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रिपोर्ट: 67 सालों के दौरान लोकसभा में सिर्फ 8.2 फीसदी बढ़ी महिलाओं की भागीदारी, विधानसभाओं में हालत और भी बदतर

संसद में महिला प्रतिनिधित्व के मामले में भारत की स्थिति ठीक नहीं है। 193 देशों की सूची में भारत 149वें स्थान पर है। कमाल की बात है कि महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने के मामले में अफ्रीकी देश टॉप-10 में शुमार हैं, लेकिन एशिया से एक भी देश शामिल नहीं है।

Author Updated: March 15, 2019 5:46 PM
महिलाओं को उनकी आबादी के हिसाब से संसद या विधानसभा में प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया है। (यह तस्वीर सांकेतिक है. फोटो क्रेडिट/ Equidiversity Foundation)

भारत की चुनावी राजनीति में महिलाओं की भागीदारी उनके अनुपात से काफी कम होना स्वस्थ लोकतंत्र के लिहाज से चिंता का विषय है। हालांकि, महिलाओं की चुनावी राजनीति में 33 फीसदी भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिए संसद में ‘महिला आरक्षण बिल’ भी लाया गया है, लेकिन अर्से से यह अटका पड़ा है। हैरानी होगी कि 67 साल में महिलाओं की लोकसभा में मौजूदगी महज 8.2 फीसदी ही बढ़ पाई है। ‘इंडियास्पेंड’ के मुताबिक 1952 में महिलाओं की लोकसभा में संख्या 4.4 फीसदी थी और वर्तमान में इनकी मौजूदगी 12.6 फीसदी है। जबकि, 60 सालों में आबादी के हिसाब से महिलाओं की संख्या 48.5 फीसदी के आसपास ही रही है। वैश्विक स्तर महिलाओं के प्रतिनिधित्व की बात करें तो 193 देशों की सूची में भारत 149वें स्थान पर है।

वैसे 17वीं लोकसभा के लिए हो रहे चुनाव में महिला प्रतिनिधित्व का मुद्दा तूल पकड़ रहा है। कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने वादा किया है कि अगर उनकी सरकार सत्ता में आती है तो वह महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 आरक्षण सुनिश्चित कराने का काम करेंगे। बीजू जनता दल ने इस लोकसभा चुनाव में 33 फीसदी महिलाओं को मैदान में उतारने का ऐलान किया है। वहीं, पश्चिम बंगाल में टीएमसी ने 41 फीसदी महिलाओं को टिकट दिया है। इंडियास्पेंड की रिपोर्ट के मुताबिक आज की तारीख में लोकसभा में कुल 66 महिला सांसद हैं। जिनका कुल 524 सासंदों में 12.6 फीसदी हिस्सा है।

वैसे विश्व में महिला प्रतिनिधित्व का औसत देखें तो यह 24.3 फीसदी के आसपास है। जबकि, महिला प्रतिनिधित्व के मामले में रवांडा सबसे अव्वल स्थान पर है। यहां की 80 सीटों वाली विधायिका में 49 महिलाओं की मौजूदगी है। गौरतलब है कि विश्व के महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने के मामले में भारत समेत एशिया का कोई भी देश टॉप-10 में शामिल नहीं हैं।

विधानसभाओं में महिला प्रतिनिधित्व की दशा बेहद खराब: भारतीय संसद महिलाओं की संख्या कम तो है ही, लेकिन राज्यों की विधानसभा में स्थिति काफी खराब है। यहां पर महिलाओं की प्रतिनिधित्व बेहद कम है। 2017 में ‘सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन’ मंत्रालय के मुताबिक 2017 के पहले पांच सालों में बिहार, हरियाणा और राजस्थान के विधानसभाओं में महिलाओं की मौजूदगी सबसे ज्यादा (14 फीसदी) थी। जबकि, इस दौरान मिजोरम, नागालैंड और पुडुचेरी में एक भी निर्वाचित महिला विधायक नहीं थी। इंडियास्पेंड की रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रीय स्तर पर विधानसभा और विधान परिषद में महिलाओं का प्रतिनिधित्व क्रमश: 9% और 5% है।

महिलाओं की चुनावी राजनीति में भागीदारी आखिर कम क्यों है, इसे लेकर 2011 में ‘इकोनॉमिक एंड पॉलिटकल वीकली’ ने एक विश्लेषण पब्लिश किया था। इसमें यह बताया गया था कि भारत में जिस तरह से पितृ-सत्तात्मक व्यवस्था है, उसका प्रभाव महिलाओं प्रतिनिधित्व पर भी पड़ता है। इसके अलावा औरतों में चुनावों को लेकर जागरूकता और जानकारी की कमी भी एक बड़ी वजह है।

जहां महिला प्रतिनिधित्व, वहां तेज गति से आर्थिक विकास: इंडियास्पेंड ने ‘यूनाइटेड नेशंस यूनिवर्सिटी वर्ल्ड इंस्टीट्यूट फॉर डेवलपमेंट इकोनॉमिक्स रिसर्च’ के हवाले से बताया है कि भारत के जिस संसदीय या विधानसभा क्षेत्रों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व है, वहां पर आर्थिक विकास की गति बढ़िया है। महिला प्रतिनिधियों ने अपने-अपने चुनाव क्षेत्रों में पुरुष प्रतिनिधियों के मुकाबले सालाना 1.8 फीसदी के अतिरिक्त विकास दर का लक्ष्य हासिल किया है।

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