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Rajasthan Election: राजस्थान में सुरक्षित सीटों पर लोग ज्यादा दबा रहे हैं नोटा

राजस्थान में आंकड़ों पर गौर करे तो चुनावों में नोटा का प्रयोग सामान्य की बजाय आरक्षित सीट पर ज्यादा देखने को मिला।

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक तौर पर। (Express Photo)

राजस्थान में विधानसभा चुनावों को लेकर सरगर्मियां जोरो पर है। चुनावी दौर में एससी/एसटी कानून के विरोध में अनारक्षित वर्ग के लोगों ने किसी दल के बजाय नोटा(उपरोक्त में से कोई नहीं) का अभियान भी राज्य में जोरो पर चलाया। नोटा के समर्थन में सोशल मीडिया पर जोरदार मुहिम भी चलाई गयी। लेकिन अगर आंकड़ों पर गौर करे तो पिछले चुनावों में नोटा का प्रयोग सामान्य की बजाय आरक्षित सीट पर ज्यादा देखने को मिला।

दरअसल, हाल ही में एससी/एसटी कानून को लेकर अनारक्षित वर्ग के लोगों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था। सोशल मीडिया पर मुहिम चलाई गयी कि अनारक्षित वर्ग के मतदाता इस बार विधानसभा चुनावों में नोटा को प्राथमिकता दें। लेकिन आंकड़ों के मुताबिक पिछली बार नोटा का प्रयोग आरक्षित सीटों पर ज्यादा हुआ। आरक्षित वर्ग में भी एससी के बजाय एसटी सीटों पर नोटा ज्यादा इस्तेमाल किया गया था। गौर करने वाली बात रही कि जिन जिलों में साक्षरता दर कम है, वहां भी नोटा का प्रयोग ज्यादा हुआ। बता दें कि निर्वाचन आयोग ने पिछले चुनावों में वोटिंग मशीन में नोटा बटन का विकल्प दिया था।

इन पांच जिलों में सबसे कम हुआ नोटा का प्रयोग- कामां, कठूमर, नगर, भादरा, उदपुरवाटी

नोटा के प्रयोग वाले शीर्ष 5 सामान्य विधानसभा क्षेत्र- खींवसर, बड़ीसादड़ी, देवली-उनियारा, भीनमाला, आसींद

पिछली बार राजस्थान विधानसभा चुनाव में 1.91 प्रतिशत मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल किया था। नोटा का इस्तेमाल राज्य की सिरोही जिले की पिंडवाड़ा विधानसभा में सबसे ज्यादा हुआ था। भरतपुर की कामां सीट पर सबसे कम 0.22 प्रतिशत लोगों ने नोटा का इस्तेमाल किया था। बता दें कि राज्य में 7 दिसंबर को वोट डाले जायेंगे। 11 दिसंबर को मतों की गणना की जाएगी।

 

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