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सियासी किस्साः नक्सली हमले में साफ हो गया था कांग्रेस का नेतृत्व, उसके बाद पहली बार छत्तीसगढ़ में सरकार बनाएगी कांग्रेस

झीरमघाटी हमले में छत्तीसगढ़ के कई वरिष्ठ नेताओं को खोने के बाद कांग्रेस पहली बार प्रदेश में सरकार बनाने जा रही है। उस खौफनाक मंजर को याद कर आज भी लोग सिहर जाते हैं।

सुकमा हमले में मारे गए थे कई कांग्रेसी नेता (एक्सप्रेस अर्काइव)

पांच साल पहले एक नक्सली हमले में प्रदेश का पूरा शीर्ष नेतृत्व खो चुकी छत्तीसगढ़ कांग्रेस एक बार फिर से सफलता के घोड़े पर सवार हुई है। 15 साल के लंबे इंतजार के बाद छत्तीसगढ़ में फिर से कांग्रेस की सरकार बनने जा रही है। लेकिन विधानसभा चुनाव में भाजपा का सूपड़ा साफ करने वाली कांग्रेस का पांच साल पुराना वो जख्म अब तक हरा है।

झीरमघाटी में क्या हुआ था उस दिन?

25 मई 2013 को आम नागरिकों के भेष में आए करीब 250 नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में कांग्रेस की परिवर्तन रैली के दौरान हमला बोल दिया। इस घटना को आजाद भारत के इतिहास का सबसे बड़ा माओवादी हमला माना जाता है। सुकमा से जगदलपुर लौट रहे नेताओं के काफिले पर झीरमघाटी में माओवादियों ने हमला बोल दिया। हमले के शिकार लोगों में शामिल रहे एक कांग्रेस कार्यकर्ता ने इलाज के दौरान बताया था कि करीब आधे घंटे तक काफिले पर गोलियां बरसती रहीं।

यूं साफ हो गया था छत्तीसगढ़ कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व

इस हमले में 29 लोग मारे गए थे। इनमें कांग्रेस के दिग्गज नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री और सांसद रह चुके महेंद्र कर्मा, छत्तीसगढ़ कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उदय मुदलियार भी शामिल थे। इसके बाद जून 2016 में छत्तीसगढ़ के से कांग्रेस के पहले और एकमात्र मुख्यमंत्री रहे अजीत जोगी ने भी कांग्रेस का दामन छोड़ दिया और अपनी नई पार्टी बना ली। इस तरह से कांग्रेस के लिए यह चुनावी सफलता छत्तीसगढ़ कांग्रेस में एक नई कहानी की तरह है।

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