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मध्य प्रदेश: रोजी-रोटी पर हावी ‘धर्म’ और ‘राष्ट्रवाद’, BJP के रिवर्स स्विंग पर बढ़ी कांग्रेस की मुश्किलें

दिग्विजय सिंह अपने आरएसएस विरोध और हिंदू आतंकवाद जैसे मुद्दों पर काफी मुखर रहे हैं। वहीं भाजपा उन पर पाकिस्तान की भाषा बोलने और मुस्लिमों को खुश करने का आरोप लगाती रही है।

bhopal lok sabha electionभोपाल से भाजपा उम्मीदवार प्रज्ञा सिंह ठाकुर और कांग्रेस उम्मीदवार दिग्विजय सिंह। (image source-pti)

मौजूदा लोकसभा चुनावों में भाजपा राष्ट्रवाद के मुद्दे को केन्द्र में रखकर चुनाव लड़ रही है। हालांकि मध्य प्रदेश में इसका असर कुछ ज्यादा ही दिखाई दे रहा है। भाजपा ने बुधवार को मध्य प्रदेश की भोपाल सीट से साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को अपना उम्मीदवार बनाने का ऐलान कर चुनाव को और रोचक बना दिया है। बता दें कि भोपाल से कांग्रेस के टिकट पर राज्य को 2 बार मुख्यमंत्री रहे और पार्टी के वरिष्ठ और कद्दावर नेता माने जाने वाले दिग्विजय सिंह चुनाव मैदान में हैं। उल्लेखनीय है कि साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर मालेगांव बम विस्फोट मामले में आरोपी हैं और फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। प्रज्ञा ठाकुर इस मामले में 9 साल जेल में रह चुकी हैं। यही वजह है कि इस बार भोपाल सीट पर मुकाबला बेहद ही रोमांचक होने वाला है।

धर्म और राष्ट्रवाद का मुद्दा छायाः मध्य प्रदेश में धर्म और राष्ट्रवाद का मुद्दा ही छाया हुआ है और रोजी-रोटी का आधारभूत मुद्दा कहीं पीछे छूट गया है। कृषि संकट, नौकरियां, इंडस्ट्री की कमी जैसे मुद्दों पर तो फिलहाल कोई बात भी नहीं कर रहा है। दिग्विजय सिंह अपने आरएसएस विरोध और हिंदू आतंकवाद जैसे मुद्दों पर काफी मुखर रहे हैं। वहीं भाजपा उन पर पाकिस्तान की भाषा बोलने और मुस्लिमों को खुश करने का आरोप लगाती रही है। अब भाजपा ने भोपाल से साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को चुनाव मैदान में उतारकर दिग्विजय सिंह को धर्म और राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों पर घेरने की रणनीति बनायी है।

हाल ही में बालाकोट एअर स्ट्राइक पर भी दिग्विजय सिंह ने सबूत मांगे थे। वहीं दूसरी तरफ भाजपा बालाकोट एअर स्ट्राइक को अपनी सरकार की उपलब्धि के तौर पर पेश कर रही है। इकॉनोमिक टाइम्स. कॉम ने भोपाल चुनाव को लेकर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसमें बताया गया है और अधिकतर लोग इस बात से सहमत होंगे कि मध्य प्रदेश भगवा पार्टी का गढ़ है। पिछले लोकसभा चुनावों में यहां कि 29 लोकसभा सीटों में से 27 पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी। यही वजह है कि भाजपा जहां धर्म और राष्ट्रवाद के मुद्दे पर भोपाल चुनाव लड़ सकती हैं, वहीं कांग्रेस भी मध्य प्रदेश में धर्म को साथ लेकर चल रही है। कांग्रेस इसके साथ ही राज्य में बनी अपनी सरकार के 100 दिनों के कार्यकाल और अपने वादों जैसे किसानों का कर्ज माफ, बिजली बिल कम करने आदि को पूरा करने के आधार पर जनता के बीच जाएगी।

मोदी फैक्टरः मध्य प्रदेश में पीएम मोदी की लोकप्रियता भी कमाल की है। यही वजह है कि यहां मोदी फैक्टर भी बेहद अहम है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की कई सीटों पर लोग भाजपा उम्मीदवार से खुश नहीं है, लेकिन इसके बावजूद वह पीएम मोदी के समर्थन में भाजपा को ही वोट करने की बात कह रहे हैं। मध्य प्रदेश की खांडवा सीट पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष रहे अरुण यादव चुनाव मैदान में हैं। जहां उनका मुकाबला भाजपा के नंद कुमार सिंह के साथ हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि स्थानीय लोगों में भाजपा उम्मीदवार के खिलाफ नाराजगी है, लेकिन मोदी फैक्टर यहां ऐसा है कि लोग नारा दे रहे हैं कि ‘नंदू एक मजबूरी है, मोदी का आना जरुरी है।’

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