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भाजपा में भी कम नहीं परिवारवादः मध्य प्रदेश के मौजूदा 165 विधायकों में 20 के नाम इस फेहरिस्त में, पढ़िए उनका इतिहास और प्रतिक्रिया

देश की राजनीति में अक्सर परिवारवाद का मुद्दा उठता है। लेकिन कई दलों में इसका बोलबाला है। कांग्रेस पर आरोप लगाने वाली भाजपा भी अछूती नहीं है।

मध्य प्रदेश भाजपा में परिवारवादः सुरेंद्र पटवा और दीपक जोशी (फोटोः इंडियन एक्सप्रेस और सोशल मीडिया)

लोकतंत्र में परिवारवाद को लेकर अक्सर राजनीतिक दल एक-दूसरे को निशाने पर लेते हैं। लेकिन आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो लगभग सभी पार्टियों का हाल एक जैसा ही है। कई नेताओं की कई पीढ़ियां विधायक, सांसद और मंत्री तक बनती रही है। इसी के चलते हर चुनाव के दौरान बगावत भी जमकर होती है। कांग्रेस पर परिवारवाद का आरोप लगाने वाली भाजपा का हाल भी काफी हद तक उसके जैसा ही है। मध्य प्रदेश की मौजूदा विधानसभा में भाजपा के 165 विधायक हैं। इनमें से 20 ऐसे हैं जिनका परिवार सियासत पुराना रसूखदार है। पढ़िए उनकी जानकारी और परिवारवाद पर प्रतिक्रिया…

1. अर्चना चिटनीसः बुरहानपुर सीट से विधायक चिटनीस के पिता पूर्व स्पीकर बृजमोहन मिश्रा की बेटी हैं। उनका कहना है कि सियासी परिवार से ताल्लुक होने के दो पहलू हैं। इससे आपको राजनीतिक पहचान तो मिल जाती है लेकिन आपसे अपेक्षाएं भी ज्यादा होती हैं।

2. मालिनी गौड़ः इंदौर की महापौर मालिनी इस बार इंदौर से ही विधानसभा चुनाव भी लड़ रही हैं। उनके पति दिवंगत भाजपा नेता लक्ष्मण सिंह गौड़ शिवराज सरकार में मंत्री थे। उनका कहना है, ‘मुझे अपने पति के अच्छे कामों का फायदा मिला है। मुझे अभी भी उनसे ताकत और प्रेरणा मिलती है।’

3. गायत्री राजे पवारः देवास की विधायक गायत्री के पति दिवंगत तुकोजीराव पवार शिवराज सरकार में मंत्री थे। उनका कहना है कि आप जो काम करते हो उसी का असर होता है। आप लोगों के साथ जुड़े हुए नहीं हैं तो उसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।

4. जालम सिंह पटेलः राज्यमंत्री जालम सिंह के बड़े भाई प्रहलाद पटेल दमोह से भाजपा सांसद हैं। वे केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं। नरसिंहपुर से विधायक जालम सिंह का कहना है कि मुझे अपने भाई से मदद मिली लेकिन व्यक्तिगत कामकाज का असर पड़ता है।

5. देवेंद्र वर्माः खंडवा से विधायक देवेंद्र वर्मा पूर्व मंत्री दिवंगत किशोरीलाल वर्मा के बेटे हैं। वे कहते हैं कि कुछ लाभ होता है लेकिन उन्होंने खुद भी काफी मेहनत की है।De

6. हेमंत खंडेलवालः बैतूल से विधायक हेमंत पूर्व भाजपा सांसद दिवंगत विजय खंडेलवास के बेटे हैं। वे कहते हैं कि किसी के बेटे के तौर पर आपको पहचान मिल जाती है लेकिन फिर लोगों की आपसे उम्मीद भी बढ़ जाती है।

7. अशोक रोहाणीः जबलपुर कैंट से विधायक अशोक पूर्व स्पीकर दिवंगत ईश्वरदास रोहाणी के बेटे हैं। पिता के बनाए रास्तों पर चलना मुश्किल होता है क्योंकि लोग उनकी ही तरह मुझसे भी उम्मीद करते हैं।

8. चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदीः भाजपा में आए पूर्व कांग्रेस विधायक राकेश के पिता दिवंगत चौधरी दिलीप सिंह भाजपा से विधायक थे। उनके छोटे भाई चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी भी फिलहाल मेहगांव से विधायक हैं। मौजूदा चुनाव में राकेश भिंड से प्रत्याशी हैं। वे कहते हैं कि जब आप सियासी परिवार से होते हैं तो पार्टी के अंदर और बाहर लोग आपसे जलते हैं।

9. दीपक जोशीः हाटपिपलिया से विधायक दीपक शिवराज सरकार में राज्यमंत्री भी हैं। उनके पिता कैलाश जोशी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और सांसद भी रहे हैं। उनका कहना है कि मैं कैबिनेट मंत्री बनता लेकिन पार्टी के अंदर प्रतिद्वंद्वियों ने मेरे पिता को भी लड़ाई में शामिल कर लिया।

10. विश्वास सारंगः नरेला से विधायक सारंग शिवराज सरकार में राज्यमंत्री रहे हैं। उनके पिता कैलाश सारंग भी भाजपा के सांसद थे। मैं अपनी सफलता का श्रेय पिता की कड़ी मेहनत को देता हूं लेकिन पुराने प्रतिद्वंद्वी भी रुकावटें डालते हैं।

11. अनिता नायकः पृथ्वीपुर से विधायक अनिता पूर्व मंत्री दिवंगत सुनील नायक की बेटी हैं। इस बार वे चुनाव नहीं लड़ रही हैं। उनका कहना है कि राजनीतिक परिवार से होने से चीजें बहुत आसान हो जाती है। आपको पार्टी कार्यकर्ताओं और जनता का साथ मिलता है और एक सीट तैयार मिलती है।

12. नीना वर्माः धार की विधायक नीना वर्मा के पति विक्रम वर्मा पार्टी की घोषणा पत्र समिति के चेयरमैन हैं। विक्रम वर्मा मंत्री और राज्यसभा सांसद भी रह चुके हैं। उनका कहना है कि फायदा तो मिलता है लेकिन लोग आपसे भी उम्मीद करते हैं कि आप भी उतने ही जानकरा और सक्षम हों।

13. रामप्यारे कुलस्तेः निवास विधायक रामप्यारे पूर्व केंद्रीय मंत्री और मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते के छोटे भाई हैं। उनका कहना है कि सियासी परिवार से होने से मदद तो मिलती है। लेकिन लोग आपसे अपेक्षाएं भी रखते हैं।

14. जितेंद्र गहलोतः आलोट से विधायक जितेंद्र राज्यसभा सांसद और केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत के बेटे हैं। उनका कहना है, ‘यह मेरे पिता की कर्मभूमि है तो स्वाभाविक रूप से मुझे फायदा मिलेगा। लेकिन मैंने खुद भी काफी मेहनत की है।’

15. संजय पाठकः विजयराघवगढ़ से विधायक संजय कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे सत्येंद्र पाठक और कांटी से महापौर रहीं निर्मला पाठक के बेटे हैं। संजय कांग्रेस में विधायक थे लेकिन 2014 में उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया और भाजपा के टिकट पर उपचुनाव जीता। उन्होंने कहा मुझे अपने पिता की अच्छी छवि का फायदा मिला। मैं उनकी विरासत को आगे बढ़ा रहा हूं।

16. सुरेंद्र पटवाः भोजपुर से विधायक सुरेंद्र पटवा शिवराज सरकार में मंत्री भी हैं। वे राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत सुंदरलाल पटवा के बेटे हैं। परिवारवाद पर वे सवालिया लहजे में कहते हैं जब सीए का बेटा सीए और डॉक्टर का बेटा डॉक्टर बन सकता है तो राजनेता का बेटा सियासत में करियर क्यों नहीं बना सकता?

17. यशोधरा राजे सिंधियाः शिवपुरी से विधायक और शिवराज सरकार में मंत्री यशोधरा पूर्व भाजपा सांसद दिवंगत विजया राजे सिंधिया की बेटी हैं। दिवंगत माधवराव सिंधिया उनके भाई थे। वहीं राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे उनकी बहन और ज्योतिरादित्य सिंधिया उनके भतीजे हैं। उनका कहना है कि आपका काम ही आपको वोट दिला सकता है, नाम नहीं।

18. ओमप्रकाश सकलेचाः जावद विधायक ओमप्रकाश सकलेचा के पिता दिवंगत वीरेंद्र कुमार सकलेचा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। जावद सीट से ज्यादातर ये पिता-पुत्र ही विधायक रहे हैं। उनका कहना है कि शुरुआत में आपको कम काम करने के बावजूद मैदान तैयार मिलता है लेकिन फिर आपको पारंपरिक प्रतिद्वंद्वियों का भी सामना करना पड़ता है।

19. राजेंद्र पांडेयः जावरा से विधायक राजेंद्र के पिता दिवंगत डॉक्टर लक्ष्मीनारायण पांडेय मंदसौर लोकसभा सीट से आठ बार सांसद रहे हैं। उनका कहना है कि सियासत में कोई भी अंगुली पकड़कर नहीं ला सकता। आपको अपना मैदान खुद तैयार करना पड़ता है।

20. मंजू दादूः नेपानगर से विधायक मंजू दिवंगत राजेंद्र दादू की बेटी हैं। मंजू ने अपने पिता के निधन के चलते खाली हुई सीट पर 2016 में उपचुनाव जीता था।

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