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जीत पर भी सवालों की गुगली नहीं झेल सके नवजोत स‍िद्धू, टीवी शो छोड़ चले गए

जब एंकर ने सिद्धू के जवाब पर स्पष्टीकरण मांगा कि कैसे आप कह सकते हैं कि एमपी, राजस्थान में कांग्रेस की लहर है। इस पर सिद्धू ने कहा, "भाजपा के पांव तले जमीन नहीं, उसके बाद भी इस बात पर फिर भी उन्हें यकीन नहीं।

Election Result 2018: कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू (फाइल फोटो)

क्रिकेटर से राजनेता बने और पंजाब के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू तीन राज्यों में कांग्रेस की जीत पर पूछे गए सवाल भी नहीं झेल सके और लाइव डिबेट शो छोड़कर चल दिए। दरअसल, एनडीटीवी इंडिया पर शो के दौरान एंकर अभिज्ञान प्रकाश ने जब सिद्धू से राजस्थान में कांग्रेस की जीत पर सवाल पूछा कि 100 का आंकड़ा भी कांग्रेस नहीं पार कर पाई तो इसका आंकलन आपलोग कैसे करेंगे? इस पर सिद्धू ने कहा कि जीत आखिर एक रन से हो या 100 रन से, जीत तो जीत होती है औऱ जीत बड़ी सुखदायी होती है। सिद्धू ने कहा कि जीत इस बात की उद्घोषणा है कि कांग्रेस पूरी तरह छा गई है और राहुल गांधी एक बड़े लीडर बनकर उभरे हैं। उन्होंने कहा कि जनता का समर्थन भी है और बदलाव भी है और लोगों के दिल में धधकता हुए इनकलाब भी है। उन्होंने कहा, “जो लहर थी वह दैत्य बनकर सामने खड़ी है और लोग कह रहे हैं कि जिन्हें हम हार समझे थे, गला अपना सजाने को, वही अब नाग बन बैठे हैं, काट खाने को।” सिद्धू ने कहा कि मोदी सरकार के वादे फेल हुए हैं।

जब एंकर ने सिद्धू के जवाब पर स्पष्टीकरण मांगा कि कैसे आप कह सकते हैं कि एमपी, राजस्थान में कांग्रेस की लहर है। इस पर सिद्धू ने कहा, “भाजपा के पांव तले जमीन नहीं, उसके बाद भी इस बात पर फिर भी उन्हें यकीन नहीं। अरे, क्या बात करते हो दोस्त? लोगों की बात सुनिए। लोगों की बात समर्थन की आवाज है, धधकते शोलों की आवाज है।” इस पर भाजपा के नेता ने तंज कसा कि दुष्यंत की दो लाइनें कह लेने से कुछ नहीं हो जाता। “यह लाफ्टर शो नहीं है, इसे समझिए। आप डॉक्टर से बात कर लीजिए कि आपको कितना बोलने को कहा है?” इस पर सिद्धू ने कहा कि या तो एक बंदा बोल लो या दस बंदा चीख लो। इसके बाद अचानक नवजोत सिंह सिद्धू शो को छोड़कर चले गए।

बता दें कि पांच राज्यों के हालिया विधान सभा चुनावों में कांग्रेस ने जहां मणिपुर में सत्ता गंवाई है, वहीं हिन्दी पट्टी के तीन बड़े राज्य मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में जीत दर्ज की है। एमपी और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पिछले पंद्रह सालों से सत्ता से दूर थी।

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