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Lok Sabha Election 2019: चुनावी किस्सा: दो साल पहले भारी मतों से जीतकर केंद्र में बने थे मंत्री, चुनाव आया तो लोगों ने वस्त्र मंत्री को निर्वस्त्र कर भगाया

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): 1991 के चुनावों में नारा लगता था- भारत का वस्त्र मंत्री निर्वस्त्र होकर भागा।

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के साथ भाजपा नेता हुकुमदेव नारायण यादव। (Express Photo)

Lok Sabha Election 2019: बात साल 1991 की है। प्रचंड गर्मी (मई-जून) के दिनों में देश में 10वीं लोकसभा के लिए आम चुनाव हो रहे थे। दिसंबर 1989 में नौवीं लोकसभा का चुनाव होने के बाद केंद्र में वीपी सिंह की अगुवाई में नेशनल फ्रंट की सरकार बनी थी, जिसे वाम दलों और भाजपा ने समर्थन दिया था लेकिन मंडल कमीशन की सिफारिशें लागू होने के बाद से भाजपा ने देश में राम मंदिर निर्माण का आंदोलन छेड़ दिया था।

भाजपा के तब के अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने 25 सितंबर 1990 को सोमनाथ से लेकर अयोध्या तक राम रथ यात्रा निकाली थी लेकिन 23 अक्टूबर, 1990 को बिहार पहुंचने पर वहां की लालू यादव की सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। इससे गुस्साई भाजपा ने केंद्र की वीपी सिंह सरकार से समर्थन वापस खींच लिया था और उनकी सरकार गिर गई थी। हालांकि, बाद में नवंबर 1990 में चंद्रशेखर ने वाम दलों और कांग्रेस के सहयोग से केंद्र में सरकार बनाई थी। कांग्रेस द्वारा समर्थन वापसी के बाद चंद्रशेखर की सरकार भी कुछ महीनों के बाद गिर गई और 10वीं लोकसभा चुनाव का फैसला हुआ।

चंद्रशेखर की सरकार में तब बिहार के कद्दावर यादव नेता हुकुमदेव नारायण यादव कपड़ा मंत्री थे। वो सीतामढ़ी संसदीय सीट से 1989 में जनता दल के टिकट पर जीत कर गए थे। लेकिन चंद्रशेखर के पीएम बनते ही उन्होंने जनता दल छोड़कर समाजवादी जनता पार्टी (राष्ट्रीय) का दामन थाम लिया था। 1989 में हुकुमदेव नारायण यादव ने भारी मतों से जीत दर्ज की थी। उन्हें कुल तीन लाख 35 हजार 796 वोट मिले थे। उन्होंने कांग्रेस के नागेंद्र प्रसाद यादव को हराया था लेकिन चुनाव जीतने के बाद हुकुमदेव नारायण यादव ने इलाके को भुला दिया था। संसदीय इलाके से मुंह मोड़ लेने की वजह से उनके खिलाफ जनता में जदबर्दस्त आक्रोश था।

1991 में जब तत्कालीन केंद्रीय कपड़ा मंत्री हुकुमदेव नारायण यादव सीतामढ़ी से फिर चुनाव में नामांकन दर्ज करने पहुंचे थे, तब उन्हें जनता ने कलेक्ट्रेट में ही घेर लिया था। उनके विरोधी दावा करते हैं कि तब पब्लिक से हुकुमदेव नारायण यादव की भिड़ंत हो गई थी, लोग उनके कपड़े तक फाड़ डाले थे। ऐसी स्थिति में आधा-अधूरा नामांकन छोड़कर हुकुमदेव नारायण यादव को वहां से भागना पड़ा था और दरभंगा से चुनाव लड़ना पड़ा था लेकिन यहां उनकी जमानत जब्त हो गई थी। विरोधी यह भी दावा करते हैं कि उस वक्त सीतामढ़ी में नारा लगता था, ” जब जनता का जोश जागा, भारत का वस्त्र मंत्री निर्वस्त्र होकर भागा।”

बाद में जनता दल के टिकट पर सीतामढ़ी से नवल किशोर राय ने रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज की थी। उन्हें करीब 65 फीसदी वोट मिले थे। राय ने कुल चार लाख 25 हजार 186 वोट हासिल किए थे। उन्होंने कांग्रेस के रामबृक्ष चौधरी को करारी शिकस्त दी थी। चुनावी मैदान में तब कुल 23 उम्मीदवार थे जिनमें से 21 की जमानत जब्त हो गई थी।

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