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चुनाव 2017: धर्म और सियासत के चुनावी घालमेल ने छेड़ दी नई जंग

सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश और चुनाव आयोग की हिदायतों का असर दिखने लगा है और इसी बहाने राजनीतिक दल एक-दूसरे को घेरने में लग गए हैं।
Author नई दिल्ली | January 20, 2017 01:37 am
चुनाव आयोग के दफ्तर की तस्वीर।

सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश और चुनाव आयोग की हिदायतों का असर दिखने लगा है और इसी बहाने राजनीतिक दल एक-दूसरे को घेरने में लग गए हैं। खासतौर पर धार्मिक प्रतीकों और भावनाओं का राजनीति में इस्तेमाल को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी ने एक-दूसरे के खिलाफ हमले तेज कर दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक बयान को लेकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया है और भारतीय जनता पार्टी का चुनाव चिह्न जब्त करने की मांग की है। दूसरी ओर, भाजपा नेताओं पर हमला करने में रामायण के प्रतीकों का बेजा इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी और नवजोत सिंह सिद्धू के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। उत्तर प्रदेश में जगह-जगह राहुल गांधी को कृष्ण और अखिलेश यादव को अर्जुन बताते हुए लगाए गए पोस्टरों पर आपत्ति जताते हुए भाजपा समर्थकों ने अदालत की शरण ली है।

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव केसी मित्तल के दस्तखत से चुनाव आयोग को भेजी गई शिकायत में कन्याकुमारी में हुए ‘रामायण दर्शनम्’ प्रदर्शनी का हवाला दिया गया है, जिसका उद््घाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 जनवरी को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए भाषण दिया था। अपने भाषण में मोदी ने कई जगह ‘भगवान श्रीराम’, ‘अयोध्या’, ‘राम राज्य’ और ‘हनुमान जी’ शब्दों का बार-बार प्रयोग किया। इन मिथकीय चरित्रों का हवाला देते हुए अपनी सरकार की तुलना अयोध्या में राम के शासन काल से की और कहा कि वे रामराज्य ले आए हैं।

कांग्रेस का कहना है कि उनका उद्देश्य इस भाषण के जरिए भाजपा का प्रचार करना था। विधानसभा चुनावों के मद्देनजर वे जान-बूझकर प्रतीकों का इस्तेमाल कर रहे थे। गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी के जनवेदना सम्मेलन में दिए गए भाषण का हवाला देकर चुनाव आयोग से मांग की है कि कांग्रेस पार्टी का चुनाव चिह्न जब्त किया जाए। उस सम्मेलन में राहुल गांधी ने हिंदू अवतारों, सिख धर्मगुरुओं का जिक्र करते हुए कहा था कि सभी के फोटो में अभय देते हुए हाथ दिखाया जाता है। कांग्रेस का चुनाव चिह्न अभय देता है। भाजपा प्रवक्ता मुख्तार अब्बास  नकवी ने कहा था कि कांग्रेस इससे सांप्रदायिकता फैला रही है।

गुरुवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और नवजोत सिंह सिद्धू के खिलाफ भाजपा के कुछ समर्थकों ने यही आरोप लगाते हुए अदालत की शरण ली। वाराणसी में अधिवक्ता कमलेश चंद्र त्रिपाठी ने अदालत में परिवाद दायर कर आरोप लगाया कि दोनों नेताओं रामायण के पात्रों और रामायण में वर्णित श्लोक का इस्तेमाल करते हुए भाजपा का मजाक उड़ाया। त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी अब राम का मुखौटा लगाकर आएंगे। वहीं नवजोत सिंह सिद्धू ने भी भगवान राम की माता कौशल्या की तुलना कांग्रेस से की थी। भाजपा की तुलना कैकेयी से की थी।

उधर, वाराणसी में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के एक पोस्टर को लेकर भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है। इस पोस्टर में राहुल गांधी को भगवान कृष्ण और अखिलेश यादव को अर्जुन दिखाया गया है। पोस्टर को समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेता खुद को लोहिया वाहिनी का पूर्व प्रदेश सचिव बताने वाले संदीप मिश्रा नाम के व्यक्ति ने लगवाया है। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है। पोस्टर में अखिलेश और राहुल गांधी एक रथ पर नजर आ रहे हैं। अखिलेश तीर-धनुष पकड़े हुए हैं और राहुल रथ हांक रहे हैं। रथ पर समाजवादी पार्टी का चुनाव चिह्न साइकिल दिख रहा है। उस पर ‘विकास से विजय की ओर चले दो महारथी’ नारा लिखा है। अब यह पोस्टर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

 

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