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बिहार तो जीत गया NDA, पर BJP के लिए खड़े हो गए नए चैलेंज, बढ़ा तेजस्वी-RJD का जनाधार, लेफ्ट को भी मिला ‘जीवन दान’; समझें और क्या हैं चुनौतियां

बीजेपी की राज्य कोर ग्रुप की बैठकों में शामिल रहने वाले पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का मानना है कि 'राजद का प्रदर्शन यह बताता है कि गैर-यादव और गरीब हिंदू, भविष्य में राजद के साथ नहीं जाएगा ऐसा सोचना भूल साबित हो सकती है।

bihar, tejasvi yadavतेजस्वी यादव ने कम्युनिस्ट पार्टी को नया जीवन दान दिया है।

बिहार की राजनीति में NDA की वापसी हुई है। नतीजे घोषित होने के बाद निश्चित तौर से यह बीजेपी के लिए एक बड़ा अचिवमेंट है लेकिन सोमवार को शपथ लेने के बाद यह भी साफ हो या है कि साल 2020 में पार्टी को अब किस तरह कि नई चुनौतियों का सामना करना होगा। राज्य की राजनीति से अचानक सुशील मोदी बाहर हो गए और तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी के रुप में बीजेपी ने दो उपमुख्यमंत्री को चुना।

74 सीटें जीतने के बाद बीजेपी बड़ी पार्टी बनी है। लेकिन जदयू के साथ गठबंधन में यह पार्टी का सबसे अच्छा प्रदर्शन नहीं कहा जा सकता। साल 2010 के विधानसभा चुनाव में जदयू के साथ गठबंधन में पार्टी ने 102 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 91 सीटों पर जीत दर्ज की थी।

हालांकि पार्टी के नेता 2020 के चुनाव को साल 2010 से अलग मानते हैं। पार्टी नेताओं का मानना है कि साल 2020 में कोविड-19 रहा जिसने प्रवासी कामगारों पर असर डाला है। पार्टी का मानना है कि एंटी-इनकम्बेंसी और कोविड के बावजूद जनता ने एनडीए पर भरोसा दिखाया और विपक्ष पूरी तरह से नाकाम रहा।

बीजेपी के बड़े नेता यह मानते हैं कि एनडीए ने जितनी कल्पना की थी उससे बड़ा समर्थन राजद और उसके गठबंधन दलों ने जरुर हासिल किया है। इससे यह भी साबित होता है कि गैर-यादव हिंदू मतदाताओं ने दिखाया है कि बीजेपी-जदयू उन्हें हल्के में नहीं ले सकते हैं। जाहिर है पार्टी को इससे सचेत रहना चाहिए।

बीजेपी की राज्य कोर ग्रुप की बैठकों में शामिल रहने वाले पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का मानना है कि ‘राजद का प्रदर्शन यह बताता है कि गैर-यादव और गरीब हिंदू, भविष्य में राजद के साथ नहीं जाएगा ऐसा सोचना भूल साबित हो सकती है।

साल 2010 में राजद का वोट शेयर 19 प्रतिशत था जो इस बार 23 फीसदी है। चुनाव में जब नीतीश कुमार सिकुड़ते जा रहे थे तब बीजेपी ने तुरंत आगे बढ़कर मोर्चा संभाला। महिलाओं और Extremely Backward Caste के योगदान को याद किया और शायद यहीं वजह है कि तारकिशोर प्रसाद औऱ रेणु देवी का नाम आगे बढ़ा गया। बता दें कि तारकिशोर प्रसाद (OBC, कलवर समुदाय) तथा रेणु देवी (EBC, नोनिया समुदाय) से ताल्लुक रखते हैं।

बीजेपी कम्युनिस्ट पार्टी को भी चुनौती की तरह ले रही है। भोजपुर और मगध प्रक्षेत्र के इलाकों में कम्यूनिस्ट पार्टी ने राजद और गठबंधन दलों को काफी मदद की। लालू और उनकी राजनीति ने कम्यूनिस्ट पार्टी को काफी नुकसान पहुंचाया लेकिन उनके बेटे ने कम्यूनिस्ट पार्टी को नया जीवन दान दिया है जो बीजेपी के लिए किसी चुनौती से कम नहीं।

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