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Rajasthan Election: यहां भी परिवारवाद का बोलबाला, कांग्रेस ने 8 प्रत्याशियों को दिया है टिकट

बात अगर विधानसभा चुनावों की करें तो इस बार कांग्रेस हो या बीजेपी दोनों ही पार्टियों ने अपने-अपने नेताओं के बच्चों और रिश्तेदारों को टिकट दिए हैं। इस बार राजस्थान के चुनाव में खुलकर वंशवाद देखने को मिला।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

भारत की राजनीति में परिवारवाद को लेकर हमेशा से ही चर्चा होती रही है। कुछ लोग परिवारवाद के समर्थन में कहते हैं कि जब वकील का बेटा वकील बन सकता है तो नेता का बेटा नेता क्यों नहीं बन सकता? वहीं अगर विधानसभा चुनावों की बात करें तो इस बार कांग्रेस हो या बीजेपी दोनों ही पार्टियों ने अपने-अपने नेताओं के रिश्तेदारों को टिकट दिए हैं। इस बार राजस्थान के चुनाव में खुलकर वंशवाद देखने को मिला।

राजस्थान में कांग्रेस नेताओं का क्या है परिवारवाद कनेक्शन-

बृजेन्द्र सिंह झुंझुनू से विधायक हैं। उनके पिता राम ओला हैं जो कांग्रेस पार्टी से पूर्व सांसद रह चुके हैं। बृजेन्द्र सिंह इस बार झुंझुनू से चुनावी मैदान में हैं। परिवारवाद के मुद्दे पर जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘परिवारवाद को लेकर झूठे तथ्य हमें दुख पहुंचाते हैं। हम लोगों के द्वारा चुने गए हैं जिसके बाद हम विधायक बने हैं।’

विश्वेंद्र सिंह की उम्र 56 साल है। विश्वेंद्र सिंह दिग कुम्हेर से विधायक हैं। विश्वेंद्र के पिता ब्रिजेन्द्र सिंह का निधन हो चुका है। विश्वेंद्र सिंह इस बार दिग कुम्हेर से चुनाव लड़ रहे हैं। इस पूरे मामले पर उनका कहना है कि, ‘मैं राजनीति में पिछले 30 सालों से हूं.. मैं ये मानता हूं कि अंत में आपका काम मैटर करता है।’

रामनारायण गुर्जर नसीराबाद से विधायक हैं। रामनारायण दिवंगत नेता गोविंद सिंह गुर्जर के रिश्तेदार हैं। इनका ताल्लुक कांग्रेस से है। रामनारायण गुर्जर परिवारवाद को लेकर कहते हैं कि, ‘लोग हमें हमारे कामों की वजह से वोट देते हैं.. ना कि हमारे रिश्तेदारों ने जो किया है उसकी वजह से।’

दर्शन सिंह करौली से विधायक हैं। दर्शन सिंह के पिता पूर्व कांग्रेस विधायक थे। वो इस बार भी करौली से चुनाव लड़ रहे हैं। उनका इस पूरे मामले पर कहना है कि ‘जो उम्मीदवार लोगों का पसंदीदा होता है उन्हें जनता किसी भी चुनाव में वोट देते है।’

विवेक धाकड़ मांडलगढ़ से विधायक हैं। उनके पिता का नाम कन्हैयालाल है जो बीजेपी से कांग्रेस में शामिल हुए हैं। विवेक धाकड़ इस बार मांडलगढ़ से चुनावी मैदान में हैं। वंशवाद को लेकर विवेक कहते हैं कि ‘अगली पीढ़ी को अपने चयन को औचित्य ठहराना होगा और निर्वाचित होने के लिए लोगों के जनादेश को प्राप्त करना होगा।’

रामेश्वर लाल डूडी नोखा से विधायक हैं। उनके पिता जेठा राम डूडी कांग्रेस के नेता थे। इस बार भी रामेश्वर लाल नोखा से चुनाव लड़ रहे हैं। वंशवाद को लेकर रामेश्वर कहते हैं कि ‘आपको शुरुआत में अपने पिता के नाम का फायदा मिल सकता है लेकिन बाद में आपके किए गए कामों को लेकर ही जनता वोट डालती है।’

भंवर सिंह की उम्र 44 साल है। वो कोलायत से विधायक हैं। उनके पिता रघुनाथ सिंह कांग्रेस के विधायक हैं। भंवर सिंह इस बार कोलायत से चुनाव लड़ रहे हैं। वंशवाद के मुद्दे को लेकर उनसे किसी तरह का संपर्क नहीं हो सका।

प्रद्युम्न सिंह राजाखेड़ा से विधायक हैं। उनके पिता और चाचा दोनों कांग्रेस के विधायक रहे थे। इस बार वो चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। कांग्रेस ने इस बार उनके बेटे रोहित वोरा को राजाखेड़ा से मैदान में उतारा है। वंशवाद को लेकर उनका कहना है कि ‘क्या भाजपा में वंशवाद नहीं है।’

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