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केजरीवाल बोले, राहुल ने गठबंधन से इनकार किया

’ पत्रकारों से बातचीत के दौरान ‘आप’ प्रमुख ने कहा कांग्रेस अध्यक्ष ने ‘आप के साथ चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया।’

rahul gandhi and delhi cm arvind kejriwalराहुल गांधी और दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में सोमवार को कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल ने गठबंधन से इनकार किया है। दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ेंगी। हवाईअड्डे पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान ‘आप’ प्रमुख ने कहा कि उन्होंने हाल ही में गांधी से मुलाकात की थी। कांग्रेस अध्यक्ष ने ‘आप के साथ चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया।’ दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने भी सोमवार को कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी समझौते को नकार चुके हैं, पार्टी सभी सीटों पर अपने बूते चुनाव लड़ेगी। उम्मीदवार तय करने की प्रक्रिया चल रही है, जल्द सातों सीटों के लिए उम्मीदवार घोषित कर दिए जाएंगे।

दीक्षित का कहना है कि एक तरफ ‘आप’ नेता सातों सीटों पर उम्मीदवार घोषित करके चुनाव प्रचार में भाजपा से ज्यादा कांग्रेस पर हमला बोल रहे हैं और दूसरी तरफ समझौते की बात कर रहे हैं। ऐसे लोगों के साथ मिलकर चुनाव कैसे लड़ा जा सकता है। केजरीवाल और दीक्षित के बयानों के बावजूद अभी भी दोनों दलों के कुछ नेता तालमेल की उम्मीद लगाए हैं। बताया जाता है कि जनवरी में प्रदेश अध्यक्ष बनते ही शीला दीक्षित ने पार्टी की बैठक करके अपने बूते चुनाव लड़ने का प्रस्ताव पार्टी नेतृत्व को भेज दिया था। दिल्ली में प्रचंड बहुमत से सरकार में बैठी ‘आप’ के नेताओं को लगने लगा था कि कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव बाकी पेज 8 पर लड़ने पर भाजपा को पराजित किया जा सकता हैं।

‘आप’ का उद्देश्य जीतने से अधिक अपनी पार्टी की गिरती साख को बचाना माना जा रहा था। यही बात कांग्रेस के भी कई नेताओं पर भी लागू हो रही थी। पार्टी के कुछ बड़े नेता राहुल गांधी और यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी को समझाने में कामयाब हो गए थे कि इससे उनके गठबंधन वाले राज्यों की संख्या के साथ भाजपा विरोधी सांसदों और कांग्रेस के सदस्यों की संख्या बढ़ेगी। यह बात ‘आप’ नेताओं के प्रयास से गैर भाजपा दलों के शरद पवार, फारुख अब्दुल्ला और चंद्रबाबू नायडू जैसे नेता भी राहुल गांधी को समझा चुके हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल, गुलाम नबी आजाद, कपिल सिब्बल से लेकर दिल्ली के नेता अजय माकन और सुभाष चोपड़ा आदि की भी राय यही थी।

जबकि कांग्रेस के स्थानीय नेताओं का मानना है कि जिस ‘आप’ ने कांग्रेस के वोट लेकर उसे हाशिए पर ला दिया। उसके साथ चुनाव लड़ने का कोई मतलब नहीं है। दिल्ली अध्यक्ष पद छोड़ने से पहले अजय माकन भी इसी राय के थे। उन्होंने बाद में नई दिल्ली लोकसभा सीट से फिर से चुनाव लड़ने के लिए अपनी राय बदल दी। जबकि केजरीवाल और उनके पार्टी के लोग लगातार समझौते के प्रयास में लगे हुए हैं लेकिन सार्वजनिक रूप से ऐसा जता रहे हैं कि उन्हें समझौते की परवाह नहीं है।

समझौते के लिए राहुल गांधी ने पांच मार्च को दिल्ली के प्रभारी, सह प्रभारी, अध्यक्ष, कार्यकारी अध्यक्षों, पूर्व अध्यक्षों और पूर्व विधान सभा अध्यक्ष को बुलाकर राय जानी थी। बैठक में प्रभारी पीसी चाको और पूर्व अध्यक्ष अजय माकन के अलावा सभी ने अपने बूते चुनाव लड़ने की वकालत की और कहा कि आप अब समाप्त हो रही है, उसे फिर से ताकत नहीं देनी चाहिए। लेकिन यह अध्याय बंद नहीं हुआ और पीसी चाको ने कार्यकर्ताओं से सर्वे करवाकर लोगों की राय जानी। यह संदेश गया कि पार्टी हर हाल में समझौता चाहती है। उस सर्वे में ज्यादातर कार्यकर्ताओं ने गठबंधन के पक्ष में मत दिया था। 25 मार्च की राहुल गांधी के यहां हुई बैठक में शीला दीक्षित समेत छह नेताओं ने गठबंधन का विरोध किया। छह ने ही गठबंधन की वकालत की। अंतिम फैसला राहुल गांधी पर छोड़ दिया गया।

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