौरतलब है कि 1996 से आजमगढ़ लोकसभा सीट पर केवल मुस्लिम और यादव ही जीते हैं। रमाकांत यादव ने 1996 और 1999 में सपा के उम्मीदवार के रूप में सीट जीती। उन्होंने 2004 में बसपा प्रत्याशी के रूप में और 2009 में भाजपा के टिकट पर फिर से जीत दर्ज की। इस सीट पर 1998 और 2008 के उपचुनाव में अकबर अहमद डम्पी ने बसपा के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी।

 

मोदी लहर भी रही थी फेल: गौरतलब है कि 2014 के आम चुनावों में “मोदी लहर” के बावजूद, मुलायम सीट जीतने में सफल रहे और रमाकांत को 63,000 मतों से हराया और 35.43 प्रतिशत वोट हासिल किए। बीजेपी के रमाकांत को 28.85 फीसदी वोट मिले, वहीं बीएसपी के उम्मीदवार शाह आलम उर्फ ​​गुड्डू जमाली को 27.75 फीसदी वोट मिले। यानी आजमगढ़ में सपा और बसपा का संयुक्त वोट प्रतिशत 63 प्रतिशत से अधिक था।

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