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वायानाड सीट पर ‘लाल’ खतरा, NDA उम्मीदवार ने चुनाव आयोग से कहा- किडनैप कर सकते हैं नक्सली

बीती 6 मार्च को पुलिस ने वायनाड में एक माओवादी नेता सीपी जलील को एनकाउंटर के दौरान ढेर कर दिया है, इसके बाद से भी वायनाड में पुलिस और सुरक्षाबल हाईअलर्ट पर हैं।

राहुल गांधी जिस वायनाड सीट से चुनाव मैदान में है, वहां माओादियों ने चुनाव बहिष्कार के पोस्टर लगा दिए हैं। (image source-pti/file)

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी उत्तर प्रदेश की अमेठी लोकसभा सीट के साथ ही केरल की वायनाड सीट से भी चुनाव लड़ रहे हैं। बीते दो दिनों से राहुल गांधी वायनाड में ही थे और वहां चुनाव प्रचार के काम में जुटे थे। इस दौरान राहुल गांधी ने वायनाड की पांच विधानसभा सीटों का दौरा किया। वायनाड तमिलनाडु और कर्नाटक की सीमा पर स्थित एक घने जंगलों वाला इलाका है, जो कि माओवादियों से प्रभावित रहा है। अब रेडिफ डॉट कॉम की एक खबर के अनुसार, आगामी लोकसभा चुनावों में माओवादी खतरे का आशंका जतायी जा रही है। माओवादियों द्वारा इलाके में जगह-जगह पोस्टर बैनर लगाकर चुनाव का बायकॉट करने की अपील भी की है। इसके बाद से वायनाड में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। बता दें कि वायनाड सीट पर राहुल गांधी के अलावा एनडीए की तरफ से तुषार वेल्लापल्ली और सीपीआई की तरफ से पीपी सुनीर चुनाव मैदान में हैं। रिपोर्ट के अनुसार, एनडीए के उम्मीदवार तुषार वेल्लापल्ली ने चुनाव आयोग को एक ईमेल भेजा है, जिसमें तुषार वेल्लापल्ली ने केरल पुलिस की खूफिया रिपोर्ट का हवाला दिया है और कहा है कि माओवादी उनका अपहरण कर सकते हैं। एनडीए उम्मीदवार ने चुनाव आयोग से सुरक्षा की मांग की है।

राहुल गांधी अपने वायनाड दौरे पर पुलवामा हमले में शहीद हुए जवान के घर भी जाने वाले थे, लेकिन माओवादी खतरे के चलते पुलिस और एसपीजी ने राहुल गांधी के इस दौरे को कैंसिल कर दिया है। इसके अलावा बीती 6 मार्च को पुलिस ने वायनाड में एक माओवादी नेता सीपी जलील को एनकाउंटर के दौरान ढेर कर दिया है, इसके बाद से भी वायनाड में पुलिस और सुरक्षाबल हाईअलर्ट पर हैं। बता दें कि वायनाड में नक्सल समस्या काफी पुरानी है। हालांकि हाल के समय में इसमें काफी कमी आयी है। वायनाड का घने जंगलों वाला इलाका माओवादियों, नक्सलियों के लिए काफी मुफीद रहा है। साथ ही तमिलनाडु और कर्नाटक राज्यों की सीमा पर मौजूद होने के कारण भी वायनाड नक्सलियों के बचने के लिए काफी फायदेमंद रहा है।

वायनाड में नक्सलवाद की शुरुआत 1970 में हुई थी। हालांकि बीते सालों के दौरान कई नक्सली, माओवादी नेताओं की गिरफ्तारी के चलते यहां नक्सली आंदोलन कमजोर हुआ है। वायनाड एक आदिवासी जिला है और यहां पर गरीबी भी काफी है। स्थिति ये है कि वायनाड देश के सबसे पिछड़े जिलों में से एक माना जाता है। वायनाड में कृषि ही रोजगार का सबसे बड़ा जरिया है। वायनाड को राजनैतिक रुप से कांग्रेस के दबदबे वाली सीट माना जाता है। साल 2009 और 2014 को लोकसभा चुनावों में भी यहां से कांग्रेस प्रत्याशी ने ही जीत दर्ज की थी। वायनाड में तीसरे चरण के तहत 23 अप्रैल को मतदान कराया जाएगा।

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