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राजस्थान: जिन दलों को पहले भाव नहीं दिया, अब उन्हीं से गठबंधन चाहते हैं राहुल गांधी

अगर इन दलों का कांग्रेस से गठबंधन होता है तो शरद यादव की पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल के खाते में कुशलगढ़ विधान सभा सीट, शरद पवार के खाते में बाली विधान सभा सीट जा सकती है।

राहुल गांधी, अशोक गहलोत और सचिन पायलट (फोटो सोर्स- पीटीआई)

राजस्थान विधान सभा चुनाव को लेकर कांग्रेस शुरु से ही उत्साहित रही है। पार्टी को लगता है कि वसुंधरा राजे सरकार के खिलाफ एंटी इनकमबेंसी फैक्टर का फायदा उसे मिलेगा और कांग्रेस की सत्ता में वापसी हो सकेगी। संभवत: इसी वजह से पार्टी ने अभी तक किसी भी दल के साथ राज्य में कोई गठबंधन नहीं किया है। हालांकि, पार्टी आलाकमान ने राज्य में बसपा से गठबंधन की संभावनाओं के लिए प्रदेश नेताओं को निर्देश दिए थे लेकिन वो असफल रहे। बसपा से बात बिगड़ने के बाद अब पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी उन दलों से भी गठबंधन की संभावना तलाश रहे हैं जिन्हें राज्य में कमतर कर आंका गया है। इस क्रम में पार्टी नेताओं ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के अध्यक्ष शरद पवार, लोकतांत्रिक जनता दल (लोजद) के शरद यादव के साथ औपचारित बातचीत शुरू की है। पहले दौर के गठबंधन में इन दलों से कोई बातचीत नहीं की गई थी।

राहुल गांधी ने चुनाव पूर्व गठबंधन की इस कोशिश में समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) को भी साथ करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, रालोद दो दिन पहले ही बनी पार्टी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के साथ गठबंधन की घोषणा कर चुकी है। दरअसल, राहुल गांधी चाहते हैं कि राजस्थान में इन दलों के साथ गठबंधन करने से पार्टी को 2019 के लोकसभा चुनाव में फा.दा होगा लेकिन राजस्थान कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि राज्य में कांग्रेस मजबूत स्थिति में है और अपने दम पर सरकार बना सकती है। बावजूद इसके गठबंधन करने से इन दलों को भी सरकार में प्रतिनिधित्व देना पड़ेगा। बहरहाल, पार्टी आलाकमान के निर्देश पर राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष सचिन पायलट ने शरद यादव, शरद पवार और रालोद मुखिया अजीत सिंह से मुलाकात की है।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक अगर इन दलों का कांग्रेस से गठबंधन होता है तो शरद यादव की पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल के खाते में कुशलगढ़ विधान सभा सीट, शरद पवार के खाते में बाली विधान सभा सीट जा सकती है। वैसे इन दलों के साथ कितनी सीटों पर गठबंधन होगा, इसका फैसला राहुल गांधी करेंगे। शरद यादव के सहारे कांग्रेस यादव वोटरों, अजित सिंह के सहारे जाट वोटरों और शरद पवार के सहारे दक्षिणी राजस्थान के इलाकों में उनके प्रभाव का त्वरित फायदा उठाना चाह रही है। बता दें कि कांग्रेस पहले बसपा से गठबंधन करना चाहती थी। दोनों दलों के बीच बातचीत भी हुई लेकिन बसपा द्वारा अधिक सीटें मांगने की वजह से गठबंधन नहीं हो सका। बसपा 17 सीटें मांग रही थी जबकि कांग्रेस उसे छह सीटें दे रही थी। गठबंधन नहीं होने पर बसपा ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया। बसपा ने 11 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट भी जारी कर दी है।

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