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Explained: भुल्लर की रिहाई की डिमांड आखिर इस बार के ही Punjab Election में क्यों सामने आई?

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने 23 जनवरी रविवार को दविंदर पाल भुल्लर की तत्काल रिहाई की मांग करते हुए अरविंद केजरीवाल और उनकी सरकार को घेरा था।

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पंजाब विधानसभा चुनाव के बीच भुल्लर की रिहाई की मांग तेज हो गई है(फोटो सोर्स: PTI)।

पंजाब में विधानसभा चुनाव के बीच 1993 के दिल्ली बम विस्फोट मामले के दोषी दविंदर पाल सिंह भुल्लर की स्थायी रिहाई की मांग उठी है। बता दें कि 1994 से जेल में बंद भुल्लर की स्थायी रिहाई का अनुरोध सिख निकायों द्वारा दिल्ली की AAP सरकार के पास लंबित है। इस मांग को अन्य राजनीतिक दलों द्वारा भी तेजी से उठाया गया है।

बता दें कि मार्च 2002 में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई मौत की सजा के खिलाफ भुल्लर की अपील को खारिज कर दिया था। भुल्लर की फांसी की सजा उम्र कैद में बदलने को लेकर भुल्लर के परिवार और सिख निकायों ने अभियान भी चलाया। इस दौरान लोकप्रिय समर्थन भी मिला।

अकाली दल ने की थी मांग: 2013 में, पंजाब के पूर्व सीएम और अकाली नेता प्रकाश सिंह बादल ने तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह को भुल्लर की मौत की सजा को कम करने के लिए कहा था। वहीं दूसरी तरफ से दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल द्वारा भुल्लर के लिए क्षमादान का समर्थन करने के लिए सिख संगठनों ने सराहना की थी।

इन मांगों के बीच 2015 में आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने भुल्लर की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था। जिसके बाद पंजाब में शिरोमणि अकाली दल-भाजपा सरकार और दिल्ली में आप सरकार ने भुल्लर को तिहाड़ जेल से अमृतसर सेंट्रल जेल में स्थानांतरित करने की मांग की। बता दें कि 23 साल बाद भुल्लर को अप्रैल 2016 में पहली बार पैरोल मिली थी। और तब से वह अक्सर पैरोल पर बाहर आता रहता है।

पंजाब विधानसभा चुनाव के बीच भुल्लर की रिहाई की मांग उठी है। बता दें कि अक्टूबर 2019 में केंद्र सरकार ने गुरु नानक देव की 550 वीं वर्षगांठ पर भुल्लर सहित आठ सिख कैदियों की रिहाई के लिए एक विज्ञप्ति जारी की थी। केंद्र ने संबंधित राज्य सरकारों / केंद्रशासित प्रदेशों से केंद्र के परामर्श से इस मामले में छूट देने को कहा था। हालांकि, 2020 में दिल्ली सरकार के सेंटेंस रिव्यू बोर्ड ने भुल्लर की स्थायी रिहाई के अनुरोध को तीन बार खारिज कर दिया।

चुनाव के बीच रिहाई की मांग तेज: हाल ही में आम आदमी पार्टी के भगवंत मान ने दावा किया था कि भुल्लर की स्थायी रिहाई के लिए फाइल दिल्ली एलजी के पास लंबित थी। हालांकि, बाद में उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार “कानूनी प्रक्रिया खत्म होने के बाद” फैसला करेगी।

इसके अलावा पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने 23 जनवरी रविवार को भुल्लर की तत्काल रिहाई की मांग करते हुए अरविंद केजरीवाल और उनकी सरकार को घेरा था। बता दें कि शिअद इससे पहले भी भुल्लर की रिहाई की मांग करती रही है।

प्रकाश सिंह बादल का कहना है कि पंजाब में शांति और सांप्रदायिक सद्भाव को मजबूत करने के बड़े हित में भुल्लर को रिहा किया जाये। उन्होंने कहा कि “मैं केजरीवाल से अपील करता हूं कि वे तत्काल इसकी अनुमति दें और मुझे इसका कोई कारण नहीं दिखता कि वह इस संबंध में मेरी बात पर ध्यान क्यों न दें।”

बता दें कि सिख संगठनों ने आरोप लगाया है कि मौजूदा समय में करीब 9 कैदी ऐसे हैं जो 25-30 साल से सजा काटने के बाद भी देश की अलग-अलग जेलों में बंद हैं। कहा गया है कि अगर बंदियों की रिहाई पर केंद्र सरकार कोई फैसला नहीं लेती है तो भाजपा प्रत्याशियों की घेराबंदी शुरू करने का फैसला लिया जाएगा।

गौरतलब है कि जिस तरह से पंजाब में भुल्लर कि रिहाई की मांग सिख संगठनों द्वारा की जा रही है। उसको लेकर कहा जा रहा है कि राजनीतिक पार्टियां इसमें अपना हित देखते हुए इस मांग को बल दे रही हैं। ऐसे में कोई भी दल नहीं चाहेगा कि पंजाब में उसे इस मुद्दे पर नुकसान हो।

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