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मतपत्र का प्रस्ताव खारिज

दिल्ली के तीनों नगर निगमों का चुनाव ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) से होना तय है क्योंकि उपराज्यपाल अनिल बैजल ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के वोटिंग के लिए मतपत्र के इस्तेमाल संबंधी प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।

Author नई दिल्ली | March 17, 2017 1:30 AM
ईवीएम (वीवीपीएटी) की फाइल फोटो। (Source: PIB)

दिल्ली के तीनों नगर निगमों का चुनाव ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) से होना तय है क्योंकि उपराज्यपाल अनिल बैजल ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के वोटिंग के लिए मतपत्र के इस्तेमाल संबंधी प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। उपराज्यपाल ने कहा है कि समय की कमी के कारण मत डालने के तरीके में बदलाव लाना संभव नहीं है।
सूत्रों के मुताबिक, उपराज्यपाल ने दिल्ली सरकार को सूचित किया है कि ईवीम को मतपत्रों से विस्थापित करने के लिए नियमों में बदलाव लाने होंगे, साथ ही मतपत्रों के लिए बड़े पैमाने पर तैयारी की जरूरत होगी और चुंकि निगम चुनावों में करीब एक महीने का ही समय बाकी है इसलिए ऐसा किया जाना संभव नहीं होगा। गौरतलब है कि 22 अप्रैल को दिल्ली के तीनों नगर निगमों के लिए चुनाव होने हैं।

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पंजाब चुनावों में ईवीएम से छेड़छाड़ के आरोप लगाए थे और मांग की थी कि दिल्ली के निगम चुनाव मतपत्रों के जरिए कराए जाएं। केजरीवाल का यह आरोप बसपा सुप्रीमो मायावती के आरोपों के बाद सामने आया, मायावती ने भी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में ईवीएम से छेड़छाड़ के आरोप लगाए थे। बुधवार को अरविंद केजरीवाल ने अनिल बैजल से आग्रह किया था कि वह सभी राजनीतिक दलों और दिल्ली चुनाव आयोग की बैठक बुलाकर मतपत्र के जरिए चुनाव कराने की संभावनाओं पर विचार करें। सूत्रों के अनुसार केजरीवाल ने इस संबध में बुधवार को उपराज्यपाल से मुलाकात भी की थी जिस दौरान उपराज्पाल ने मुख्यमंत्री को कहा कि पहले भी निगम के चुनाव ईवीएम के माध्यम से हुए हैं और ईवीएम से छेड़छाड़ की घटना का कोई रिकॉर्ड नहीं है।

निगम चुनाव तारीखों की घोषणा करते समय दिल्ली चुनाव आयोग ने भी स्पष्ट किया था कि चुनाव की तैयारी ईवीएम को ध्यान में रखकर की गई है और किसी बदलाव के लिए पर्याप्त समय नहीं है। चुनाव आयोग ने ईवीएम से छेड़छाड़ को खारीज कर दिया है और इसे पूरी तरह से सुरक्षित बताया है। पिछले कुछ समय से पंजाब में सरकार बनाने का दावा करने वाली आप पार्टी को राज्य की 117 विधानसभा सीटों में से केवल 20 सीटें आर्इं और 24.9 फीसद वोट मिले। इसके बाद अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि ईवीएम से छेड़छाड़ कर उनके करीब 20-25 फीसद वोट शिअद-भाजपा गंठबंधन को स्थानांतरित कर दिया गया।

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