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अजित सिंह को फॉलो करना पड़ा मायावती का ‘प्रोटोकॉल’, मंच पर चढ़ने से पहले उतारने पड़े जूते!

देवबंद की रैली के दौरान भी जब मायावती स्टेज पर चढ़ रहीं थी और अखिलेश यादव और अजीत सिंह भी उनके पीछे-पीछे थे, तभी बसपा के एक नेता ने अजीत सिंह को रोक लिया।

देवबंद की रैली के दौरान मायावती, अजीत सिंह और अखिलेश यादव।(express photo)

बसपा सुप्रीमो मायावती 2019 के चुनावों में जीत के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहतीं। इसी के तहत बसपा ने उत्तर प्रदेश में सपा और रालोद के साथ गठबंधन कर चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया है। इस गठबंधन को धार देने के लिए मायावती, अखिलेश और अजीत सिंह प्रदेश में कई रैलियां भी साथ कर रहे हैं। मायावती की इन रैलियों को लेकर सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह हर चीज पर नजर रखे हुए हैं, जैसे कि रैली के दौरान कौन-कौन नेता स्टेज पर होगा या फिर कौन-कौन नेता स्टेज पर अपने विचार रखेगा आदि। मायावती को नजदीक से जानने वालों को पता है कि मायावती की रैलियों का एक प्रोटोकॉल है। मायावती के इस प्रोटोकॉल के चलते बीते दिनों देवबंद में हुई गठबंधन की पहली रैली के दौरान रालोद मुखिया अजीत सिंह को भी चकित होना पड़ा।

दरअसल टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के अनुसार, मायावती जब रैली के लिए स्टेज पर पहुंचती हैं तो उन्हें यह पसंद नहीं है कि स्टेज पर कोई जूते पहनकर आए। हालांकि मायावती खुद जूते पहने रहती हैं। देवबंद की रैली के दौरान भी जब मायावती स्टेज पर चढ़ रहीं थी और अखिलेश यादव और अजीत सिंह भी उनके पीछे-पीछे थे, तभी बसपा के एक नेता ने अजीत सिंह को रोक लिया और उन्हें मायावती के उपरोक्त प्रोटोकॉल की जानकारी देते हुए जूते उतारने को कहा। इस पर अजीत सिंह थोड़े चकित भी हुए लेकिन आखिरकार वह जूते उतारकर ही स्टेज पर चढ़े। खबर में यह नहीं बताया गया है कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जूते उतारे या नहीं! मायावती के कुछ सहयोगियों ने बताया कि बहनजी को धूल से एलर्जी है और यही वजह है कि उनकी स्टेज पर लोगों को जूते पहनकर चढ़ने की मनाही है।

बता दें कि यूपी में गठबंधन के तहत बसपा 38, सपा 37 और रालोद 3 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। गठबंधन ने अपनी पहली चुनावी रैली सहारनपुर के देवबंद में की। इस रैली में गठबंधन के नेताओं ने अपने भाषणों में मुस्लिम मतदाताओं को लुभाने का खूब प्रयास किया। अजीत सिंह की बात करें तो वह इस बार उत्तर प्रदेश की मुजफ्फरनगर सीट से चुनाव मैदान में हैं। अजीत सिंह का सामना भाजपा सरकार में मंत्री रहे संजीव बालियान से है। मुजफ्फनगर दंगों के बाद रालोद का आधार वोटबैंक जाट समुदाय पार्टी से छिटक गया था। हालांकि अजीत सिंह को उम्मीद है कि इस बार फिर से उनकी पार्टी को जाटों का समर्थन मिलेगा। इसके साथ ही वह गठबंधन के तहत दलितों और पिछड़े वर्ग के वोटरों का समर्थन पाकर जीत दर्ज करने की आस लगाए बैठे हैं।

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