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Punjab Election: पूर्व IAS, IPS, से लेकर पूर्व बाबू तक, जानें सरकारी अधिकारी रहे कितने उम्‍मीदवार आजमा रहे किस्‍मत

भाजपा ने रोपड़ से पूर्व IPS अधिकारी और अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष इकबाल सिंह लालपुरा को मैदान में उतारा है। उन्हें सिख धर्मग्रंथों पर 14 पुस्तकों के लेखक के रूप में जाना जाता है।

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पंजाब में इस बार कई पूर्व अधिकारी अपनी चुनावी किस्मत आजमा रहे हैं(फोटो सोर्स: PTI)।

पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए 20 फरवरी को मतदान होंगे। इसके नतीजे 10 मार्च को आएंगे। ऐसे में तमाम राजनीतिक दलों की तरफ से खूब जोर आजमाइश हो रही है। वहीं इस चुनाव में कई पूर्व IAS, IPS और पूर्व बाबू भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इसमें कुछ अधिकारी रिटायर हुए हैं तो वहीं कुछ ने राजनीति में आने के लिए रिटायरमेंट लिया है।

सेवानिवृत्ति से पहले ही दिया इस्तीफा: इस कड़ी में पूर्व आईपीएस अधिकारी कुंवर विजय प्रताप सिंह भी शामिल हैं। विजय प्रताप सिंह ने पिछले साल पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा बेअदबी विरोधी प्रदर्शनकारियों पर बहबल कलां फायरिंग में अपनी जांच की आलोचना करते हुए अपनी सेवानिवृत्ति से आठ साल पहले आईजी के पद से इस्तीफा दे दिया था। इन दिनों उन्हें आप के पोस्टरों में देखा जा रहा है। गौरतलब है कि उनके इस्तीफे के बाद कई सिख संगठनों द्वारा उनका सम्मान किया गया था।

इसके अलावा डॉ जगमोहन सिंह राजू भी इसी कड़ी में शामिल हैं। राजू ने हाल ही में तमिलनाडु में अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद से इस्तीफा दिया है।भाजपा ने उन्हें हाई प्रोफाइल अमृतसर पूर्व सीट से अपना उम्मीदवार बनाया है। जहां से पंजाब कांग्रेस प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू के खिलाफ शिरोमणि अकाली दल के बिक्रम मजीठिया होंगे।

2009 में यूनेस्को किंग सेजोंग विश्व साक्षरता पुरस्कार जीतने वाले राजू का कहना है कि उन्होंने राजनीति में इसलिए कदम रखा क्योंकि सुशासन के लिए अच्छे राजनेताओं की जरूरत हैं।

वहीं दोआबा में, संयुक्त समाज मोर्चा (एसएसएम) ने फगवाड़ा से कांग्रेस विधायक और पूर्व बाबू बलविंदर सिंह धालीवाल के खिलाफ पूर्व आईएएस अधिकारी खुशी राम को टिकट दिया है। इसके अलावा मालवा में भाजपा ने गिल निर्वाचन क्षेत्र से पंजाब कैडर के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एस आर लधर को मैदान में उतारा है।

इस कड़ी में आम आदमी पार्टी ने जंडियाला से 2012 बैच के पीसीएस अधिकारी हरभजन सिंह को उम्मीदवार बनाया है। उनका कहना है कि उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी क्योंकि वह समाज सेवा करना चाहते थे।

बता दें कि इनमें एक अधिकारी का कहना है, ”राजनेताओं की निकटता की वजह से ऐसा होता है।” गौरतलब है कि बलविंदर धालीवाल को इस बात की जानकारी थी। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्हें पंजाब भूमि रिकॉर्ड निदेशक के रूप में इस्तीफा देने के कुछ ही घंटों के बाद 2019 का उपचुनाव लड़ने के लिए कांग्रेस का टिकट मिल गया था।

भाजपा ने रोपड़ से पूर्व आईपीएस अधिकारी और अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष इकबाल सिंह लालपुरा को मैदान में उतारा है। उन्हें सिख धर्मग्रंथों पर 14 पुस्तकों के लेखक के रूप में जाना जाता है। उन्होंने अप्रैल 1981 में भिंडरांवाले को गिरफ्तार किया था।

आप सबसे आगे: इनमें से ज्यादातर पूर्व बाबुओं और पुलिसकर्मियों को आम आदमी पार्टी ने चुनावी मैदान में उतारा है। अटारी से आप के उम्मीदवार पूर्व एडीसी जसविंदर सिंह रामदास का कहना है कि वह “केजरीवालवाद” और आप के “शासन के दिल्ली मॉडल” के कारण राजनीति में शामिल हुए हैं। बता दें कि उनके पिता उजागर सिंह रंगरेटा अकाली विधायक थे।

इसके अलावा इस कड़ी में हरमोहन सिंह संधू का नाम शामिल है। संधू ने पिछले साल एआईजी के पद से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि उनके परिवार का राजनीति में दखल पहले से ही है। बता दें कि उनकी मां सतवंत कौर पांच बार शिरोमणि अकाली दल से विधायक रहीं। उनके पिता अजैब सिंह संधू भी इसी पार्टी से दो बार विधायक रहे।

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