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नौवीं दफा ताल ठोक रहे शिबू सोरेन

शिबू सोरेन 1980 में कांग्रेस की टिकट पर पहली दफा सांसद चुने गए थे। उसके बाद झामुमो से 1989 से 1996 तीन दफा। फिर 2002 के उपचुनाव से 2014 तक लगातार चार दफा सांसद बने।

Author May 17, 2019 1:42 AM
शिबू सोरेन 1980 में कांग्रेस की टिकट पर पहली दफा सांसद चुने गए थे।

गिरधारी लाल जोशी

दुमका संसदीय सीट (आदिवासियों के लिए सुरक्षित) पर आठ दफा अपनी जीत दर्ज करा चुके शिबू सोरेन नौवीं दफा फिर ताल ठोक चुनावी समर में कूदे हैं। इनका मुकाबला करने भाजपा ने दो दफा अपने हारे उम्मीदवार सुनील सोरेन पर फिर दांव लगाया है। 2014 का चुनाव वे 39 हजार मतों से हारे थे। 2009 संसदीय चुनाव में भी भाजपा के वे ही उम्मीदवार थे। छह विधानसभा सीट शिकारीपाड़ा, दुमका और जामा आदिवासियों के लिए सुरक्षित है। जामताड़ा, नाला,सारठ सामान्य सीट हैं। यहां अंतिम चरण 19 मई को चुनाव होना तय हुआ है।

दुमका सीट पर कुल 15 उम्मीदवार मुकाबले में हैं। दुमका संथाल परगना का डिविजनल शहर है। इस वास्ते थोड़ा बदलाव नजर आता है। स्ट्रीट लाइट, चौड़ी सड़कें, स्टेडियम, इंजीनियरिंग कॉलेज, पॉलीटेक्निक वगैरह भी हैं। मगर पीने के पानी की किल्लत अभी भी बरकरार है। बनियारा गांव हंसडीहा के चार किलोमीटर पहले है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देवघर में 15 मई को सभा में झामुमो और कांग्रेस पर सीधा निशाना साधा। वे बोले कि ये दोनों दल घुसपैठियों के साथ खड़े हैं। भाजपा एक-एक घुसपैठिए की पहचान कर सफाया करेगी। झारखंड मुक्ति मोर्चा खासकर इसके नेता शिबू सोरेन का एक अरसे से दबदबा है। यहां सात दफा झारखंड मुक्ति मोर्चा का तीर धनुष निशान वाला झंडा लहराया है।

शिबू सोरेन 1980 में कांग्रेस की टिकट पर पहली दफा सांसद चुने गए थे। उसके बाद झामुमो से 1989 से 1996 तीन दफा। फिर 2002 के उपचुनाव से 2014 तक लगातार चार दफा सांसद बने। 2014 में शिबू सोरेन ने तिकोने संघर्ष में 3 लाख 35 हजार मत हासिल किए थे। जबकि भाजपा के सुनील सोरेन 2 लाख 96 हजार मत लाकर दूसरे स्थान पर रहे। पूर्व मुख्यमंत्री और झाविमो के सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी एक लाख 58 हजार मत लाकर तीसरे स्थान पर रहे। दिलचस्प बात कि बाबूलाल मरांडी 1998 और 1999 दो दफा यहां से सांसद भाजपा की टिकट पर बने। इसके बाद झारखंड राज्य के गठन पर पहले मुख्यमंत्री के तौर पर इन्होंने ही शपथ ली थी। बाद में इन्होंने झाविमो बना लिया।

1957 में यहां से जेएचपी से देवी सोरेन 1962, 1967 और 1971 में कांग्रेस के सत्यचंद्र बेसरा, 1977 में पीएलडी के बटेश्वर हेम्ब्रम, 1984 में कांग्रेस के पृथ्वीचंद किस्कू ने संसद में यहां का प्रतिनिधित्व किया है। इधर 15 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा संथाल परगना की तीन सीट राजमहल, गोड्डा और दुमका पर भाजपा के उम्मीदवारों के पक्ष में करने से माहौल गरमाया है। भाजपा नेताओं का रुख भी अब संथालपरगना की ओर है। मगर शिबू सोरेन की आदिवासियों को पिलाई घुट्टी के सामने भाजपा का नारा बेअसर सा लगता है। साथ ही महागठबंधन का साथ झामुमो के शिबू सोरेन को संजीवनी प्रदान कर रहा है। उनके बेटे व पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और महागठबंधन के नेता दुमका आकर मोर्चा संभाले हुए हैं।

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