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पंजाब चुनाव: अग्रिम मोर्चे पर कैप्टन-जनरल की कमान कुनबे के हाथों में

पटियाला से मौजूदा विधायक परनीत कौर सुबह से लेकर शाम तक अपने पति के लिए प्रचार कर रही हैं।

Author पटियाला, | January 31, 2017 3:32 AM
कांग्रेस पंजाब में चुनाव अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में चुनाव लड़ रही है।

पंजाब चुनाव में प्रतिष्ठित पटियाला विधानसभा सीट पर प्रदेश कांग्रेस प्रमुख कैप्टन अमरिंदर सिंह की जीत सुनिश्चित करने के लिए एक ओर उनके विश्वस्त कार्यकर्ता दिन-रात काम कर रहे हैं तो दूसरी ओर उनके राजनीतिक प्रतिद्वंदी और शिरोमणि अकाली दल के उम्मीदवार जनरल जेजे सिंह (सेवानिवृत) के समर्थक भी जी जान से जुटे हुए हैं। पटियाला में अमरिंदर की पत्नी परनीत कौर ने बेटी और पोती के संग जबकि उनके बेटे रनिंदर सिंह ने लंबी में डेरा डाला हुआ है। लंबी सीट से अमरिंदर मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं जबकि पटियाला में उनका मुकाबला शिरोमणि अकाली दल के उम्मीदवार जनरल जेजे सिंह के साथ हैं।

जनरल जेजे सिंह के कुछ भूतपूर्व सहयोगी (सेवानिवृत्त) भी जनरल सिंह के लिए प्रचार कर रहे हैं जिनमें हवलदार एमजी सेठी, नायक ज्ञान देव और नायक सदा शिव जगताप शामिल हैं। हवलदार एमजी सेठी ने कहा, ‘मुझे पता चला कि मेरे साब (जनरल जेजे सिंह) पटियाला से चुनाव लड़ रहे हैं और इसके तुरंत बाद मैं अन्य मराठाओं के साथ यहां आ गया। हम साब की जीत सुनिश्चित करेंगे।’ पटियाला से मौजूदा विधायक परनीत कौर सुबह से लेकर शाम तक अपने पति के लिए प्रचार कर रही हैं। वह सुबह साढ़े दस बजे तक अपने मोती बाग पैलेस में लोगों से मिलती हैं और उसके बाद प्रचार के लिए बाहर निकल जाती हैं।
उनके साथ 21 वर्षीय पोती सहर इंदर कौर होती हैं। परनीत ने अपनी पोती की तारीफ करते हुए कहा, ‘‘मैंने कभी नहीं सोचा था कि वह अपने दादाजी के लिए इतने जुनून के साथ प्रचार करेगी और वह नशे की समस्या से लेकर बेरोजगारी, किसानों के कर्ज जैसे राज्य पर असर डाल रहे मुद्दों से भी परिचित है।’

सहर इंदर कौर ने कहा, ‘पहली बार मैं इन चुनावों में अपने दादाजी के लिए प्रचार कर रही हूं। लोग उनपर भरोसा करते हैं और युवा उनके साथ हैं। नशे की समस्या के अलावा बेरोजगारी यहां एक बड़ा मुद्दा हैं। दूसरी ओर सेवानिवृत सेना प्रमुख जनरल सिंह की पत्नी अनुपमा कौर ने कहा, ‘एक सेना अधिकारी की पत्नी होने के नाते मैंने समाज के सभी वर्गों की महिलाओं से बात की और गली में खड़े आदमी की परेशानी से भी वाकिफ हुई। यह पूरी तरह एक नया अनुभव है।’ अपने पिता के लिए प्रचार कर रहे विवेकपाल सिंह ने कहा कि यहां की राजनीति और फ्रांस की राजनीति में बहुत अंतर है।

 

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