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राजस्थान में अकेला दौड़ेगा हाथी, सोशल इंजीनियरिंग के भरोसे मायावती ने उतारे 11 उम्मीदवार

इन 11 सीटों में से दो अनुसूचित जाति और एक सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। पार्टी ने सोशल इंजीनियरिंग की राह पकड़ते हुए करौली और सवाई माधोपुर की सामान्य सीट पर मीणा जाति के उम्मीदवारों को उतारा है।

एक चुनावी रैली को संबोधित करतीं बसपा सुप्रीमो मायावती। (पीटीआई फोटो)

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने राजस्थान में अकेले चुनाव लड़ने के साफ संकेत देते हुए अपने उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है। बुधवार (31 अक्टूबर) को पार्टी ने 11 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की है। लिस्ट के मुताबिक उम्मीदवारों के चयन में पार्टी ने सोशल इंजीनियरिंग का खासा ख्याल रखा है। पहली सूची में पार्टी ने यूपी से सटे भरतपुर की चार, दौसा, करौली और टोंक की दो-दो और सवाई माधोपुर जिले के एक विधान सबा सीट पर उम्मीदवार उतारे हैं। इन इलाकों में बसपा खुद के मजबूत मानती रही है। इन 11 सीटों में से दो अनुसूचित जाति और एक सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। पार्टी ने सोशल इंजीनियरिंग की राह पकड़ते हुए करौली और सवाई माधोपुर की सामान्य सीट पर मीणा जाति के उम्मीदवारों को उतारा है।

राजस्थान बसपा के अध्यक्ष सीताराम मेघवाल की तरफ से उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की गई है। सूची के मुताबिक बारतपुर के डीग कुम्हेर से प्रताप सिंह मेहरवार, नदबई से जोगेंद्र सिंह अवाना, भरतपुर नगर से वाजिव अली और भरतपुर की वैर सुरक्षित सीट से अतर सिंह पगारिया को प्रत्याशी बनाया गया है। दौसा जिले की बांदीकुई विधान सभा सीट से भागचंद सैनी टांकड़ा, टोंक की मालपुरा से नरेंद्र सिंह आमली, करौली से लाखन सिंह मीणा, सपोटरा (सुरक्षित) से इंजीनियर हंसराज मीणा, सवाई माधोपुर से हंसराज मीणा, सिकराय से फैलीराम बैरवा और टोंक से मोहम्मद अली दादा भाई के नामों की घोषणा की गई है।

200 सदस्यों वाली राजस्थान विधान सभा में भाजपा और कांग्रेस के बाद बसपा ही तीसरी बड़ी पार्टी है। कांग्रेस से गठबंधन की उम्मीदें खत्म होने के बाद पार्टी सुप्रीमो मायावती ने साफ संकेत दिए थे कि बसपा राजस्थान में अकेले चुनाव लड़ेगी। हालांकि, पार्टी सूत्रों के मुताबिक गैर भाजपा और गैर कांग्रेसी दलों से अभी भी बातचीत जारी है। इस बात की भी संभावना जताई जा रही है कि मायावती यूपी का सोशल इंजीनियरिंग राजस्थान में भी अपना सकती हैं। यानी ब्राह्मणों से गठजोड़ कर सकती हैं। इस लिहाज से बसपा भाजपा के बागी नेता घनश्याम तिवाड़ी के संपर्क में है।

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