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रायबरेली लोकसभा सीट: कभी सिपहसलार अब रण में सामने, गांधी परिवार की 68 साल पुरानी सीट

सोनिया मुकाबला भाजपा के दिनेश सिंह से है। दिनेश सिंह एक साल पहले तक गांधी परिवार के बहुत करीब थे। सोनिया गांधी ने दिनेश सिंह को निर्विरोध एमएलसी बनाया था।

सोनिया गांधी और दिनेश सिंह

स्वामीनाथ शुक्ल

रायबरेली में गांधी परिवार की तीसरी संसदीय प्रतिनिधित्व कर रही है। गांधी परिवार की 68 साल पुरानी सीट के पहले सांसद फिरोज गांधी थे। इसके बाद राजनीति में दुनिया की सबसे ताकतवर और भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गाधी रायबरेली से तीन बार सांसद रहीं। अब इंदिरा की बड़ी बहू सोनिया गांधी चार बार से रायबरेली की सांसद हैं। सोनिया मुकाबला भाजपा के दिनेश सिंह से है। दिनेश सिंह एक साल पहले तक गांधी परिवार के बहुत करीब थे। सोनिया गांधी ने दिनेश सिंह को निर्विरोध एमएलसी बनाया था। बाकी इनके दो भाई राकेश सिंह को कांग्रेस का विधायक और अवधेश सिंह को जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठाया था। लेकिन तीनों भाई दल बदलकर भाजपा में हैं। इससे दिनेश सिंह प्रियंका गांधी के निशाने पर हैं। रायबरेली में 16 चुनाव कांग्रेस अकेले जीती है। इसमें नौ सांसद गांधी परिवार के जुड़े हैं। बाकी गांधी परिवार के नाम पर सांसद बने थे।

सोनिया गांधी सबसे ज्यादा चार बार रायबरेली से सांसद बन चुकी हैं। अब पांचवी बार उम्मीदवार बनी हैं। रायबरेली के दो सांसद भाजपा के और एक जनता पार्टी के बने थे। रायबरेली में 1977 का चुनाव इंदिरा गांधी हार गई थीं। सोनिया गांधी की चुनाव प्रबंधक उनकी बेटी प्रियंका गांधी हैं। प्रियंका गांधी अमेठी और रायबरेली में दिन रात चुनाव प्रचार में जुटी हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर थी। इसके बाद रायबरेली में कांग्रेस के पास एक भी विधायक नहीं था। लेकिन सोनिया गांधी को 5,26,434 वोट पड़े थे जबकि भाजपा के अजय अग्रवाल को 1,73,721 और बसपा के प्रवेश सिंह को 63,633 वोट मिले थे। इस चुनाव में सपा बसपा के उम्मीदवार नहीं हैं। दिनेश सिंह मोदी के नाम पर वोट मांग रहे हैं जबकि वे एक साल पहले कांग्रेस से दल-बदलकर भाजपा में आए हैं। उनके खिलाफ सदन में दल बदल के मुकदमे हैं।

दिनेश सिंह के साथ उनके दो भाई हरचंदपुर के विधायक राकेश सिंह और जिला पंचायत अध्यक्ष अवधेश सिंह दोनों कांग्रेस से दल बदलकर भाजपा के चुनाव प्रचार में हैं। रायबरेली में 2014 और 2019 के चुनाव में जमीन-आसमान का अंतर है। 2014 के चुनाव के पहले रायबरेली में कांग्रेस का एक भी विधायक नहीं था। रायबरेली में पांच विधानसभा क्षेत्र हैं। इसमें 2014 के पहले सदर से पीस पार्टी के विधायक थे। बाकी बछरावां, हरचंदपुर, सरेनी और ऊंचाहार सपा के खाते में थी। लेकिन सपा कांग्रेस के साथ थी। इस चुनाव में भाजपा के पास बछरावां और सरेनी दो सीटे हैं। जबकि ऊंचाहार सपा के खाते में है। बाकी सदर और हरचंदपुर कांग्रेस के पास थीं।

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