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रीवा विधानसभाः हर बार बसपा बिगाड़ती है कांग्रेस का खेल, इस बार मुकाबला दिलचस्प

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में रीवा सीट पर इस बार मुकाबला दिलचस्प हो गया है।

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो- इंडियन एक्सप्रेस)

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में मोटे तौर पर मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही रहता है। लेकिन एक जैसा वोट बैंक होने के चलते कई सीटों पर कांग्रेस को बहुजन समाज पार्टी की उपस्थिति से नुकसान उठाना पड़ जाता है और दोनों की जंग में जीत भाजपा के खाते में चली जाती है। रीवा विधानसभा सीट की भी यही कहानी है। पिछले कुछ विधानसभा चुनावों से यहां बसपा और कांग्रेस के बीच जंग जारी है।

2003 से लगातार जीत रही है भाजपा
रीवा से फिलहाल राजेंद्र शुक्ल विधायक हैं। वे राज्य सरकार में उद्योग मंत्री भी हैं। वे पिछले 15 सालों से यहां से विधायक हैं। 2003 में उन्होंने कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री पुष्पराज सिंह को हराया था। विधानसभा चुनावों में इस सीट पर भाजपा की यह पहली जीत थी। इसके बाद राजेंद्र शुक्ल यहां से लगातार भाजपा के टिकट पर जीते हैं। पिछले चुनाव में बहुजन समाज पार्टी यहां दूसरे नंबर पर रही थी, जबकि कांग्रेस तीसरे नंबर पर खिसक गई थी। उल्लेखनीय है कि एक समय इस सीट को कांग्रेस का गढ़ माना जाने लगा था।

इस बार खेल और दिलचस्प हुआ
इस बार राजेंद्र शुक्ल के खिलाफ अभय मिश्रा को मैदान में उतारा है। दोनों की इस क्षेत्र में गुरु-शिष्य की जोड़ी के नाम से जाना जाता है। क्षेत्र के राजनीतिक समीकरण के लिहाज से माना जा रहा है कि दोनों ही ब्राह्मण प्रत्याशी हैं, इसके चलते इस बार खेल बिगाड़ने वाली बसपा खेल जीत भी सकती है। क्षेत्र में ब्राह्मण समाज के लोग काफी तादाद में रहते हैं लेकिन दोनों ही प्रमुख पार्टियों के प्रत्याशी ब्राह्मण होने से वोट बंटने का फायदा बसपा को मिल सकता है। दूसरी तरफ सवर्ण आंदोलन के बाद बनी एकजुटता का फायदा भी बसपा को मिल सकता है।

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