आखिर कैसे हर बार अशोक गहलोत CM पद के लिए जीतते हैं मुकाबला ?

इससे पहले भी किसी और के साथ अगर अशोक गहलोत का सीएम के लिए नाम सामने आया है तो जीत अशोक गहलोत की ही हुई है।

अशोक गहलोत, राहुल गांधी और सचिन पायलट, फोटो सोर्स- सोशल मीडिया और इंडियन एक्सप्रेस

राजस्थान में मुख्यमंत्री के लिए अशोक गहलोत का नाम कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने फाइनल कर दिया है। गौरतलब है कि प्रदेश में सचिन पायलट और अशोक गहलोत को लेकर काफी गहमागहमी चल रही थी। दोनों के ही प्रशंसक अपने अपने नेता को मुख्यमंत्री बनवाने के लिए सड़क तक पर उतर आए थे। लेकिन ये कोई संयोग नहीं है और न ही पहली बार ऐसा हुआ है। दरअसल इससे पहले भी किसी और के साथ अगर अशोक गहलोत का सीएम के लिए नाम सामने आया है तो जीत अशोक गहलोत की ही हुई है।

1998- जब मदेरणा को मिला झटका
1998 में कांग्रेस 153 सीटों के अपने सबसे पड़े बहुमत के साथ सत्ता में लौटी। गहलोत उस समय राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष थे और उस समय जाटों के सबसे बड़े नेता परसराम मदेरणा विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता। उस वक्त क्योंकि अशोक गहलोत विधानसभा में नहीं थे तो राजस्थान के जाटों को लगा कि अगर कांग्रेस को जीत मिलती है तो मदेरणा ही मुख्यमंत्री बनेंगे और पहली बार जाट सीएम का सपना पूरा होगा। लेकिन उनका ये सपना सिर्फ सपना ही रह गया और अशोक गहलोत सीएम बन गए।

2008- एक वोट से हारे थे जोशी
2008 में सीपी जोशी राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष थे। उनके नेतृत्व में पार्टी ने चुनाव लड़ा। गहलोत अपने हिसाब से चुनाव प्रचार में जुटे रहे। लेकिन दुर्भाग्य से जोशी एक वोट से चुनाव हार गए। लेकिन इसके बाद भी उन्होंने मैदान नहीं छोड़ा। ऐसे में जाट नेता शीशराम ओला ने भी बिगुल बजाया। जिसके बाद पीसीसी में पर्चियों से कांग्रेस के विधायकों की जब राय जानी गई तो उसमें नाम निकला अशोक गहलोत का। जिसके बाद वो दूसरी बार प्रदेश के मुखिया बने।

2018- एक बार फिर चला जादू
इस बार भी विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद सचिन पायलट और अशोक गहलोत में सीएम कौन बनेगा इस बात ने काफी सुर्खियां बंटोरी। लेकिन इस बार भी जीत अशोक गहलोत की ही हुई। जिसके बाद वो तीसरी बार राजस्थान के सीएम बनेंगे।

सर्व स्वीकार्य चेहरा है वजह ?
अब इन तीन किस्सों को देख सवाल ये उठता है कि ऐसी क्या वजह से जो हर बार अशोक गहलोत ही सीएम के लिए चुने जाते हैं। दरअसल सर्व स्वीकार्य चेहरा और आलाकमान का उन पर भरोसा भी एक वजह हो सकती है। सीएम के लिए नाम घोषित होने के बाद वो सचिन पायलट और दूसरे नेताओं को एयरपोर्ट पर छोड़ने गए और उसके बाद अपने निवास पर आकर वहां मौजूद प्रत्येक सर्मथक से लाइन में निजी तौर पर मिले। अब ये वो संदेश है जो पूरे प्रदेश में गया। गौरतलब है कि अशोक, वसुंधरा राजे के सिर्फ आम जन से मिलने का ही नहीं बल्कि विधायकों- मंत्रियों तक से न मिलने का मुद्दा बनाते रहे हैं।

मोदी ने किया प्रचार प्रसार
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राजस्थान में प्रचार प्रसार के दौरान 12 सभाएं की थीं, जो कि पाचों राज्यों में सबसे ज्यादा हैं। इसके अलावा मोदी ने मध्य प्रदेश में दस, छत्तीसगढ़ में चार, तेलंगाना में पांच और मिजोरम में एक रैली की थी। बता दें कि कुल मिलाकर इन पांचो राज्य में 679 सीटें हैं, हालांकि चुनाव इन में से 678 पर ही हुआ था।

 

किसके कितनी प्रत्याशी
राजस्थान में इस बार 200 नहीं बल्कि 199 सीटों पर ही मतदान हुआ है। बता दें कि रामगढ़ में बसपा प्रत्याशी के निधन की वजह से उस सीट का चुनाव निरस्त कर दिया है। 199 सीटों के लिए राजस्थान में कुल 2274 प्रत्याशी मैदान में थे। जिसमें से भाजपा ने 200 प्रत्याशी, कांग्रेस ने 195, बसपा ने 190, आम आदमी पार्टी ने 142, भावापा ने 63, रालोपा ने 58 और अरापा ने 61 कैंडिडेट मैदान में उतारे थे।

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