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सांसद बन नीतीश को जवाब देना चाहते हैं शरद, चाह रहे पप्‍पू यादव की मदद, लालू बन रहे रोड़ा

पप्पू यादव के हाल के बयानों पर गौर करें तो साल भर पहले लालू परिवार के खिलाफ आग उगलने वाले पप्पू अब लालू यादव को बड़ा और सम्माननीय नेता बता रहे हैं। पप्पू के बयानों में आई नरमी राजद कुनबे से बढ़ी नजदीकियों की कहानी बयां कर रही है।

Author January 3, 2019 3:34 PM
जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार। (फाइल फोटो)

बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार जहां अपनी राजनीतिक चाल से लोकसभा चुनावों में महागठबंधन को मात देना चाह रहे हैं, वहीं लोकतांत्रिक जनता दल के शरद यादव राजद अध्यक्ष लालू यादव और जन अधिकार पार्टी के संरक्षक पप्पू यादव के साथ मिलकर नीतीश कुमार को जवाब देना चाहते हैं। इस क्रम में शरद यादव पप्पू यादव की वापसी राजद में करवाना चाहते थे लेकिन राजद और लालू परिवार की तरफ से साफ तौर पर मना कर दिया गया। ऐसी स्थिति में अब शरद यादव पप्पू यादव को महागठबंधन में शामिल करवाना चाहते हैं और मधेपुरा सीट पर खुद चुनाव लड़ना चाहते हैं। फिलहाल मधेपुरा से पप्पू यादव सांसद हैं। शरद यादव को पता है कि बिना पप्पू की मदद के मधेपुरा से वो संसद नहीं पहुंच पाएंगे।

शरद यादव की कोशिश है कि लालू यादव की रजामंदी से पप्पू यादव को मधेपुरा से हटाकर सुपौल या झंझारपुर से चुनाव लड़वाया जाय। बता दें कि सुपौल से पप्पू यादव की पत्नी रंजीत रंजन कांग्रेस की मौजूदा सांसद हैं। लिहाजा, इस बात की संभावना कम है कि पप्पू सुपौल से लड़ें। ऐसे में झंझारपुर सीट भी उनका नया ठिकाना हो सकता है। सूत्र बता रहे हैं कि सहरसा को भी विकल्प के तौर पर रखा गया है। ये सभी संसदीय इलाके यादव बहुल इलाके हैं। लिहाजा, दोनों यादव नेता सुरक्षित तरीके से संसद पहुंचने की जुगत में हैं। हालांकि, लालू यादव की तरफ से अभी तक कुछ स्पष्ट नहीं किया गया है।

बता दें कि पप्पू यादव पूर्णिया से तीन बार सांसद रह चुके हैं। उन्होंने 1991 (जनता दल), 1996 (समाजवादी पार्टी) और 1999 (निर्दलीय) में यहां से चुनाव जीता था। 2004 में लालू यादव द्वारा सीट छोड़े जाने पर हुए उप चुनाव में मधेपुरा से पप्पू यादव ने शरद यादव को हराया था। उसके बाद 2014 में फिर से पप्पू यादव ने राजद के टिकट पर शरद यादव को हराया था। शरद यादव मधेपुरा से 1991, 1996, 1999 और 2009 में चुनाव जीत चुके हैं। बिहार की राजनीति में यादव बहुल मधेपुरा का विशेष महत्व है। यानी हर हाल में शरद मधेपुरा सीट चाहते हैं, ताकि वो जीतकर नीतीश कुमार को जवाब दे सकें।

पप्पू यादव के लिए पूर्णिया भी सुरक्षित ठिकाना हो सकता है क्योंकि वहां से वो तीन बार सांसद रहे हैं लेकिन सूत्रों के मुताबिक संभवत: पप्पू खुद वहां से चुनाव लड़ना नहीं चाहते। उनकी कुछ राजनीतिक मजबूरियां हैं। वहां से फिलहाल जेडीयू के संतोष सिंह सांसद हैं। पप्पू यादव के हाल के बयानों पर गौर करें तो साल भर पहले लालू परिवार के खिलाफ आग उगलने वाले पप्पू अब लालू यादव को बड़ा और सम्माननीय नेता बता रहे हैं। पप्पू के बयानों में आई नरमी राजद कुनबे से बढ़ी नजदीकियों की कहानी बयां कर रही है।

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