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मणिपुर विधानसभा चुनाव: पहले चरण का मतदान 4 मार्च को, 168 उम्मीदवारों की किस्मत तय करेंगे 19 लाख मतदाता

पहले चरण में 38 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान होगा

Author इंफाल | March 3, 2017 4:06 PM
बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की ली चुटकी। (पीटीआई फोटो/28 फरवरी, 2017)

मणिपुर विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिये तैयारियां पूरी हो गयी हैं, जहां शनिवार (4 मार्च) को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान होगा। राज्य में मतदान कल सुबह सात बजे शुरू होगा। यहां चुनाव दो चरण में हो रहे हैं। पहले चरण में 38 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान होगा। इसके लिये इंफाल पूर्व, इंफाल पश्चिम, बिष्णुपुर और पहाड़ी जिलों छुरचंदपुर एवं कांगपोकपी में फैले इन इलाकों में 1,643 मतदान केंद्र स्थापित किये गये हैं। पहले चरण में कुल 168 उम्मीदवार चुनाव मैदान में होंगे। मतदाताओं की कुल संख्या 19,02,562 है जिनमें से 9,28,562 पुरुष और 9,73,989 महिला मतदाता हैं। नए मतदाताओं की संख्या 45,642 है। कुल 60 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव की दौड़ में शामिल सभी राजनीतिक पार्टियों ने अपना चुनाव प्रचार मुख्यत: यूनाइटेड नगा काउंसिल द्वारा लागू आर्थिक नाकेबंदी और इसे तोड़ने में राज्य सरकार की नाकामी पर फोकस किया है। कथित विकास की कमी, बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार, कोषों का दुरुपयोग और राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों को भी राजनीतिक पार्टियों ने उठाया है।

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी समेत पार्टी के कई नेताओं ने वर्ष 2015 में केंद्र सरकार एवं एनएससीएन (आईएम) के बीच हुए नगा फ्रेमवर्क समझौता की ‘गोपनीय प्रकृति’ और सामग्री पर सवाल उठाए हैं। भाजपा नेताओं ने राज्य के दो राष्ट्रीय राजमार्गों पर तीन महीने से अधिक समय से चल रही आर्थिक नाकेबंदी को लेकर सत्तारूढ़ पार्टी पर निशाना साधा। वहीं कांग्रेस ने कहा है कि सरकार ने अपने 15 साल के शासन में कई विकास परियोजनाएं कार्यान्वित कीं और बिजली आपूर्ति में सुधार किया। मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह ने अपनी हालिया चुनावी रैली में आरोप लगाया कि भाजपा कांग्रेस द्वारा शुरू एवं उद्घाटित की गयीं रेल परियोजनाओं जैसी परियोजनाओं का श्रेय लेना चाहती है। बहरहाल, पिछले साल अपना अनशन तोड़ ‘पीपल्स रिसर्जेंस एंड जस्टिस अलायंस’ नामक पार्टी का गठन करने वाली मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला चानू पर सभी की निगाहें हैं। ‘अफ्सपा’ हटाने की मांग को लेकर इरोम शर्मिला 16 साल से अनशन पर थीं और अब वह चुनाव लड़ रही हैं।

मणिपुर चुनाव: धमकाऊ फतवे से बेपरवाह नजीमा डटी हैं चुनाव मैदान में

पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में विधानसभा की 60 में से कम से कम एक दर्जन सीटों पर मुसलिम मतदाता ही निर्णायक हैं। फिर भी राज्य की इस पहली मुसलिम महिला उम्मीदवार को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। इरोम शर्मिला की पार्टी पीपुल्स रीसर्जेंस एंड जस्टिस अलायंस (प्रजा) के टिकट पर वाबगाई सीट से चुनाव लड़ रहीं नजीमा को मौलवियों ने मौत के बाद दफनाने के लिए उनके गांव में दो गज जमीन तक नहीं देने की धमकी दी है। बावजूद इसके वे चुनाव जीत कर अल्पसंख्यक महिलाओं के अधिकारों की रक्षा की लड़ाई लड़ना चाहती हैं। इस सीट पर पहले चरण में चार मार्च को ही मतदान होना है।

मणिपुर के नौ फीसद मुसलिम मतदाता यहां भी राजनीतिक दलों की किस्मत बनाने या बिगाड़ने में सक्षम हैं। यहां इस तबके को पांगल या मैतेयी पांगल के नाम से जाना जाता है। नजीमा के खिलाफ फतवा जारी करने वालों ने इसकी कोई वजह तो नहीं बताई है, लेकिन समझा जाता है कि वे उसके चुनाव मैदान में उतरने से नाराज हैं। नजीमा ने शर्मिला के साथ राज्यपाल नजमा हेपतुल्ला से मुलाकात कर उनको इस फतवे के बारे में जानकारी दे दी है। फतवे काइतना आतंक है कि थाउबल जिले में नजीमा के गांव की महिलाएं तक उनसे बातचीत के लिए तैयार नहीं है। नजीमा कहती हैं कि उनका एकमात्र कसूर यह है कि वे महिला हैं। यह बात समाज के चंद लोगों के गले से नीचे नहीं उतर रही है। उनका सवाल है कि आखिर एक मुसलिम महिला चुनाव कैसे लड़ सकती है?

इरोम शर्मिला ने लॉन्च की नई राजनीतिक पार्टी; 2017 में लड़ेंगी मणिपुर विधानसभा चुनाव

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