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चंद महीनों में बदली सियासतः जो उपचुनाव में सांसद बने थे वो अब MLA भी नहीं बन पाए, जो हारे थे बन गए विजेता

राजस्थान में हाल ही में हुए उपचुनावों और अब हुए विधानसभा चुनावों में मतदाताओं का रंग बदला-बदला सा नजर आया।

डॉ करण सिंह यादव और रामस्वरूप लांबा (फोटोः सोशल मीडिया)

राजस्थान की सियासत में उथल-पुथल सिर्फ पांच साल में नहीं होती। यहां की जनता सरकार बदलने के लिए तो पांच साल का इंतजार करती है लेकिन नेताओं को सिर-आंखों पर बिठाकर फिर उतारने में जरा भी देर नहीं लगाती। दरअसल मौजूदा विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद कई ऐसे नेता सामने आए हैं जिन्हें एक साल के भीतर ही जनता के बदले-बदले अंदाज से रूबरू होना पड़ा। 11 महीने पहले राज्य में हुए उपचुनाव में जिन प्रत्याशियों को हार मिली थी उन्हें अब जीत मिल गई और जिन्हें जीताकर सांसद बनाया था उन्हें अब विधायक भी नहीं बनने दिया।

…ये हैं वो बदलाव के गवाह बने नेता

डॉ करण सिंह यादवः भाजपा सांसद के निधन के बाद अलवर में उपचुनाव हुए थे। इसमें कांग्रेस नेता उपचुनाव जीतकर करण सिंह सांसद बन गए। लेकिन महज 11 महीनों बाद ही हुए विधानसभा चुनाव में उनके संसदीय क्षेत्र की सात में से पांच सीटों पर कांग्रेस हार गई। इतना ही नहीं किशनगढ़बास विधानसभा से प्रत्याशी बनाए गए करण सिंह खुद भी तीसरे नंबर पर खिसक गए। यहां की सात में से भाजपा-बसपा ने दो-दो सीटें जीत लीं। जबकि एक सीट निर्दलीय के खाते में चली गई।

रामस्वरूप लांबाः अजमेर सीट पर हुए लोकसभा उपचुनाव में हारने वाले रामस्वरूप लांबा इस विधानसभा चुनाव में नसीराबाद सीट पर बड़े अंतर से जीत गए।

विवेक धाकड़ : मांडलगढ़ विधानसभा सीट पर भाजपा विधायक के निधन के चलते उपचुनाव हुए थे। तब वहां से कांग्रेस के विवेक धाकड़ जीतकर विधायक बने थे। लेकिन यहां फिर से भाजपा ने परचम लहराया है।

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