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पाटीदार आंदोलन का गढ़ रहे मेहसाणा में तमाम मुद्दे ध्वस्त, BJP बोल रही- ‘अपना जिला पीएम देगा’

अपने चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा उम्मीदवार शारदाबेन पटेल अक्सर कहती दिखाई देती हैं कि 'आप लोग चाहे मुझे वोट ना दें, लेकिन नरेंद्रभाई को, इस मिट्टी के सपूत को वोट दें।'

पीएम मोदी एक रैली के दौरान। (PTI Photo/Shashank Parade)

गुजरात का पाटीदार आंदोलन अब चुनावी मुद्दा नहीं है। ये बात भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टी के नेता स्वीकार करते हैं। यही वजह है कि एक समय पाटीदार आंदोलन का गढ़ रहे गुजरात के मेहसाणा जिले में अब चारों तरफ सिर्फ पीएम मोदी की ही चर्चा हैं और यहां के लोग एक बार फिर से नरेंद्र मोदी को देश का प्रधानमंत्री बनते देखना चाहते हैं। मेहसाणा में ही पीएम मोदी का गांव (वडनगर) और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का गांव (मनसा) आते हैं। ये भी वजह है कि मेहसाणा के लोग यह कहते दिखाई दे जाते हैं कि ‘अपना जिला पीएम देगा।’ गुजरात में पाटीदार आंदोलन की शुरुआत मेहसाणा से हुई थी और साल 2017 के गुजरात विधानसभा चुनावों के दौरान हालात ऐसे थे कि जिले के कई पाटीदार प्रभुत्व वाले गांवों में भाजपा नेताओं के प्रवेश करने पर ही रोक लगा दी गई थी।

इसी का असर था कि मेहसाणा की उंझा सीट से 5 बार भाजपा विधायक रहे कद्दावर नेता नारायण पटेल को कांग्रेस की आशा पटेल के सामने हार का सामना करना पड़ा था। लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा ने अपनी मौजूदा सांसद जयश्रीबेन पटेल का टिकट काटकर उनकी जगह पर गुजरात सरकार के पूर्व मंत्री अनिल पटेल की पत्नी शारदाबेन पटेल को टिकट दिया है। भाजपा उम्मीदवार भी स्थानीय मुद्दों के बजाए पीएम मोदी को देश का अगला पीएम बनाने के लिए लोगों से वोट मांग रहे हैं। अपने चुनाव प्रचार के दौरान शारदाबेन पटेल अक्सर कहती दिखाई देती हैं कि ‘आप लोग चाहे मुझे वोट ना दें, लेकिन नरेंद्रभाई को, इस मिट्टी के सपूत को वोट दें।’

वहीं कांग्रेस ने मेहसाणा सीट पर पूर्व महिला नौकरशाह अंबालाल पटेल को अपना उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस उम्मीदवार कांग्रेस के गरीबों के हितैषी माने जाने वाले घोषणा पत्र के आधार पर लोगों से वोट मांग रही हैं। जिसमें वह कांग्रेस की न्यूनतम आय योजना का पूरा प्रचार कर रही हैं। हालांकि अंबालाल पटेल ने दावा किया कि युवा अभी भी नाराज हैं, लेकिन वह समुदाय आधारित राजनीति नहीं करना चाहतीं। बता दें कि मेहसाणा के 16 लाख मतदाताओं में पाटीदार समुदाय की तादाद सबसे ज्यादा है। इसके बाद ठाकोर, दलित और मुस्लिमों का नंबर आता है। पाटीदार आंदोलन के नेता हालांकि अभी भी मानते हैं कि लोगों में ‘अदृश्य’ गुस्सा है और मतदान के दिन ही यह दिखाई देगा। वहीं भाजपा समर्थकों का दावा है कि मोदी सरकार द्वारा पिछड़े सवर्णों के लिए 10% आरक्षण की व्यवस्था कर देने से पाटीदार आंदोलन खत्म हो चुका है।

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