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Loksabha Elections 2019: नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ेंगे बाहुबली अतीक अहमद, मैदान से हटने का किया ऐलान

Loksabha Elections 2019: रविवार को नैनी जेल से उन्होंने इस बाबत एक चिट्ठी मीडिया के लिए भिजवाई थी। चिट्ठी के मुताबिक, "देश में लोकतंत्र मजबूत है। फिर भी ऐसी सोच वाले लोग हैं, जो लोकतंत्र को खत्म कर हिटलशाही लाना चाहते हैं।"

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Loksabha Elections 2019: बाहुबली नेता और पूर्व सांसद अतीक अहमद वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आम चुनाव नहीं लड़ेंगे। रविवार (12 मई, 2019) रात उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर उत्तर प्रदेश की इस वीआईपी सीट से चुनावी मैदान में पीछे हटने का फैसला कर लिया। दरअसल, अहमद ने नामांकन के बाद प्रचार के लिए परोल की अर्जी दाखिल की थी, पर उसे कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया। कोर्ट का तर्क था, “पहले बेल जिस आधार पर खारिज हो चुकी है, ऐसे में बगैर नए तथ्यों के उसकी अर्जी को दोबारा स्वीकारा नहीं जा सकता।”

रविवार को नैनी जेल से उन्होंने इस बाबत एक चिट्ठी मीडिया के लिए भिजवाई थी। उसमें उन्होंने परोल न मिल पाने को चुनाव में पीछे हटने की असल वजह बताया। चुनाव एजेंट एडवोकेट शहनवाज आलम ने बाहुबली नेता की चिट्ठी मीडियाकर्मियों के समक्ष जारी की। उनके हवाले से रिपोर्ट्स में कहा गया, “वह किसी भी उम्मीदवार का समर्थन नहीं करेंगे।”

चिट्ठी के मुताबिक, “देश में लोकतंत्र मजबूत है। फिर भी ऐसी सोच वाले लोग हैं, जो लोकतंत्र को खत्म कर हिटलशाही लाना चाहते हैं।” हालांकि, स्पष्ट किया गया कि काशी में नामांकन पत्र वापसी प्रक्रिया पूरी होने की वजह से बैलट यूनिट में अतीक अहमद का नाम और चुनाव चिह्न रहेगा।

बता दें कि 19 मई को आखिरी चरण का मतदान है, जिसके तहत बनारस में भी वोटिंग होगी। पीएम मोदी दूसरी बार इस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि कांग्रेस ने उनके सामने अजय राय को उतारा है। वहीं, गठबंधन (सपा, बसपा और रालोद) की तरफ से शालिनी यादव को टिकट मिला है। जानकारी के मुताबिक, इस सीट पर कुल 25 उम्मीदवार मैदान में हैं।

जानें बाहुबली नेता कोः अतीक अहमद पर मौजूदा समय में 75 आपराधिक मामले विचाराधीन बताए जाते हैं। एक दौर था, जब यूपी और बिहार में मर्डर, किडनैपिंग, वसूली के मामलों में उनका नाम आता था। बाद में जुर्म की दुनिया से उन्होंने राजनीति का रुख किया। वह 1989 में पहली बार इलाहाबाद (पश्चिमी) विस सीट से विधायक बने। आगे 1991 और 1993 में स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़े। उनमें भी उन्हें जीत हासिल हुई। 1996 में उन्हें समाजवादी पार्टी ने टिकट दिया था।

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