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राजस्थान चुनाव: 14% आरक्षण, 40 सीट समेत 11 मांगें, ब्राह्मण समाज ने भाजपा, कांग्रेस की बढ़ाई बेचैनी

भाजपा के लिए यह और ज्यादा परेशान करने वाला है क्योंकि ब्राह्मण समाज के बड़े नेता घनश्याम तिवाड़ी, राजपूत समुदाय के मानवेंद्र सिंह पहले ही पार्टी छोड़ चुके हैं।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे। Express Photo by Rohit Jain Paras.

राजस्थान में 7 दिसंबर को विधान सभा चुनाव होने हैं लेकिन उससे पहले राज्य में अलग-अलग जातियों से जुड़े संगठन राजनीतिक दलों से चुनावों में अपने समुदाय को उचित प्रतिनिधित्व देने की मांग करने लगे हैं। इसी क्रम में ब्राह्मण समुदाय से जुड़े संगठन विप्र फाउंडेशन ने गुरुवार (25 अक्टूबर) को जयपुर में एक बैठक की और सत्ताधारी भाजपा समेत विपक्षी कांग्रेस को 14 सूत्री मांग पत्र सौंपा। ब्राह्मण समुदाय की मांग है कि दोनों पार्टियां उनके समुदाय के लोगों को 40-40 सीटों पर उम्मीदवार बनाए। इसके अलावा आर्थिक आधार पर 14 फीसदी आरक्षण, प्रोन्नति से आरक्षण हटाने की भी मांग की गई है। राजस्थान की राजनीति में ब्राह्मण समाज की भूमिका विषय पर आयोजित पाथेय कार्यक्रम में फाउंडेशन के संस्थापक सुशील ओझा ने बताया कि राज्य में 14.75 फीसदी आबादी ब्राह्मणों की है। यानी कुल 90 लाख आबादी इस समाज की है।

बतौर ओझा राजस्थान की पहली विधानसभा में 60 विधायक ब्राह्मण थे जो अब घटकर 16 रह गए हैं। राज्य में चार-चार ब्राह्मण सीएम रहे हैं। बता दें कि राज्य में कुल 53 ऐसी विधान सभा सीटें हैं जहां ब्राह्मण वोटरों की संख्या 25 से 55 हजार के बीच है। इनके अलावा 10 विधान सभा क्षेत्रों में तो इस समुदाय के 60 से 80 हजार वोटर हैं। फाउंडेशन ने परशुराम यूनिवर्सिटी की स्थापना और फर्जी मुकदमे दर्ज कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की है। उधर, राजपूत समाज से जुड़े संगठन करणी सेना ने भी चुनावों के मद्देनजर 27 अक्टूबर को हुंकार रैली का आयोजन किया है। करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने कहा कि अगर राजनीतिक दलों ने राजपूत समाज को टिकट वितरण में उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया तो समाज के वोटर उस दल को समर्थन देने या न देने पर विचार करेंगे। सिंधी समाज ने भी उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिलने पर नोटा बटन दबाने की चेतावनी दी है।

ब्राह्मण समाज समेत अन्य जातीय संगठनों की चेतावनी के बाद भाजपा और कांग्रेस की बेचैनी बढ़ गई है। भाजपा के लिए यह और ज्यादा परेशान करने वाला है क्योंकि ब्राह्मण समाज के बड़े नेता घनश्याम तिवाड़ी, राजपूत समुदाय के मानवेंद्र सिंह पहले ही पार्टी छोड़ चुके हैं। इनके अलावा जाट, गुर्जर और आदिवासी (मीणा) समुदाय भी सत्ताधारी भाजपा से नाराज बताया जा रहा है। राजस्थान में विधान सभा की कुल 200 सीटें हैं। 11 दिसंबर को चुनाव के नतीजे आने हैं। तमाम सर्वे में भी भाजपा की राह मुश्किल बताई गई है।

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