दिल्ली मेरी दिल्ली: अभिनेता का साथ

स्टार को स्टार की जरूरत। बीते दिनों चुनाव प्रचार में यह वाक्या आम था। खासकर जमना पार में यह चर्चा का केंद्र बनता दिखा। सपना चौधरी ने एक नहीं कई-कई दिन रोड शो में अपने साथी अभिनेता का साथ दिया।

रोड शो के दौरान मनोज तिवारी, सपना चौधरी और विजय गोयल, फोटो सोर्स- ANI

स्टार को स्टार की जरूरत। बीते दिनों चुनाव प्रचार में यह वाक्या आम था। खासकर जमना पार में यह चर्चा का केंद्र बनता दिखा। मौका था उत्तर पूर्वी लोकसभा सीट में रोड शो का और वाक्या था-अभिनेता मनोज तिवारी के प्रचार प्रसार का। दरअसल भोजपुरी के इस सुपर स्टार मनोज तिवारी जो भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। उनका बेड़ा पार कराने के लिए हरियाणा की स्टार सपना चौधरी को उतरना पड़ा। सपना चौधरी ने एक नहीं कई-कई दिन रोड शो में अपने साथी अभिनेता का साथ दिया। किसी ने ठीक ही कहा-समय बलवान होता है। तभी तो चुनावी बेड़ा पार करने के लिए एक स्टार को भी स्टार की जरूरत पड़ती दिख रही है।

पुलिस व्यस्त है
दिल्ली पुलिस मामला दर्ज करने में देरी करने या फिर पीड़ित को चक्कर लगवाने के बहाने अक्सर खोज ही लेती है। पिछले कुछ दिनों से पीड़ितों को यह कह कर थानों से भेजा जा रहा था कि फिलहाल सभी अधिकारी और कर्मचारी चुनाव ड्यूटी में व्यस्त हैं। अभी मामला दर्ज भी कर लिया तो कुछ होना नहीं है। ऐसा ही एक मामला पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार थाना में देखने को मिला, जब मारपीट का मामला दर्ज करवाने पीड़ित पहुंची तो उन्हें बाद में आने की सलाह दी गई। वहीं, मध्य जिले में भी कई लोगों को चुनाव बाद आने की सलाह दी गई। ये पीड़ित धोखाधड़ी के मामले दर्ज करवाने के लिए थाने में पहुंचे थे। यही नहीं घटना के घटित होने के बाद जब उसकी जानकारी संबंधित अधिकारी से मांगी गई, तब भी यही जवाब मिला कि अधिकारी चुनाव ड्यूटी में व्यस्त हैं।

चर्चा में इंस्पेक्टर
दिल्ली पुलिस का एक सहायक सब इंस्पेक्टर इन दिनों चर्चा में बना हुआ है। चर्चा इसलिए कि स्थानांतरण और पोस्टिंग में पारदर्शिता के तमाम दावे के बावजूद यह एएसआइ एक ही जिले में बीते 20 सालों से तैनात पाए गए। सीबीआइ ने भ्रष्टाचार की एक शिकायत पर लक्ष्मी नगर से एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया, जिसने अपने साथी एएसआइ के करतूत की पूरी कहानी बयां की। मिली जानकारी में पता चला है कि आरोपी एएसआइ अपने घर के पास एक इंजीनियरिंग की दुकान के नाम पर प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करता था। यहीं से उसका गोरखधंधा भी चल रहा है। सवाल यह है कि वह 20 सालों से एक ही स्थान पर तैनात कैसे रहा और इसकी भनक अधिकारियों को कैसे नहीं लगी? मतलब साफ है कि पारदर्शिता का ढोंग सामने आ गया।
-बेदिल

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