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Madhya Pradesh Election: टिकट न मिलने से नाराज नेता ने खाया जहर, लगाया अनदेखी का आरोप

पिछले 46 सालों से कांग्रेस पार्टी में रहे नेता प्रेमसिंह कुशवाह ने टिकट न मिलने के कारण जहर की गोली खाकर आत्महत्या का प्रयास किया है। प्रेमसिंह कांग्रेस पार्टी के द्वारा मदन कुशवाह को टिकट दिए जाने से नाराज चल रहे थे।

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (फाइल फोटो)

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस पार्टी के द्वारा प्रदेश की सभी सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा की जा चुकी है। लेकिन पार्टी के अंदर अभी आपसी खींचतान कम नहीं हुई है। ताजा मामला ग्वालियर ग्रामीण विधानसभा सीट का है। जहाँ पिछले 46 सालों से कांग्रेस पार्टी में रहे नेता प्रेम सिंह कुशवाह ने टिकट न मिलने के कारण जहर की गोली खाकर आत्महत्या का प्रयास किया है। प्रेमसिंह कांग्रेस पार्टी के द्वारा मदन कुशवाह को टिकट दिए जाने से नाराज चल रहे थे। इसके पहले ग्वालियर दक्षिण से पार्टी के उम्मीदवार प्रवीण पाठक को टिकट देने के बाद विरोध के सुर उठे थे।

बता दें कि कांग्रेस पार्टी के पुराने नेता प्रेमसिंह कुशवाह ग्वालियर ग्रामीण सीट से टिकट की आस लगाए हुए थे। लेकिन आखिरी समय में टिकट मदन कुशवाह को दे दिया गया जिससे नाराज चल रहे प्रेमसिंह ने आज जहर की गोलियां खाकर आत्महत्या का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि मदन कुशवाह बाहरी आदमी है जो बीएसपी से कांग्रेस में शामिल हुए है, पार्टी चाहे तो उनके अलावा किसी और टिकट दे दे लेकिन मदन कुशवाह का टिकट काट दे। प्रेमसिंह ने कहा कि वो पिछले 46 साल से पार्टी की सेवा कर रहे है।

आत्महत्या का प्रयास करने से पहले प्रेमसिंह ने कहा कि वो बहुत दुखी है, 5 दिनों से मुझे नींद नहीं आ रही। मुझे समझ नहीं आ रहा कि मै क्या करूँ ? दुखी प्रेमसिंह ने कहा कि इसलिए मै आत्महत्या करने के लिए चूहे मारने की गोलियां खा रहा हूँ। जहर खाते ही प्रेमसिंह की हालत बिगड़ने लगी तो नजदीक खड़े समर्थकों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया जहाँ उनका इलाज किया जा रहा है।

गौरतलब है कि इसके पहले गुरूवार को ग्वालियर दक्षिण से प्रवीण पाठक को कांग्रेस का उम्मीदवार बनाये जाने के बाद पार्टी के लोगों ने जमकर विरोध किया था। लोगों ने पार्टी दफ्तर में पोस्टर बैनर फाड़ जमकर नारेबाजी की थी। यहीं नहीं नाराज कार्यकर्ताओं ने प्रवीण पाठक की फोटो पर कालिख तक पोत दी थी। इसके घटना के बाद प्रवीण पाठक को दिल्ली बुलाया गया था।

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