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कांग्रेस विधायक दल ने राहुल को दिया चुनने का हक, तीन सूबों के मुख्यमंत्री पर फैसला आज

राजस्थान में मुख्यमंत्री पद के दो दावेदारों- पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट को लेकर कांग्रेस आलाकमान उलझन में फंस गया है। कांग्रेस विधायक दल की बुधवार को यहां हुई बैठक में मुख्यमंत्री चयन का अधिकार राहुल गांधी को सौंप दिया गया। कांग्रेस के पर्यवेक्षक बन कर आए राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल ने दिन भर यहां कांग्रेस के नए विधायकों से रायशुमारी कर एक आमराय बनाने की कोशिश की गई।

Author Updated: December 13, 2018 8:19 AM
कांग्रेस नेता सचिन पायलट और अशोक गहलोत।

हालिया विधानसभा चुनाव में जिन तीन हिंदी भाषी राज्यों में कांग्रेस ने जीत हासिल की, वहां के कांग्रेस विधायक दल ने बुधवार को बैठक कर मुख्यमंत्री चयन करने का अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को दे दिया है। इस फैसले के बाद मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री गुरुवार को तय हो जाएंगे। मध्य प्रदेश, राजस्थान के बाद छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के नवनिर्वाचित विधायकों ने बुधवार को एक प्रस्ताव पारित किया कि पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी जिसे भी विधायक दल का नेता चुनेंगे, वह उन्हें स्वीकार होगा। इससे पहले भोपाल में पार्टी के विधायकों ने बुधवार की शाम को इस आशय का एक पंक्ति का प्रस्ताव पारित किया। भोपाल में प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग की अध्यक्ष शोभा ओझा ने बताया, पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों ने एक प्रस्ताव पारित कर पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी को अधिकार दिया है कि वे मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला करें। कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक आरिफ अकील ने इस आशय का प्रस्ताव विधायकों की बैठक में रखा, जिसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया।

विधायकों की बैठक प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में लगभग दो घंटे तक चली इसके बाद पार्टी पर्यवेक्षकों के तौर पर यहां आए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एके एंटनी और कुंवर भंवर जितेंद्र सिंह द्वारा विधायकों से अलग-अलग राय ली जा रही है। ओझा ने बताया कि बैठक में कांग्रेस को समर्थन दे रहे चार निर्दलीय विधायक भी मौजूद थे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ, वरिष्ठ कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया, दिग्विजय सिंह, अरुण यादव और विवेक तन्खा सहित अन्य नेता भी बैठक में मौजूद थे। इससे पहले बुधवार दोपहर को कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया, दिग्विजय सिंह, अरुण यादव और विवेक तन्खा ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से राजभवन में मुलाकात की और प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनाने का दावा पेश किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर कमलनाथ ने राज्यपाल को सौंपे अपने पत्र में कहा, विधानसभा चुनावों में कांग्रेस प्रदेश में सबसे बड़े दल के तौर पर सामने आई है और कांग्रेस को बहुमत हासिल है। बसपा, सपा और निर्दलीय विधायकों ने भी कांग्रेस के प्रति समर्थन व्यक्त किया है।

इस बीच राजस्थान में मुख्यमंत्री पद के दो दावेदारों- पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट को लेकर कांग्रेस आलाकमान उलझन में फंस गया है। कांग्रेस विधायक दल की बुधवार को यहां हुई बैठक में मुख्यमंत्री चयन का अधिकार राहुल गांधी को सौंप दिया गया। कांग्रेस के पर्यवेक्षक बन कर आए राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल ने दिन भर यहां कांग्रेस के नए विधायकों से रायशुमारी कर एक आमराय बनाने की कोशिश की गई। आमराय नहीं बनने के बाद वेणुगोपाल ने अब फैसला किया कि वे गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मिल कर उन्हें पूरी जानकारी देंगे। इसके बाद ही प्रदेश में नए मुख्यमंत्री का फैसला होगा।

प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में बुधवार को माहौल बेहद गरम रहा। विधायक दल की बैठक के दौरान गहलोत और पायलट समर्थकों की नारेबाजी से कई बार तनाव के हालात बन गए। नव-निर्वाचित विधायकों की बैठक में पर्यवेक्षक वेणुगोपाल की मौजूदगी में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक लाइन का प्रस्ताव रखते हुए नेता चयन का अधिकार कांग्रेस अध्यक्ष को सौंपने का प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव का समर्थन प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट और पूर्व केंद्रीय मंत्री सीपी जोशी ने किया। इसके बाद बैठक खत्म कर दी गई। पर्यवेक्षक वेणुगोपाल और प्रभारी महासचिव अविनाश पांडे ने एक- एक विधायक से उसकी राय जानने का काम शुरू किया गया।

विधायकों से नेता के बारे में उनकी पसंद पूछी गई। ज्यादातर विधायकों ने अपनी राय में कहा कि आलाकमान जिसे भी नेता बनाएगा वह उन्हें मंजूर होगा। वरिष्ठ विधायक सीपी जोशी का कहना था कि अगले लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए ही नेता का चयन किया जाना चाहिए। जयपुर शहर कांग्रेस के अध्यक्ष और सिविल लाइंस सीट से विधायक बने प्रताप सिंह खाचरियावास ने देर शाम बताया कि पर्यवेक्षक वेणुगोपाल अब यहां की राय की जानकारी गुरुवार को दिल्ली जाकर राहुल गांधी को बताएंगे। इसके बाद ही मुख्यमंत्री के बारे में फैसला होगा।

पर्यवेक्षक वेणुगोपाल और प्रभारी महासचिव अविनाश पांडे के साथ बुधवार रात को प्रदेश के कांग्रेस नेताओं ने राज्यपाल कल्याण सिंह से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया। उन्होंने कांग्रेस और समर्थित विधायकों की भी सूची सौंपी। दूसरी तरफ मुख्यमंत्री को लेकर चली खींचतान से कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में असमंजस भी फैल गया है। प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने कहा कि आलाकमान का फैसला सभी नेता मानेंगे।

उधर छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के नवनिर्वाचित विधायकों ने बुधवार रात एक प्रस्ताव पारित किया कि पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी जिसे भी विधायक दल का नेता चुनेंगे, वह उन्हें स्वीकार होगा। कांग्रेस के पर्यवेक्षक मल्लिकार्जुन खरगे ने बताया कि कांग्रेस विधायकों ने प्रस्ताव पास किया है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी जिसे भी विधायक दल का नेता चुनेंगे उन्हें स्वीकार होगा। लेकिन आंतरिक लोकतंत्र को ध्यान में रखते हुए यहां सभी नव-निर्वाचित विधायकों से रायशुमारी ली जा रही है। इसके बाद नाम राष्ट्रीय अध्यक्ष को भेजा जाएगा।

राज्य में कांग्रेस को 15 वर्षों के बाद बड़ी जीत दिलाने में नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल की भूमिका को महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है। सिंहदेव और बघेल मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार हैं। सिंहेदव ने अंबिकापुर से और बघेल ने पाटन से जीत हासिल की है। राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रमुख नेता और दुर्ग लोकसभा सीट से सांसद ताम्रध्वज साहू भी मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में से एक हैं। साहू ने दुर्ग ग्रामीण विधानसभा सीट से जीत हासिल की है। साहू की साफ सुथरी छवि और अन्य पिछड़ा वर्ग में मजबूत पकड़ होने के कारण उन्हें भी मुख्यमंत्री पद का दावेदार माना जा रहा है। वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चरणदास महंत भी मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में से एक हैं। महंत पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं और अविभाजित मध्य प्रदेश में भी मंत्री रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के करीबी होने के कारण उन्हें भी मुख्यमंत्री पद का दावेदार माना जा रहा है।

(भाषा इनपुट के साथ)

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