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मप्र: विधानसभा चुनावों में बीजेपी और कांग्रेस ने दिए पंचायत और निकाय पदाधिकारियों को टिकट

मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनावों के मद्देनजर बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दलों ने पंचायत और निकायों से राजनीति शुरू करने वाले करीब आधा दर्जन नेताओं पर विश्वास जताया है। दोनों ही पार्टियों ने पंचायत और निकाय पदाधिकारियों को विधानसभा चुनावों में टिकट दिया है।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है।

मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनावों के मद्देनजर बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दलों ने पंचायत और निकायों से राजनीति शुरू करने वाले करीब आधा दर्जन नेताओं पर विश्वास पर जताया है। दोनों ही पार्टियों ने ऐसे नेताओं को विधानसभा चुनावों में टिकट दिया है। पंचायत और निकाय से राजनीति शुरू की थी। ऐसे भी कई नेता है जो टिकट की दौड़ में पीछे रह गए। उनकी जगह पार्टी ने किसी और को टिकट दे दिया। हालांकि बीजेपी के मुकाबले कांग्रेस ने ऐसे स्थानीय नेताओं को ज्यादा टिकट दिया है।

प्रदेश की राजनीति में पदार्पण के लिए नगर, जिला, जिला पंचायत और नगरीय निकायों का रास्ता आसान माना जाता है लेकिन इस राह में बहुत कम ही लोग सफलता प्राप्त कर पाते है। मध्यप्रदेश में इसबार विधानसभा चुनाव के लिए ऐसे ही करीब 2 दर्जन से ज्यादा जनप्रतिनिधियों ने दांव खेला था। जिसमें करीब आधा दर्जन जनप्रतिनिधियों को विधानसभा का टिकट मिल गया और विधानसभा चुनाव में  वे अपनी पार्टी के तरफ से उम्मीदवार होंगे।

वैसे तो इस बार के चुनावों में दोनों दलों ने पंचायत और नगरीय निकाय स्तरीय प्रतिनिधियों को महत्व दिया लेकिन राज्य में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने ज्यादा लोगों को पार्टी का टिकट दिया है। बात अगर बीजेपी की जाये तो पार्टी ने विदिशा से मुकेश टंडन को प्रत्याशी बनाया है। टंडन नगर पालिका अध्यक्ष है। उनका मुकाबला कांग्रेस के शंशाक भार्गव से है जो पिछले तीन बार से हारते आ रहे है। इसी तरह सपा से बीजेपी में आये प्रह्लाद लोधी को भी पार्टी ने पवई सीट से टिकट दिया है। इनका मुकाबला यहाँ तीन बार से विधायक मुकेश नायक से है।

कांग्रेस पार्टी ने सीहोर की आष्टा सीट से जिला पंचायत सदस्य गोपाल इंजीनियर को प्रत्याशी बनाया है। सुसनेर से जिला पंचायत सदस्य महेंद्र सिंह परिहार को, चर्चित विधानसभा सीट गोविंदपुरा से पार्षद गिरीश शर्मा को टिकट दिया है और रीवा सीट से पार्टी ने जिला पंचायत अध्यक्ष अभय मिश्रा को चुनावी मैदान में उतारा है। हालाँकि कई पंचायत प्रतिनिधियों की विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा धरी की धरी रह गयी। पार्टी में दावेदारी के बाद भी इन्हे टिकट नहीं मिल सका। जिन्हे पार्टी का टिकट नहीं मिला है ऐसे नेताओं को दोनों पार्टियों ने अपनी पार्टी के हित में काम करने की सलाह दी है।

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