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बंपर वोट की उम्मीद में 2019 चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी सरकार चल सकती है ये बड़े दांव

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पहले ही कह चुके हैं कि अगर मोदी सरकार की योजनाओं से फायदा ले रहे 22 करोड़ लाभार्थियों को पाले में कर लिया जाए तो 2014 से भी बड़ी जीत 2019 में प्राप्त कर सकते हैं।

Author December 19, 2018 2:25 PM
सुस्त होती भारतीय अर्थव्यवस्था मोदी सरकार के लिए 2019 में परेशानी का सबब बन सकती है. (फोटो सोर्स: पीटीआई )

पांच राज्यों के हालिया विधान सभा चुनाव नतीजों ने भाजपा को 2019 का लोकसभा चुनाव के लिए सतर्क कर दिया है। लिहाजा, केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ नारे के सहारे अब रूरल-सोशल इंजीनियरिंग पर विशेष ध्यान दे रही है। इसके तहत सरकार ग्रामीण आबादी को अधिक से अधिक लाभ पहुंचाने की दिशा में कारगर कदम उठाने जा रही है। कुछ मामलों में तो सरकार ने फैसला ले लिया है और उसका ऐलान होना मात्र बाकी है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पहले ही कह चुके हैं कि अगर मोदी सरकार की योजनाओं से फायदा ले रहे 22 करोड़ लाभार्थियों को पाले में कर लिया जाए तो 2014 से भी बड़ी जीत 2019 में प्राप्त कर सकते हैं। बता दें कि हिन्दी पट्टी के तीन राज्यों के वोटिंग पैटर्न से साफ होता है कि ग्रामीण इलाकों में भाजपा कमजोर हुई है। ऐसे में सरकार ने बचे हुए कार्यकाल में फिर से ग्रामीण मतदाताओं को लुभाने के मकसद से कुछ अहम योजनाएं बनाई हैं या मौजूदा योजनाओं का विस्तार किया है।

किसानों का कर्ज माफ करने की बड़ी तैयारी: कांग्रेस ने तीनों हिन्दी पट्टी के राज्यों में विधान सभा चुनाव के दौरान किसानों की कर्जमाफी का न सिर्फ मुद्दा उठाया था बल्कि वादा भी किया था। सरकार बनते ही कांग्रेस सरकारों ने किसानों का कर्ज माफ कर दिया है। इससे केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर दबाव बढ़ गया है। लिहाजा, माना जा रहा है कि मोदी सरकार जल्द ही कांग्रेस पर बढ़त बनाने और करीब 26.3 करोड़ ग्रामीण किसानों को फायदा पहुंचाने के लिए बड़ी कर्जमाफी का एलान कर सकती है। मंत्रालय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक केंद्र सरकार 2019 के चुनाव से पहले चार लाख करोड़ रुपये का किसान कृषि ऋण माफ करने की योजना पर काम कर रही है। बता दें कि 2009 के आम चुनाव से पहले यूपीए सरकार ने साल 2008 में करीब 72,000 करोड़ रुपये का किसान कर्ज माफ किया था। इसके बाद 2009 में मनमोहन सिंह सरकार की वापसी हुई थी। माना जाता है कि मौजूदा समय में किसान भाजपा से नाराज है।

99 फीसदी सामान पर 18% से कम जीएसटी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के मध्यम और निम्न-मध्यम वर्ग को बड़ी राहत देने का बड़ा एलान किया है। सरकार का कहना है कि 99 फीसदी सामानों को 18 फीसदी या उससे कम जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) के दायरे में लाने की योजना पर काम चल रहा है। इससे 99 फीसदी वस्तुओं के दाम कम हो जाएंगे। माना जा रहा है कि 22 दिसंबर को होनेवाली जीएसटी काउंसिल की बैठक में इस पर फैसला हो सकता है। फिलहाल कुल 1378 सामानों की सूची में 39 पर 28 फीसदी टैक्स लग रहा है। मोदी ने ऐसे समय में यह ऐलान किया है जब जीएसटी कलेक्शन इस वित्त वर्ष के लिए केंद्रीय और राज्य सरकारों के राजस्व लक्ष्यों को पूरा करने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये का मासिक औसत नुकसान हुआ है।

सभी राशन कार्डधारियों को उज्ज्वला गैस कनेक्शन: मोदी सरकार ने एलान किया है कि अब राशन कार्ड धारियों को भी उज्ज्वला गैस कनेक्शन मुफ्त दिए जाएंगे। अभी तक योजना का लाभ केवल एससी-एसटी और ओबीसी वर्ग को ही दिए जाने पर कार्य चल रहा था लेकिन अब समाज के सभी वर्गों के लोग जिनके पास राशन कार्ड होगा, वो मुफ्त में कनेक्शन ले सकेंगे। हालांकि, पहले की तरह राशन कार्ड में परिवार की मुखिया महिला के नाम पर ही इस योजना का लाभ दिया जाएगा। मोदी सरकार ने योजना का विस्तार कर 2019 के अंत तक करते हुए लाभार्थियों का लक्ष्य पांच करोड़ से बढ़ाकर आठ करोड़ कर दिय है। बता दें कि देश में 9.27 करोड़ राशन कार्ड धारक हैं। नए नियम के तहत एक करोड़ से ज्‍यादा लोगों को फा.यदा पहुंच सकेगा।

एनपीएस में 4% योगदान बढ़ाया, ग्रैच्यूटी में राहत: मोदी सरकार ने हाल ही में नई पेंशन योजना (एनपीएस) में सरकार का योगदान 10 फीसदी से बढ़ाकर 14 फीसदी कर दिया है, जबकि कर्मचारी पहले से ही 10 फीसदी का योगदान करते रहेंगे। इससे करोड़ों लोगों को पेंशन फायदा होगा। अब मोदी सरकार ग्रैच्यूटी का लाभ लेने की समय सीमा पांच साल से घटाकर तीन साल करने पर विचार कर रही है और नियमों में बदलाव करने जा रही है ताकि अधिक से अधिक संख्या में नौकरी-पेशा लोगों को फायदा हो सके। इसके लिए ग्रेच्युटी एक्ट 1972 में बदलाव किए जाएंगे। पांच साल से भी कम समय के कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे कर्मियों को भी ग्रेच्युटी के दायरे में लाने की विचार सरकार कर रही है।

आदिवासी समुदाय के लिए एकलव्य स्कूल: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने ‘सबका साथ, सबका विकास’ नारे के तहत करीब देश की 8.6 फीसदी अनुसूचित जनजाति की आबादी में शिक्षा की अलख जगाने के लिए नवोदय विद्यालय की तर्ज पर आवासीय एकलव्य स्कूल खोलने का फैसला किया है। योजना के मुताबिक जिन प्रखंडों में एसटी समुदाय की आबादी 50 फीसदी या कम से कम 20,000 होगी, वहां ऐसे स्कूल खोले जाएंगे। आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने हाल ही में इसके लिए 2243.03 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। ये स्कूल जनजातीय मंत्रालय के तहत एक ऑटोनोमस बॉडी के तहत काम करेंगे।

गुड गवर्नेंस और विकास का संदेश: इनके अलावा सरकार ग्रामीण इलाकों में एक करोड़ और शहरी इलाकों में 1.2 करोड़ लोगों को सस्ते आवास देने पर तेजी से काम कर रही है। ताकि सरकारी की विकास योजनाओं में इन्हें भी भागीदार बनाया जा सके। पीएम नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (17 दिसंबर) को ही साफ किया है कि पिछले दो वर्षों में दिवालिया कानून के तहत सरकार ने तीन लाख करोड़ रुपये रिकवर किए हैं। इसके साथ उन्होंने बैंक का कर्ज नहीं चुकाने वालों और आर्थिक भगोड़ों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को भी मजबूत करने, जीडीपी बढ़ाने, राजकोषीय घाटा कम करने पर भी काम कर रही है ताकि आमजन से लेकर देश-विदेश तक यह संदेश जा सके कि सरकार आर्थिक मोर्चे पर मजबूत है।

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