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MCD चुनाव: पटपड़गंज में आप, कृष्णानगर में भाजपा और गांधीनगर में कांग्रेस की प्रतिष्ठा चुनौती पर

दिल्ली नगर निगम चुनावों में पूर्वी दिल्ली की तीन विधानसभा सीटों के क्षेत्रों में जीत को लेकर भाजपा, कांग्रेस और आप के बड़े नेताओं की साख दांव पर है।

Author नई दिल्ली | April 18, 2017 3:29 AM
Delhi, Municipal Corporation, Elections, huslte, enrollment, aap, bjp, election commmisionइस साल दिल्ली नगर निगम चुनाव होने हैं। (प्रतीकात्मक चित्र)

आशीष दुबे 

दिल्ली नगर निगम चुनावों में पूर्वी दिल्ली की तीन विधानसभा सीटों के क्षेत्रों में जीत को लेकर भाजपा, कांग्रेस और आप के बड़े नेताओं की साख दांव पर है। पटपड़गंज विधानसभा सीट के तहत आने वाले वार्ड मंडावली, विनोद नगर, मयूर विहार और पटपड़गंज पर जीत को ह्यआपह्ण विधायक और दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जा रहा है।  वहीं गांधीनगर विधानसभा सीट के अधीन आने वाले वार्ड शास्त्री पार्क, कांति नगर और रघुवरपुरा का क्षेत्र दिल्ली के पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस पूर्व अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली का है। जहां पर कांग्रेस प्रत्याशियों की हार-जीत को लवली की प्रतिष्ठा से जुड़ी बताई जा रही है। इसी तरह कृष्णानगर विधानसभा के वार्ड अनारकली, घोंडली, कृष्णानगर और गीता कॉलोनी क्षेत्र से 4 बार विधायक रहे डॉ. हर्षवर्धन की साख से जोड़ा जा रहा है। हालांकि डॉ. हर्षवर्धन इस बार चांदनी चौक लोकसभा सीट से चुनाव जीते हैं लेकिन ज्यादातर राजनीतिक कार्यकाल और संपर्क कृष्णानगर क्षेत्र से रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, जब विधायक को इलाके के निगम चुनावों को जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन इस बार हालात थोड़े बदले हुए हैं। जहां भाजपा को पार्टी स्तर पर ही बड़े विरोध को झेलना पड़ रहा है। वहीं, कांग्रेस और ह्यआपह्ण को राजौरी गार्डन सीट पर हार और आकर्षक नाम की कमी का खामियाजा भुगतना पड़ा।

पटपड़गंज विधानसभा सीट के तहत आने वाले वार्डों पर आप प्रत्याशियों के पक्ष में मनीष सिसोदिया पूरी मेहनत कर रहे हैं। मनीष ने विनोद नगर, मंडावली और मयूर विहार फेज-2 से पार्टी उम्मीदवारों के पक्ष में पदयात्रा कर लोगों से समर्थन मांगा। हालांकि विनोद नगर सीट पर भाजपा उम्मीदवार का पर्चा रद्द होने के बाद पार्टी ने निर्दलीय प्रत्याशी राहुल सिंह को समर्थन दिया है। इस घटना को भी ह्यआपह्ण समर्थक अपने हित में मान रहे हैं। हालांकि 2012 में हुए निगम चुनावों में इन चारों वार्डों पर भाजपा जीती थी। इस बार पुराने पार्षदों के टिकट कटने को भी ह्यआपह्ण और कांग्रेस अपने पक्ष में मान रही हैं। वहीं भाजपा समर्थक फिर से चारों वार्डों पर जीत का दावा कर रहे हैं। नोएडा से प्रवासी कार्यकर्ता के रूप में मंडावली पर मनोज गुप्ता और मयूर विहार फेज-2 वार्ड पर विनोद शर्मा दिन-रात बूथ प्रबंधन में योगदान दे रहे हैं।

वर्ष 2012 में कृष्णानगर विधानसभा सीट के तहत पड़ने वाले कृष्णानगर और अनारकली पर भाजपा जीती थी जबकि घोंडली से कांग्रेस और गीता कॉलोनी से निर्दलीय प्रत्याशी ने जीत हासिल की थी। 2012 की जीत के आधार पर ह्यआपह्ण ने घोंडली वार्ड से हाजी शहनवाज को टिकट दिया है। निर्दलीय रूप में रमेश पंडित के कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने की आशंका जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि कृष्णानगर विधानसभा सीट के वार्ड प्रत्याशियों के चयन को लेकर डॉ. हर्षवर्धन भी नाराजगी जता चुके हैं। हालांकि भाजपा पदाधिकारी तमाम उलट-फेर के बावजूद पार्टी उम्मीदवारों की जीत को लेकर आश्वस्त हैं। गांधीनगर विधान सभा सीट के तहत 2012 तक 4 वार्ड आते थे। जिनमें से 3 पर कांग्रेस और एक पर भाजपा जीती थी। इस बार यहां तीन वार्ड हैं। कांग्रेस ने निवर्तमान पार्षद अंजना शर्मा के पति सुरेंद्र शर्मा और रघुवरपुरा वार्ड से निवर्तमान पार्षद वर्याम कौर को इस बार कांति नगर वार्ड पर उम्मीदवार बनाया है। कांति नगर वार्ड से जीते भाजपा पार्षद जितेंद्र चौधरी की जगह कंचन महेश्वरी को उतारा है। जानकारों के अनुसार शास्त्री पार्क वार्ड में करीब 20 हजार मुस्लिम मतदाताओं का आकलन कर ह्यआपह्ण ने रियाजुद्दीन टिकट दिया है। लवली का क्षेत्र होने का फायदा यहां कांग्रेस को 2012 में मिला था। इस बार उसी परिणाम को दोहराने की चुनौती के चलते कांग्रेस अपने रूठों को मनाने के लिए जुट गई है।

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