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Lok Sabha Election 2019: बंपर मतदान का गणित सुलझाने में जुटे सियासी दल

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी दावा कर चुके हैं कि अब तक होने वाले बंपर मतदान से दीदी यानी ममता बनर्जी की नींद उड़ गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पिछले बंगाल दौरे पर दावा किया था कि 23 मई के बाद बंगाल में ममता बनर्जी सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो जाएगी।

ममता बनर्जी और पीएम नरेन्द्र मोदी, फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

Lok Sabha Election 2019: पश्चिम बंगाल में तमाम सियासी दल लोकसभा चुनावों के छह चरणों में हुए बंपर मतदान का सियासी गणित सुलझाने में जुट गए हैं। सातवें और आखिरी दौर में महानगर कोलकाता और उससे सटे उत्तर व दक्षिण 24-परगना जिले की नौ सीटों पर मतदान होना है। उससे पहले अब तक हुए चुनाव में भारी मतदान होता रहा है।  मतदान के मामले में पश्चिम बंगाल बाकी तमाम राज्यों से काफी आगे हैं। ऐसा कोई भी दौर नहीं रहा है जब हिंसा और संघर्ष के बावजूद 75 फीसद से ज्यादा मतदान नहीं हुआ हो। अबकी ज्यादातर सीटों पर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच टक्कर है। अब ये दोनों इस बंपर मतदान की व्याख्या अपने-अपने तरीके से करने लगे हैं।

भाजपा का दावा है कि तृणमूल कांग्रेस की नीतियों और अल्पसंख्यकों की तुष्टीकरण की नीति से आजिज आकर ही लोगों ने बंपर मतदान किया है। पार्टी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय दावा करते हैं कि इस बार के मतदान से साफ है कि लोग बदलाव के लिए बाहर निकले हैं। ऐसे में भाजपा अपने तय लक्ष्य 23 से ज्यादा सीटें जीत सकती हैं। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल तो पहले ही 30 सीटों का दावा कर चुके हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी दावा कर चुके हैं कि अब तक होने वाले बंपर मतदान से दीदी यानी ममता बनर्जी की नींद उड़ गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पिछले बंगाल दौरे पर दावा किया था कि 23 मई के बाद बंगाल में ममता बनर्जी सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो जाएगी। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस का दावा है कि बंपर मतदान पार्टी के हित में है। पार्टी महासचिव पार्थ चटर्जी कहते हैं कि दूसरे राज्यों के मुकाबले बंगाल के लोग राजनीतिक रूप से जागरूक हैं। इसी वजह से यहां बाकी जगहों के मुकाबले मतदान का औसत हमेशा ज्यादा रहा है। मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी, भाजपा, कांग्रेस और माकपा को एक ही थैले के चट्टे-बट्टे बताते हुए दावा कर रही हैं कि बंगाल में अबकी इन तमाम दलों का सूपड़ा साफ हो जाएगा और खासकर भाजपा को तो एक सीट भी नहीं मिलेगी।

उन्होंने कांग्रेस पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सहायता लेने का भी आरोप लगाया है। ममता दावा करती हैं कि पार्टी अबकी बंगाल की सभी 42 सीटें जीत कर केंद्र में अगली सरकार के गठन में अहम भूमिका निभाएगी। कांग्रेस और वामपंथी दल भी बंपर मतदान की अपने-अपने नजरिए से व्याख्या कर रहे हैं। उका कहना है कि राज्य के लोग राजनीतिक तौर पर काफी जागरूक हैं। वे इस खेल को समझ चुके हैं। इसलिए अबकी लोग बदलाव के लिए भारी तादाद में मतदान केंद्रों तक पहुंच रहे हैं। चौधरी अपनी बातों के समर्थन में ममता बनर्जी की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कुर्ते और रसगुल्ले का उपहार भेजने का भी जिक्र करते हैं।

माकपा नेता और जादवपुर संसदीय सीट से पार्टी के उम्मीदवार विकास रंजन भट्टाचार्य का दावा है कि आम लोगों का तृणमूल कांग्रेस सरकार से मोहभंग हो चुका है। बंपर मतदान सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी है।  भट्टाचार्य का दावा है कि लोग एक बार फिर वामपंथियों पर ही भरोसा जताएंगे। यहां तृणमूल कांग्रेस का विकल्प वामपंथी दल ही बन सकते हैं, भाजपा नहीं।

राजनीतिक प्रेक्षकों का कहना है कि बंगाल में मतदान हमेशा ज्यादा होता रहा है। इसलिए इससे कोई अर्थ निकालना उचित नहीं है। कांग्रेस व वामपंथी दलों के बीच तालमेल नहीं हो पाने से अबकी राज्य में धार्मिक आधार पर वोटरों का जबरदस्त धुव्रीकरण हुआ है। ऐसे में किसी भी पार्टी को मिलने वाले वोटों में मामूली हेर-फेर भी तमाम सीमकरणों को बदल सकता है। नतीजा भले 23 मई को आना हो, बंगाल के तमाम राजनीतिक दल अभी से अपनी-अपनी ढपली, अपना-अपना राग बजाने में जुट गए हैं।

छठे चरण के दौरान तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं की ओर से तेज होती हिंसा से साफ है कि पार्टी को अपने पैरों तले की खिसकती जमीन का अंदेशा हो गया है।
-दिलीप घोष, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष

पिछले लोकसभा चुनावों में भी ऐसी ही बंपर वोटिंग हुई थी और नतीजा तृणमूल कांग्रेस की 34 सीटों के तौर पर सामने आया था।
-पार्थ चटर्जी, महासचिव तृणमूल

कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अधीर चौधरी तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच गोपनीय तालमेल का आरोप लगाते हैं।

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