ताज़ा खबर
 

Lok Sabha Election 2019: कागजी तमगा, जमीनी ‘स्मार्ट’ होना बाकी है

सत्तर और अस्सी के दशक में देश के सर्वाधिक प्रमुख औद्योगिक शहरों में शुमार किए जाने वाले फरीदाबाद को वर्षों से नई औद्योगिक इकाइयों का इंतजार है। बीते दो दशकों में सरकारें बदलती रहीं, जनप्रतिनिधि बदलते रहे लेकिन इस औद्योगिक नगरी की किस्मत नहीं बदल पाई। शहर को केंद्र की हुकूमत से स्मार्ट सिटी का तमगा भी मिला। लेकिन शहर के हालात बताते हैं कि इसे स्मार्ट बनने के लिए अभी बहुत मेहनत करनी है। मौजूदा सांसद मजबूत मेट्रो रेल नेटवर्क को कामयाबी बताते हैं तो सड़क जाम, सिकुड़ती नागरिक सुविधाएं और प्रदूषण जैसी समस्या पर आम लोगों की नाराजगी है।

Author March 16, 2019 2:37 AM
केंद्र सरकार के मंत्री कृष्णपाल गुर्जर

अजय पांडेय

फरीदाबाद व पलवल जिलों को मिलाकर बने फरीदाबाद संसदीय क्षेत्र की नुमाइंदगी करने वाले केंद्र सरकार के मंत्री कृष्णपाल गुर्जर अपनी उपलब्धियों की फेहरिस्त में एक्सप्रेस वे से लेकर मेट्रो तक के मजबूत नेटवर्क का हवाला देते हैं। स्मार्ट सिटी के मद में केंद्र से 400 करोड़ रुपए मिलने की जानकारी भी साझा करते हैं। वे बताते हैं कि पलवल में स्थापित किए गए श्री विश्वकर्मा कौशल विकास विश्वविद्यालय से क्षेत्र के नौजवानों के लिए रोजगार सृजन का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

उनका यह भी कहना है कि आवागमन के लिए सड़कों व मेट्रो का नेटवर्क बन जाने से उद्योग-धंधों के विकास में भी मदद मिलेगी। अपने ढाई दशक के सियासी सफर की दलील देकर गुर्जर यह भी दावा करना नहीं भूलते के यदि पार्षद से लेकर सांसद व केंद्रीय मंत्री तक की कुर्सी तक वे पहुंचे हैं तो इसकी एक बड़ी वजह यह है कि क्षेत्र का विकास उनकी पहली प्राथमिकता रही है। उनका कहना है कि फरीदाबाद में पासपोर्ट कार्यालय खुल जाने से स्थानीय लोगों को बहुत सहूलियत हो रही है। इसी तरह गुरुग्राम की तर्ज पर फरीदाबाद में भी महानगर विकास प्राधिकरण का गठन किया गया है। शहर को कर्मचारी राज्य बीमा अस्पताल व मेडिकल कॉलेज की सौगात भी मिली है।

दिल्ली की सीमाएं तीन ओर से हरियाणा को छूती हैं। राजधानी के दक्षिणी किनारे से बदरपुर के बाद फरीदाबाद की सीमा शुरू हो जाती है। बसावट की बात करें तो देश के बंटवारे के बाद पाकिस्तान से आए लोगों की एक बड़ी आबादी फरीदाबाद में आकर बसी। दूसरी ओर उद्योग-धंधों की स्थापना की वजह से देश के अलग-अलग हिस्सों, विशेषकर पूर्वांचल से भी बहुत बड़ी संख्या में लोग रोजी-रोटी की तलाश में यहां आकर बस गए। यहां पर घनी आबादी वाली एनआईटी की कालोनियां हैं तो हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) द्वारा बसाए गए नयनाभिराम हरियाली व वास्तुकला की नुमाइश करती इमारतों वाले सेक्टर मिल जाएंगे। दूसरी ओर ग्रामीण अंचल की आबादी है जो वस्तुत: क्षेत्र के मूल बाशिंदों की बस्ती है। हालांकि वक्त के साथ इस संसदीय क्षेत्र का शहरीकरण तेजी से हो रहा है और इसके तहत आने वाले नौ संसदीय क्षेत्रों में से पांच विधानसभा क्षेत्र शहर और कस्बाई रंग में रंगे नजर आते हैं।

1977 के लोकसभा चुनाव में चली जनता पार्टी की आंधी से लेकर 2014 तक के 11 संसदीय चुनावों में छह बार कांग्रेस, चार बार भाजपा व एक बार जनता पार्टी को फरीदाबाद संसदीय सीट पर सफलता मिल चुकी है। पिछले चुनाव में वर्तमान सांसद कृष्णपाल गुर्जर ने कांग्रेस के अपने प्रतिद्वंद्वी अवतार सिंह भड़ाना को 4 लाख, 66 हजार के बड़े अंतर से मात दी। दीगर है कि भड़ाना उससे पहले 2004 और 2009 के संसदीय चुनावों में लगातार दो जीत दर्ज करने में सफल रहे थे और उससे पहले भी एक बार वे इस संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। और तो और सूबे के चर्चित मुख्यमंत्रियों में शुमार भजनलाल भी इस संसदीय क्षेत्र से लोकसभा का सफर तय कर चुके हैं।

वादे जो किए
उद्योग धंधों का विकास
मेट्रो नेटवर्क का विस्तार
शिक्षा के लिए बेहतर संस्थानों की स्थापना
सड़कों का सुदृढ़ीकरण
फरीदाबाद-गुरुग्राम के बीच बेहतर आवागमन की व्यवस्था

वादे जो वफा न हुए
पलवल के मित्रोल हाइवे से टोल टैक्स हटाने का वादा पूरा नहीं हो पाया
मंझावली पुल का निर्माण अब भी अधूरा पड़ा है
बीते पांच वर्षों में फरीदाबाद में कोई नया उद्योग नहीं लग पाया
आदर्श गांव की स्थिति में सुधार नहीं हुआ
सड़कों को लेकर भी लोगों निराशा है

क्या रही शिकायतें
प्रदूषण की समस्या से शहर की नाक में दम
अनियोजित शहरीकरण से नागरिक सुविधाओं पर लगातार बढ़ रहा है दबाव
पर्याप्त संख्या में रोजगारों का नहीं हो पा रहा सृजन
गुरुग्राम के मुकाबले लगातार पिछड़ रहा है शहर

सांसद के दावे
अपने कार्यकाल में क्षेत्र को चमकाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कुंडली मानेसर-पलवल एक्सप्रेस-वे का निर्माण पूरा हो जाने से लोगों को काफी सुविधा हुई है, वहीं मेट्रो का बल्लभगढ़ तक विस्तार हो जाने से भी दिल्ली व आसपास के क्षेत्रों से इस संसदीय क्षेत्र के बीच आवागमन आसान हुआ है। एक अन्य राष्टÑीय राजमार्ग दिल्ली में सराय काले खां से बल्लभगढ़ तक बनाया जा रहा है। इसके बन जाने से भी मथुरा रोड से गुजरने वालों को सहूलियत होगी। अपने 25 सालों के राजनीतिक सफर में फरीदाबाद को विकास के रास्ते पर आगे ले जाने का हर मुमकिन प्रयास किया है।
-कृष्णपाल गुर्जर, सांसद

विपक्ष के बोल
आज सांसद व केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर जिन परियोजनाओं के नाम गिना रहे हैं, वे असल में कांग्रेस की यूपीए सरकार के जमाने में मेरी पहल पर शुरू की गई थी। दरअसल, सांसद गुर्जर यूपीए सरकार के जमाने में शुरू की गई विकास परियोजनाओं के फीते काटने का काम कर रहे हैं। सांसद ने आदर्श गांव के तौर पर जिस तिलपत गांव को गोद लिया था, कोई जाकर उसकी स्थिति देख ले तो पता लग जाएगा कि विकास के दावे कितने खोखले हैं।
– अवतार भड़ाना, कांग्रेस

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App