ताज़ा खबर
 

राजस्थान में टूटे कई मिथक

भाजपा को तगड़ा झटका जयपुर और जोधपुर जिलों से ही लगा। पश्चिमी क्षेत्र में कांग्रेस अपनी खोई जमीन वापस लाने में सफल रही। जोधपुर संभाग में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का प्रभाव रहा। इसी तरह से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट का असर रहा कि जयपुर संभाग के गुर्जर बहुल इलाकों की ज्यादातर सीटों से भाजपा का सफाया हो गया।

Author Published on: December 13, 2018 6:36 AM
वसुंधरा राजे (Express file photo)

राजस्थान में इस बार यह मिथक टूट गया कि जिस दल की मेवाड़ (उदयपुर संभाग) में ज्यादा सीटें आती हैं, प्रदेश में उनकी ही सरकार बनती है। भाजपा ने इस बार मेवाड़ संभाग के आदिवासी अंचल में कांग्रेस से ज्यादा सीटें जीतीं, इसके बावजूद सत्ता उसके हाथ से निकल गई। कांग्रेस को जोधपुर संभाग के मारवाड़ में अच्छी कामयाबी मिली। भाजपा को तगड़ा झटका जयपुर और जोधपुर जिलों से ही लगा। पश्चिमी क्षेत्र में कांग्रेस अपनी खोई जमीन वापस लाने में सफल रही। जोधपुर संभाग में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का प्रभाव रहा। इसी तरह से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट का असर रहा कि जयपुर संभाग के गुर्जर बहुल इलाकों की ज्यादातर सीटों से भाजपा का सफाया हो गया। पहली बार भाजपा का एक भी गुर्जर उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत पाया। भाजपा ने नौ गुर्जर उम्मीदवार मैदान में उतारे थे। गुर्जर समुदाय पूरी तरह से पायलट के पक्ष में खड़ा हो गया और जयपुर, दौसा, धौलपुर, भरतपुर, करौली, सवाई माधोपुर, टोंक जिलों में भाजपा अपनी कई परंपरागत सीटों को भी हार गई। कांग्रेस ने 12 गुर्जर प्रत्याशियों को टिकट दिया और उनमें से सात ने चुनाव जीता।

मेवाड़ संभाग की 35 सीटों में से कांग्रेस को सिर्फ 12 सीटें ही मिली। भाजपा ने 20 सीटें हासिल की और तीन सीटें अन्य दलों के कब्जे में गई। इससे पहले के 2013 के चुनाव में भाजपा ने इस इलाके की 31 सीटों पर कब्जा किया था। कांग्रेस को तीन सीटें ही मिलीं थी। जोधपुर संभाग के मारवाड़ में अंचल की 43 सीटों में से कांग्रेस 22 मिलीं। भाजपा को 16 सीटों पर ही संतोष करना पडा। इस संभाग की पांच सीटें अन्य दल और निर्दलियों के पास गई।

कांग्रेस का प्रदर्शन मध्य राजस्थान की सीटों पर अच्छा रहा। इस इलाके की 36 सीटों में से कांग्रेस ने 19 पर कब्जा जमाया। भाजपा को 12 सीटें ही मिल पाई। वर्ष 2013 के चुनाव में इस संभाग में कांग्रेस सिर्फ एक सीट ही जीत पाई थी। भाजपा ने 31 पर कब्जा जमाया था। बीकानेर संभाग में भी कांग्रेस ने पहले से बेहतर प्रदर्शन कर 39 सीटों में से 22 पर जीत दर्ज की तो भाजपा के खाते में 11 सीटें ही गई। कोटा संभाग की 47 सीटों में कांग्रेस ने 25 तो भाजपा ने 13 सीटों पर जीत हासिल की। वर्ष 2013 के चुनाव में इस इलाके में भाजपा ने 37 सीटें जीतीं थी तो कांग्रेस सिर्फ आठ सीटें ही जीत पाई थी।

आदिवासी अंचल का मेवाड़ क्षेत्र भाजपा के कब्जे में रहा। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदनलाल सैनी का कहना है कि आदिवासियों का भरोसा भाजपा पर कायम बना हुआ है। उदयपुर संभाग में भाजपा ने आदिवासियों के बीच बहुत काम किया है। दूसरी तरफ कांग्रेस में आदिवासियों के बीच पकड़ ढीली होने की चिंता अब साफ दिखाई देने लग गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का कहना है कि उदयपुर संभाग से नतीजे हमारे लिए चिंता का विषय हैं।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 कांग्रेस का प्रयोग : तजुर्बा और तरुणाई
2 विंध्य में सवर्णों के बीच खाई से कांग्रेस को हुआ नुकसान, मध्य प्रदेश के मालवा-निमाड़ ने की भाजपा से बेवफाई
3 कांग्रेस विधायक दल ने राहुल को दिया चुनने का हक, तीन सूबों के मुख्यमंत्री पर फैसला आज