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Loksabha Elections 2019: MP नरेंद्र मोदी का रिपोर्ट कार्ड- औसत से भी कम किया खर्च, ग्रामीण विकास के मानदंडों पर भी पीछे रही काशी

Loksabha Elections 2019: साल 2014 में नरेंद्र मोदी पहली बार सांसद बने थे। वह बनारस से करीब 3.71 लाख के मार्जिन वोट से चुनाव जीते थे। उन्हें कुल 56.37 फीसदी यानी 5 लाख 81 हजार 22 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल रहे थे।

वाराणसी संसदीय क्षेत्र के तहत पांच विधान सभा क्षेत्र आते हैं। वाराणसी जिला का अधिकांश शहरी इलाका इस संसदीय क्षेत्र के तहत आता है। बावजूद इसके पीएम का संसदीय क्षेत्र इस पारामीटर पर पिछड़ा हुआ है।

Loksabha Elections 2019: बतौर सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बनारस के लिए क्‍या और कितना किया? 25 और 26 अप्रैल को जब पीएम मोदी बनारस में थे, तो मोदी-मोदी के नारों के शोर में यह सवाल दब गया। जहां सुनाई दिया, वहां लोगों से मिला-जुला जवाब आया। लेकिन, आंकड़ों पर गौर करें तो एक सांसद के रूप में पीएम नरेंद्र मोदी का कामकाज औसत रहा है। सांसद विकास निधि के तौर पर पांच साल में हरेक सांसद को अपने क्षेत्र के विकास के लिए कुल 25 करोड़ रुपये (सालाना पांच करोड़) मिलते हैं। ‘द प्रिंट’ के मुताबिक इस साल 25 जनवरी तक नरेंद्र मोदी ने 25 में से मात्र 16.04 करोड़ रुपये ही खर्च किए थे। यह राज्य में खर्च सांसद निधि के औसत 17.77 करोड़ रुपये और राष्ट्रीय औसत 17.3 करोड़ रुपये से भी कम है। हालांकि, सरकारी वेबसाइट पर बताया गया है कि नरेंद्र मोदी द्वारा संस्तुति किए गए और जिला प्रशासन द्वारा आवंटित राशि का करीब 94.22 फीसदी हिस्सा खर्च हो चुका है और मात्र 2.67 करोड़ रुपये खर्च नहीं हुए हैं।

ग्रामीण विकास के मानदंडों पर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी पिछड़ा हुआ है। ग्रामीण विकास मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक मिशन अंत्योदय के तहत 15 पारामीटर्स पर वाराणसी संसदीय सीट मात्र 100 में 47 प्वाइंट ही स्कोर कर सका, जबकि राज्य का औसत स्कोर 38 है। ग्रामीण विकास के तहत जिन पारामीटर्स को शामिल किया गया है उनमें स्वास्थ्य और सफाई, कृषि, ग्रामीण आवास, भूमि विकास, पेयजल की उपलब्धता, ग्रामीण विद्युतीकरण, पशुपालन, गरीबी उन्मूलन, सामाजिक कल्याण, महिला एवं बाल विकास, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, शिक्षा एवं व्यावसायिक शिक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं।

बता दें कि वाराणसी संसदीय क्षेत्र के तहत पांच विधान सभा क्षेत्र आते हैं। वाराणसी जिला का अधिकांश शहरी इलाका इस संसदीय क्षेत्र के तहत आता है। बावजूद इसके पीएम का संसदीय क्षेत्र इस पारामीटर पर पिछड़ा हुआ है। हालांकि, ग्रामीण विद्युतीकरण में इस क्षेत्र के गांव पांच में पांच प्वाइंट स्कोर किए हैं लेकिन गरीबी उन्मूलन में राज्य के साथ-साथ वाराणसी को भी 9 में शून्य अंक मिले हैं।

सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत भी पीएम मोदी के गोद लिए गांवों की स्थिति औसत ही है। नियमों के मुताबिक सांसद को किसी गांव को गोद लेकर उसे आदर्श ग्राम के रूप में विकसित करना होता है। इस लिहाज से पीएम मोदी ने वाराणसी के तीन गांवों जयापुरा, नागेपुर और ककरहिया को गोद लिया है। ग्रामीण विकास मंत्रालय की नेशनल रैंकिंग में जयापुरा ग्राम पंचायत 43वां, नागेपुर 44वां और ककरहिया 54वां स्थान रखता है। इस सूची में सबसे निचला रैंक 99वां है। यानी रैंकिंग से साफ है कि इन तीनों गांवों में विकास का काम अभी अधूरा है।

साल 2014 में नरेंद्र मोदी पहली बार सांसद बने थे। वह बनारस से करीब 3.71 लाख के मार्जिन वोट से चुनाव जीते थे। उन्हें कुल 56.37 फीसदी यानी 5 लाख 81 हजार 22 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल रहे थे। उन्हें 2 लाख 9 हजार 238 (20.30 फीसदी) वोट मिले थे। कांग्रेस के अजय राय तीसरे नंबर पर थे।

2019 चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी फिर बनारस से मैदान में हैं। उन्‍होंने गुरुवार (25 अप्रैल) और शुक्रवार (26 अप्रैल) को बनारस में न केवल अपनी मौजूदगी का अहसास कराया बल्कि मेगा रोड शो का आयोजन कर और नामांकन में एनडीए के कई बड़े नेताओं का जुटान कर यह साबित करने की कोशिश की कि उनकी लोकप्रियता का ग्राफ बनारस से लेकर पूरे देश में और भारतीय जनता पार्टी से लेकर पूरे एनडीए में बरकरार है। हालांकि, विपक्षी आरोप लगाते रहे हैं कि पीएम मोदी की लोकप्रियता में लगातार गिरावट आ रही है।

25 अप्रैल की शाम मोदी बनारस पहुंचे। रोड शो किया और गंगा आरती की। अगले दिन काल भैरव मंदिर में दर्शन कर नामांकन पत्र दाखिल किया। दो दिन बनारस मोदीमय रहा। अधिकांश की जुबां पर उन्हीं का नाम था। हालांकि, कुछ इलाकों में लोगों ने उनके खिलाफ अपनी भाववाएं भी प्रकट की। देश भर के मीडिया को कई लोगों ने पिछले पांच साल में बनारस में हुए कामकाज का हवाला देकर बताया कि बनारस में बहुत काम हुए, जबकि कुछ लोगों ने चुनिंदा इलाकों में काम कराने का आरोप भी लगाया।

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