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मध्यप्रदेश: मजबूत गढ़ में अपनों से ही घिरी भाजपा, हो सकता है बड़ा नुकसान

मध्यप्रदेश में पिछले 15 सालों से सत्ता में काबिज बीजेपी को उसके मजबूत गढ़ माने जाने वाले मालवा-निमाड़ क्षेत्र में अपने बागी नेताओं के कारण चुनौतियों का सामना कर पड़ रहा है। पार्टी ने पिछली बार यहां 66 सीटों में से 57 सीटों पर जीत हासिल की थी।

Author Updated: November 12, 2018 2:05 PM
प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

मध्यप्रदेश में पिछले 15 सालों से सत्ता में काबिज बीजेपी को उसके मजबूत गढ़ माने जाने वाले मालवा-निमाड़ क्षेत्र में चुनौतियों का सामना कर पड़ रहा है। इस क्षेत्र में बीजेपी के खिलाफ जहां बागियों ने झंडा बुलंद कर रखा है तो वहीं ख़राब प्रदर्शन के कारण टिकट पाने से वंचित रहने वाले कई विधायक निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरकर अपनी ही पार्टी के खिलाफ हमलावर हो रहे है। पश्चिमी निमाड़ में 6 सीट पर 5 बागी उम्मीदवार पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों के खिलाफ ताल ठोक रहे रहे है तो शाजापुर-आगर की सभी 5 सीटों पर पार्टी के बागी मुसीबत खड़े कर रहे है। लगभग यही हाल उज्जैन, खरगोन धार आदि में भी देखने को मिल रहा है, जहां पार्टी के खिलाफ अपने ही बगावती सुर बुलंद किये हुए है।

पिछले चुनाव में बीजेपी को मालवा-निमाड़ क्षेत्र से 66 में से 57 सीटों पर जीत मिली थी। कांग्रेस पार्टी यहां 9 सीटों पर ही जीत दर्ज कर पायी थी। उज्जैन संभाग की 29 सीट में कांग्रेस सिर्फ 1 सीट ही जीत सकी थी। बीजेपी को इस बार के विधानसभा चुनावों में अपने नेताओं द्वारा इतने बगावती तेवरों की उम्मीद नहीं रही होगी जहां टिकट ना मिलने से नाराज नेताओं ने पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ ही मोर्चा खोलकर चुनाव में उतर गए है।

झाबुआ में पार्टी ने जीएस डामोर को प्रत्याशी बनाया तो वर्तमान विधायक शांतिलाल बिलवाल ने निर्दलीय ही चुनाव लड़ने का एलान कर नामाकंन कर दिया। अलिराज पुर में लगातार चौथी बार विधायक बनने के इरादे से बीजेपी के नागर सिंह चौहान ने नामाकंन भरा तो बीजेपी के ही वकील सिंह ठकराला ने नामांकन दाखिल कर मुश्किलें बढ़ा दी।

बात अगर शाजापुर- आगर क्षेत्र की करे तो यहां की सभी 5 सीटों पर बीजेपी के बागी अपनी ही पार्टी के लिए मुसीबत बन कर खड़े है। शाजापुर में विधायक अरुण भीमावत की उम्मीदवारी का विरोध करते हुए जेपी मंडलोई मैदान में आ गए है, शुजालपुर से बागी राजेंद्र सिंह राजपूत पार्टी के घोषित उम्मीदवार के खिलाफ मैदान में आ गए है, कालापीपल से बीजेपी के जिला पंचायत सदस्य नवीन भी पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ मैदान में है।

यही हाल आगर में है जहां सांसद मनोहर ऊंटवाल की उम्मीदवारी का विरोध करते हुए राधू सिंह चंद्रावत ने चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। सर्वाधिक हलचल सुसनेर विधानसभा में देखने को मिल रही है। जहां मौजूदा विधायक मुरलीधर पाटीदार की उम्मीदवारी का कड़ा विरोध पूर्व विधायक संतोष जोशी, फूलचंद वेदिया और भारतीय किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष तीनो मिलकर कर रहे हैं।

पश्चिमी निमाड़ की 6 सीटों पर बीजेपी के 5 बागी उम्मीदवार चुनावी समर में ताल ठोंक रहे है तो वही धार क्षेत्र की 7 सीटों पर 3 में बीजेपी अपने ही बागी उम्मीदवारों से परेशान है। बदनावर विधानसभा में लोकल प्रत्याशी की मांग नही माने जाने से नाराज वरिष्ठ नेता और मंडी बोर्ड के पूर्व डायरेक्टर राजेश अग्रवाल ने मोर्चा खोल दिया है। रविवार को बीजेपी राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय उन्हें समझाने का प्रयास किया था। लेकिन अग्रवाल का कहना है कि पिछले चुनावों में भी इसी तरह आश्वासन देकर टिकट नहीं दिया गया था। उधर उज्जैन की 7 सीटों में 2 पर विरोध जारी है। जाहिर है बीजेपी के अंदर इस आपसी खींचतान से मालवा-निमाड़ क्षेत्र में पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है। पार्टी ने पिछली बार यहां 66 सीटों में से 57 सीटों पर जीत हासिल की थी।

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