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फांसी के वक्त नर्वस था नाथूराम गोडसे, कांप रहे थे पैर: याचिका सुनने वाले जज ने बताई उसकी हालत

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): आखिरी दौर की वोटिंग से पहले सियासी गलियारों में नाथूराम गोडसे को लेकर बयानबाजी का दौर फिर तेज हो गया है। इसी बीच उसके केस की सुनवाई करने वाले जज की बातें सामने आई हैं।

नाथूराम गोडसे (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

Lok Sabha Election 2019 के बीच नाथूराम गोडसे को लेकर बयानबाजी का सिलसिला जारी है। कोई गोडसे की तारीफ कर उसे देशभक्त बता रहा है तो कोई आलोचना कर रहा है। इसी बीच गोडसे से जुड़े मामले की सुनवाई में शामिल रहे जस्टिस खोसला की किताब में लिखी एक बात सामने आई है। इस किताब में उन्होंने महात्मा गांधी की हत्या की साजिश और हत्या के बाद गोडसे की हालत के संदर्भ में जानकारी दी थी। खोसला ने गोडसे के नजदीक से उसकी हालत देखी थी। उन्होंने अपनी किताब में उस वक्त के हालातों का जिक्र किया है। इस चुनाव में कोई गोडसे के समर्थन में तो कोई विरोध में खड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र तक की प्रतिक्रिया सामने आई है।

12 मई को तमिलनाडु की एक जनसभा में अभिनेता से राजनेता बने कमल हासन में कहा था, ‘आजाद भारत का पहला आतंकी हिंदू था और उसका नाम नाथूराम गोडसे था। आतंक की शुरुआत वहीं से हुई थी।’ हासन को जवाब देते हुए चार दिनों बाद भोपाल से बीजेपी कैंडिडेट साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कहा, ‘नाथूराम गोडसे एक देशभक्त था, देशभक्त है और देशभक्त रहेगा।’ हालांकि बाद में दोनों ने सफाई देते हुए बयान वापस ले लिए। हासन ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने गोडसे के लिए आतंकी नहीं चरमपंथी (अतिवादी) शब्द का इस्तेमाल किया था। वहीं बीजेपी के दबाव में साध्वी प्रज्ञा ने भी अपना बयान वापस लिया और माफी मांग ली।

यह पहली बार नहीं है जब गोडसे को देशभक्त बताकर उसकी तारीफ की गई हो। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक 1990 के दशक के अंत में महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना की सरकार दौरान एक नाटक हुआ था जिसमें उस समय की परिस्थितियों को समझाकर महात्मा गांधी को मारने की साजिश के पीछे के तर्क देने की कोशिश की थी। 2017 में हिंदू महासभा ने ग्वालियर में गोडसे को समर्पित मंदिर भी बनाया था।

महात्मा गांधी की हत्या के मामले में ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ गोडसे ने याचिका लगाई थी। इस याचिका पर सुनवाई करने वाले जस्टिस जीडी खोसला ने 1965 में एक किताब प्रकाशित की थी। जस्टिस खोसला ने कहा, ‘गोडसे महात्मा गांधी को लेकर गुस्से में था। उसका आरोप था कि महात्मा गांधी ने मुस्लिमों को खुश करने के लिए हिंदुओं के सम्मान से समझौता किया है।’

उन्होंने कहा, ‘महात्मा गांधी को मारने की साजिश बेहद सोच-समझकर की गई थी। गोडसे ने 2 हजार और 3 हजार रुपए की दो इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी। एक में उसने हत्या की साजिश में साथ देने वाले आप्टे की पत्नी को लाभार्थी बनाया, वहीं दूसरी पॉलिसी में उसने सह-आरोपी भाई की पत्नी को लाभार्थी बनाया। 30 जनवरी को हत्या से 10 दिन पहले गांधी को मारने का एक प्रयास नाकाम हो चुका था।’ कोर्ट में दायर मुकदमे के आधार पर जस्टिस खोसला ने दिल्ली के बिरला मंदिर में हुई घटना और उसके बाद के घटनाक्रम की विस्तार से जानकारी दी।

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गांधी को गोली लगने के तुरंत बाद गोडसे को भीड़ ने पीटा, इसके बाद मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारी ने उसे बचाया। इसके बाद साजिश में शामिल दूसरे लोगों को पकड़ने के लिए बड़ा अभियान चलाया गया। पुलिस ने पांच महीनों में जांच पूरी की। लाल किले में ट्रायल हुआ, सुनवाई जज आत्मा चरण ने की थी। उन्होंने कहा, ‘कोर्ट ने 10 फरवरी 1949 को फैसला सुनाया। हिंदू महासभा के नेता वीर सावरकर को भी साजिश का आरोपी बनाया गया था, लेकिन सबूतों के अभाव में उन्हें छोड़ दिया गया। नाथूराम गोडसे और उसके दोस्त नारायण आप्टे को सजा-ए-मौत दी गई। अन्य पांच दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।’

बाकी दोषियों ने पंजाब हाईकोर्ट में अपील की। लेकिन गोडसे ने न तो हत्या के आरोपों को चुनौती दी और न ही मौत की सजा पर सवाल उठाया। गोडसे और आप्टे को 15 नवंबर 1949 को अंबाला जेल में फांसी दे दी गई। जस्टिस खोसला के मुताबिक, ‘गोडसे ने अपने किए पर पश्चाताप करते हुए कहा था कि अगर उसे एक मौका और मिला तो वो अपना पूरा जीवन शांति और देशसेवा में लगाएगा।’

जस्टिस खोसला ने कहा, ‘जब फांसी के लिए ले जाया जा रहा था तब गोडसे आगे चल रहा था। उसके कदम कमजोर पड़ रहे थे। उसका व्यवहार और शारीरिक भाव-भंगिमाएं बता रही थीं कि वह नर्वस और डरा हुआ है। वह इस डर से लड़ने की कोशिश कर रहा था और बार-बार ‘अखंड भारत’ के नारे लगा रहा था लेकिन उसकी आवाज में लड़खड़ाहट आने लगी थी।’

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