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मध्य प्रदेश: भाजपा के पूर्व सीएम बोले- नहीं है मोदी लहर, अच्‍छा उम्‍मीदवार जीतेगा

गोविंदपुरा विधान सभा क्षेत्र पिछड़ी जाति बहुल है। यहां करीब 50 फीसदी से ज्यादा मतदाता पिछड़ी जाति से ताल्लुक रखते हैं।

मध्‍य प्रदेश के पूर्व मुख्‍यमंत्री बाबूलाल गौर। (Express Archive)

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता बाबूलाल गौर ने कहा है कि इस बार के चुनावों में मोदी लहर नहीं है। उन्होंने कहा कि इस बार अच्छा उम्मीदवार ही चुनाव जीत सकेगा। उन्होंने कहा कि जो पार्टी अच्छे उम्मीदवार उतारेगी, उसकी ही जीत होगी। लगे हाथ उन्होंने यह बी कहा कि अगर भाजपा ने सर्वे को आधार बनाकर टिकट बांटा तो राज्य में फिर से भाजपा सरकार बन सकती है। उन्होंने कहा कि उनकी पारंपरिक सीट गोविंदपुरा से अगर भाजपा ने उनकी पूत्रवधू कृष्णा गौर को उम्मीदवार बनाया तो वो चुनाव नहीं लड़ेंगे।

बता दें कि मध्य प्रदेश में भाजपा ने उम्मीदवारों की पहली लिस्ट आज (शुक्रवार, 02 नवंबर) ही जारी की है। 177 नामों की इस लिस्ट में गोविंदपुरा को शामिल नहीं किया गया है। यहां से बाबूलाल गौर पिछले 44 साल से जीतते आ रहे हैं। हालांकि, माना जा रहा है कि बाबूलाल गौर इस बार विधान सभा चुनाव नहीं लड़ेंगे और राजनीतिक संन्यास लेंगे लेकिन इस बात की भी आशंका है कि अगर पार्टी ने उनकी पूत्रवधू को टिकट नहीं दिया तो वो बगावत कर सकते हैं। भाजपा की पहली लिस्ट में 22 मौजूदा विधायकों को टिकट नहीं दिया गया है। शिवराज सिंह की सरकार में मंत्री माया सिंह का भी टिकट पार्टी ने काट दिया है। इस बीच, टिकट बंटवारे के बाद एमपी में भाजपाइयों का बवाल शुरू हो गया है।

गोविंदपुरा विधान सभा क्षेत्र पिछड़ी जाति बहुल है। यहां करीब 50 फीसदी से ज्यादा मतदाता पिछड़ी जाति से ताल्लुक रखते हैं। हालांकि लंबे समय से यहां से विधायक होने के बावजूद इलाके में बिजली, पानी, सड़क की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है लेकिन गौर से मतदाताओं का लगाव इतना ज्यादा है कि हर बार चुनाव में उनकी जीत अंतर बढ़ता गया है। पिछले विधान सभा चुनाव 2013 में उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार गोविंद गोयल को 70,000 वोटों से हराया था। 88 साल के बाबूलाल गौर समय-समय पर भाजपा की भी मुश्किलें बढ़ाते रहे हैं। इसी साल अगस्त में उन्होंने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ की तारीफों में पुल बांधे थे। इससे पार्टी को असहजता का सामना करना पड़ा था। गौर अगस्त 2004 से नवंबर 2005 तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे हैं।

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