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पांच साल पहले हुआ शिलान्यास, आज तक नहीं मिली मेट्रो

इलाके में मेट्रो बनाने के लिए साल 2014 में जमीन अधिग्रहीत की गई थी। मेट्रो की येलो लाइन को समयपुर बादली से आगे बढ़ाते हुए हुड्डा सिटी सेंटर को समयपुर बादली की जगह बढ़ाकर सिरसपुर को भी जोड़ना था।

Author Published on: April 23, 2019 1:53 AM
उदित राज दिल्ली से भाजपा सांसद हैं। (file pic)

दिल्ली देहात के सिरसपुर गांव के लोगों को आज भी आने-जाने के लिए बस या मेट्रो की सुविधा नहीं मिली है। न ही यहां आवाजाही का कोई अन्य इंतजाम है। पांच साल पहले भाजपा सांसद उदित राज ने इलाके में मेट्रोे सेवा शुरू कराने का आश्वासन देते हुए इसका शिलान्यास भी किया था, लेकिन आज तक यहां मेट्रो का नामोनिशान नहीं है।  वहीं दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) का कहना है कि सिरसपुर में मेट्रो शुरू करने की योजना अभी पूरी तरह से मंजूर ही नहीं हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हरियाणा के गुरुग्राम या दिल्ली के किसी भी इलाके में जाने के लिए उनके गांव में सार्वजनिक परिवहन का कोई भी साधन नहीं मिलता। परिवहन की समस्या से जूझ रहे स्थानीय लोगों ने इस बार चुनाव का बहिष्कार करने की चेतावनी दी है।

इलाके में मेट्रो बनाने के लिए साल 2014 में जमीन अधिग्रहीत की गई थी। मेट्रो की येलो लाइन को समयपुर बादली से आगे बढ़ाते हुए हुड्डा सिटी सेंटर को समयपुर बादली की जगह बढ़ाकर सिरसपुर को भी जोड़ना था। इसके लिए परियोजना रिपोर्ट तैयार हुए बिना ही भाजपा सांसद उदित राज ने इसका शिलान्यास कर दिया था। करीब 215 करोड़ की इस परियोजना को साल 2018 में ही पूरा होना था, लेकिन आज तक कहीं भी लाइन के विस्तार का नामोनिशान नहीं मिलता। दिल्ली सरकार ने अब जाकर विस्तार को मंजूरी भी दी तो वो भी केवल सैद्धांतिक। अभी तक इसके लिए बजट का भी आबंटन नहीं किया गया है। लिहाजा जो योजना 2018 में पूरी होनी थी, उस पर अभी तक काम भी नहीं शुरू हुआ है।

वहीं एक आरटीआइ के जवाब में डीएमआरसी ने बताया है कि सिरसपुर तक मेट्रो के विस्तार की विस्तृत परियोजना रपट तैयार कर दिल्ली सरकार को भेज दी गई है, लेकिन सरकार की ओर से इसे मंजूरी न मिलने से अभी तक इस पर काम शुरू नहीं किया जा सका है। सिरसपुर से सटे कादीपुर गांव के निवासी व आरटीआइ कार्यकर्ता हरपाल सिंह राणा ने दिल्ली सरकार, डीएमआरसी व अन्य विभागों से कई बार पत्राचार कर इस मामले को उठाया। आरटीआइ में दी गई जानकारी के मुताबिक, करीब 1.2 किलोमीटर लंबी इस लाइन के लिए सिर्फ एक विभाग से दूसरे विभाग में कागजी औपचारिकताएं ही पूरी की जाती रहीं। तत्कालीन सांसद उदितराज से भी बात करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। हारकर उन्होंने इस मामले में शहरी विकास मंत्रालय व प्रधानमंत्री तक से लिखित शिकायत की और आखिरकार मामले को लोकपाल के पास भी उठाया।

स्थानीय निवासी सतीश ने कहा कि इलाके के लोगों के पास परिवहन की कोई सुविधा नहीं है। मेट्रो भी रोहिणी सेक्टर-18 जाकर मिलती है या फिर काफी दूर पैदल जाने पर कोई साधन मिलता है। इलाके के लोगों ने बताया कि 10-12 साल पहले गांव से दो डीटीसी बसें चला करती थीं, लेकिन फिर दोनों बसें बंद कर दी गर्इं। इस बारे में डीटीसी ने कहा कि इलाके की सड़कें बहुत पतली व टूटी-फूटी हैं और लोगों ने सड़कों पर अतिक्रमण कर रखा है इसलिए यहां बसें नहीं चल सकतीं।

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