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नंबर वन की टिप्‍पणी पर पत्रकार पर भड़के राहुल गांधी, बाद में बोले- आपका सवाल क्‍या था, भूल गया

कांग्रेस उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी और उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री व सपा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार (29 जनवरी) को लखनऊ में प्रेस कांफ्रेंस कर पत्रकारों के सवालों का जवाब दिया।

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी। (PTI File Photo)

कांग्रेस उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी और उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री व सपा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार (29 जनवरी) को लखनऊ में प्रेस कांफ्रेंस कर पत्रकारों के सवालों का जवाब दिया। इस दौरान एक मौका ऐसा आया जब एक पत्रकार के सवाल पर पूरे सभागार में हंसी छूट गई। हालांकि इस दौरान राहुल गांधी थोड़े से गुस्‍सा भी हो गए और उन्‍होंने इसके जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला। पत्रकार ने सवाल के दौरान खुद को देश के नंबर वन चैनल का प्रतिनिधि बताया। इस पर राहुल बोले, ”आप कहते हैंकि आप नंबर वन हैं और दूसरे नंबर दो। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोचते हैं कि वे ही नंबर वन है और उनके अलावा कोई नंबर दो नहीं है।” इस पर उनके पास बैठे अखिलेश यादव भी हंसी नहीं रोक पाए।

इस सवाल के दौरान राहुल गुस्‍से में भी नजर आए। उन्‍होंने पत्रकार को बीच सवाल के दौरान थोड़ सा डांट भी दिया। बाद में वे पत्रकार के एक सवाल को भूल भी गए। उन्‍होंने कहा, ” मैं भूल गया आपने दूसरा सवाल क्‍या किया था।” इस पर उनके पास बैठे लोगों ने उन्‍हें याद दिलाया। प्रेस कांफ्रेंस के दौरान राहुल ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन को ‘गंगा-जमुना’ का संगम करार दिया। उन्‍होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा की ‘नीयत’ साफ नहीं है और वह सपा के साथ मिलकर उनकी ‘क्रोध’ की राजनीति का मुकाबला करेंगे। राहुल ने कहा, ‘‘इस गठबंधन से उनके अखिलेश (सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री अखिलेश यादव) से निजी और राजनीतिक संबंध गहरे हुए हैं। यह गंगा और जमुना का संगम है, जिसमें से तरक्की की सरस्वती निकलेगी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम क्रोध और गुस्से की राजनीति को रोकना चाहते हैं क्योंकि इससे जनता को नुकसान हो रहा है। जो क्रोध भाजपा और संघ फैला रहे हैं, उसका मुकाबला करने के लिए हम एक साथ आये हैं क्योंकि उत्तर प्रदेश के डीएनए में क्रोध नहीं बल्कि प्रेम और भाईचारा है।’’ संघ और भाजपा पर हमला जारी रखते हुए राहुल ने उन्हें फासीवादी करार दिया और कहा कि उनकी नीयत साफ नहीं है जबकि अखिलेश की नीयत सही है और उन्होंने पिछले पांच साल कोशिश भी की। जो अखिलेश की नीयत है वही उनकी :राहुल: नीयत है और ‘राजनीति नीयत पर होती है।’

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