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मंदिर आंदोलन के महारथी रण में नहीं

राम मंदिर आंदोलन के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह उन दिनों जननायक के रूप में देखे जाते थे। वही अकेले इस समय संवैधानिक राज्यपाल के पद पर हैं। वे एकमात्र आंदोलन के नेता हैं जो पद पर हैं अन्यथा सभी न तो किसी पद पर हैं न ही उन्हें टिकट दिया गया है।

Author April 23, 2019 3:08 AM
लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती को नहीं मिला टिकट (फोटो सोर्स : indian express)

त्रियुग नारायण तिवारी

राम मंदिर आंदोलन के वरिष्ठ नेताओं को भारतीय जनता पार्टी ने इस बार के चुनाव में टिकट नहीं दिया है जिससे वे सभी बड़े नेता इस चुनाव से बाहर हैं। राम मंदिर आंदोलन के शलाका पुरुष और राम रथयात्रा के नायक लालकृष्ण आडवाणी को इस बार भारतीय जनता पार्टी ने टिकट नहीं दिया है जिससे वे चुनाव मैदान से बाहर हैं। रथयात्रा के कारण लालकृष्ण आडवाणी को बिहार में गिरफ्तार भी किया गया था जिससे मंदिर के पक्ष में पूरे देश में हवा बनी थी और इसी के कारण 1991 में जिन नेताओं को भाजपा ने टिकट दिया वे सब सांसद बन गए थे।

इस आंदोलन के दूसरे वरिष्ठ नेता डॉ मुरली मनोहर जोशी थे। डॉ जोशी को कानपुर से पिछली बार टिकट मिला था। इस बार उन्हें टिकट नहीं दिया गया है। डॉ जोशी ने तिरंगा यात्रा निकाली थी और दक्षिण भारत से लेकर कश्मीर तक की यात्रा की थी और वहां पर तिरंगा झंडा लाल चौक में फहराया था। फिर वहीं यात्रा अयोध्या भी पहुंची थी।

तीसरे बड़े नेता अयोध्या में रहकर राम मंदिर आंदोलन को चलाने वाले बजरंग दल के नेता विनय कटियार भी इस बार चुनाव मैदान में नहीं हैं। उन्हें कहीं लोकसभा चुनाव का टिकट नहीं दिया गया है। जौनपुर और हरिद्वार से सांसद रहे स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती को भी इस बार कहीं से टिकट नहीं मिला है जबकि वे अटल बिहारी सरकार में गृह राज्य मंत्री भी थे। अयोध्या के राम जन्मभूमि न्यास के सदस्य भगवा वस्त्रधारी डॉ रामविलास दास वेदांती मछली शहर तथा प्रतापगढ़ से सांसद रह। इस बार भी उन्हें कहीं से टिकट नहीं दिया गया है और वे नाराज हैं। उनका कहना है कि राम मंदिर निर्माण के संकल्प को भाजपा भूल रही है, जिसका उसे खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

संत वेश में राम मंदिर आंदोलन के लिए पूरे देश में भाषण करने वालीं साध्वी उमा भारती भी इस बार चुनाव मैदान में नहीं हैं। वे मंदिर आंदोलन के लिए अपने सिर के बाल मुंडवा कर कारसेवकों के बीच पहुंच गई थीं। कई वर्षों तकभारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रहे कलराज मिश्र अयोध्या से विशेष रूप से जुड़े रहे और हर आंदोलन व अवसरों पर अयोध्या में उनकी उपस्थिति रहती थी। उन्हें भी उम्र का तकाजा बता कर चुनाव मैदान से बाहर कर दिया है।

इसी तरह पिछड़े वर्ग के नेता ओमप्रकाश वर्मा को चुनार मिर्जापुर क्षेत्र के मूल निवासी हैं। कई बार प्रदेश अध्यक्ष व मंत्री रहे पर उनकी भी इस बार अनदेखी कर दी गई। राम मंदिर आंदोलन के नेताओं को भाजपा ने जहां इस बार चुनावी मैदान से बाहर रखा है, वहीं पर राम मंदिर के मुद्दे को भी गौण कर रखा है। अयोध्या जैसे क्षेत्र में भी अब भाजपा के कार्यकर्ता जय श्री राम का नारा बोलने से परहेज कर रहे हैं। भाजपा के प्रबल समर्थक हनुमान प्रसाद का कहना है कि यह भाजपाइयों की दोगली नीति का खामियाजा चुनाव में भुगतना पड़ सकता है। अयोध्या के रग रग में राम मंदिर और भगवान राम का नाम है चाहे वह पक्ष में हो चाहे विपक्ष में। हर कोई अयोध्या में राम मंदिर देखना चाहता है।

अयोध्या के विशंभर पांडे का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी राम मंदिर और राम मंदिर आंदोलन से पैदा हुए नेताओं की उपेक्षा कर रहा है। यह उसके लिए ठीक नहीं है। उन्होंने यह भी पूछा यदि 75 साल के नाते कलराज मिश्र का टिकट नहीं दिया जाता है तो फिर 75 वर्ष के मुकुट बिहारी वर्मा को अंबेडकर नगर से टिकट कैसे मिल गया? केंद्रीय नेतृत्व को साफ करना चाहिए कि मापदंड क्या है। इससे एक वर्ग नाराज हो रहा है। राम मंदिर आंदोलन के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह उन दिनों जननायक के रूप में देखे जाते थे। वही अकेले इस समय संवैधानिक राज्यपाल के पद पर हैं। वे एकमात्र आंदोलन के नेता हैं जो पद पर हैं अन्यथा सभी न तो किसी पद पर हैं न ही उन्हें टिकट दिया गया है। इससे आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं में नाराजगी है।

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