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इनकार सुनते ही CEC पर भड़क गए चंद्रबाबू नायडू, कहा- फालतू बात मत कीजिए

पार्टियों की योजना है कि अगर चुनाव आयोग उनकी चिंताओं का समाधान नहीं करता तो वे बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करेंगे। मुलाकात के दौरान कुछ नेताओं और चीफ इलेक्शन कमिश्नर सुनील अरोड़ा के बीच तीखी बहस भी हुई।

ईवीएम के मुद्दे पर विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने चुनाव आयोग से मुलाकात की।(AP Photo)

22 विपक्षी दलों के नेता मंगलवार को चुनाव आयोग पहुंचे और मांग की कि किसी गड़बड़ी की सूरत में 100 प्रतिशत वीवीपैट की पचिर्यों का मिलान किया जाए। नेताओं ने यह भी मांग की कि वीपीपैट और ईवीएम के आंकड़ों में बड़ा अंतर होने की स्थिति में क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी, चुनाव आयोग इस पर भी स्पष्टीकरण दे। विपक्ष के इन नेताओं की अगुआई तेलगू देशम पार्टी के प्रमुख चंद्रबाबू नायडू कर रहे थे। उन्होंने न केवल ‘जनादेश के साथ छेड़छाड़’ की आशंका जताई, बल्कि उन्होंने वीवीपैट की निगरानी की तुलना कैंसर के लिए होने वाले ब्लड टेस्ट से कर डाली।

उन्होंने कहा, ‘हमने चुनाव आयोग से कहा है कि वे जनादेश का सम्मान करें। इससे छेड़छाड़ नहीं हो सकती।’ बता दें कि विपक्ष के नेताओं ने न केवल ईवीएम की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई, बल्कि ईसी से कुछ खास मामलों के जांच की भी मांग की। पार्टियों की योजना है कि अगर चुनाव आयोग उनकी चिंताओं का समाधान नहीं करता तो वे बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करेंगे। मुलाकात के दौरान कुछ नेताओं और चीफ इलेक्शन कमिश्नर सुनील अरोड़ा के बीच तीखी बहस भी हुई। जब मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने ज्यादा वीवीपैट की पर्चियों की ईवीएम के आंकड़ों से मिलान की मांग खारिज कर दी है, चंद्रबाबू नायडू ने कहा, ‘आपको यह जानना चाहिए कि 22 विपक्षी पार्टियां 70 प्रतिशत जनादेश का प्रतिनिधित्व करती हैं। फालतू बात मत कीजिए।’

अंग्रेजी अखबार इकॉनमिक टाइम्स ने वहां मौजूद विपक्ष के एक प्रतिनिधि के हवाले से इस बातचीत की जानकारी दी है। वहीं, तृणमूल नेता डेरेक ओ ब्रायन ने मुख्य चुनाव आयुक्त से यह जानना चाहा कि रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने किस हैसियत से यह मांग की कि चुनाव के बाद भी बंगाल में केंद्रीय बलों की तैनाती जारी रहनी चाहिए। डेरेक ने पूछा, ‘क्या बंगाल में कोई इमर्जेंसी है?’ तृणमूल नेता ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग संस्थान के उच्च मानदंडों को नुकसान पहुंचा रहा है।

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